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Air-to-Air Missile Deal: पड़ोसी देश चीन अपने डिफेंस सिस्टम को सालों से आक्रामक तरीके से अपग्रेड कर रहा है. फाइटर जेट से लेकर मिसाइ और एयर डिफेंस सिस्टम तक में चीन ने काफी प्रगति की है. हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली के मामले में भी बीजिंग ने सफलता हासिल की है. इसे देखते हुए भारत भी सतर्क हो गया है. ताबड़तोड़ डिफेंस डील के साथ ही देसी तकनीक से भी वेपन सिस्टम डेवलप किए जा रहे हैं.

भारत ने रूस से R-37M एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने को लेकर 11 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की डील की है. (फाइल फोटो/Reuters)
भारत की वायु शक्ति को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए रूस ने अपनी अत्याधुनिक R-37M अल्ट्रा-लॉन्ग-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल के निर्यात को मंजूरी दे दी है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय हवाई संतुलन (Regional Air Power Balance) तेजी से बदल रहा है और चीन तथा पाकिस्तान की ओर से लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताओं में लगातार इजाफा हो रहा है. मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूसी रक्षा निर्माताओं को क्रेमलिन से इस मिसाइल को भारतीय वायुसेना (IAF) को सप्लाई करने की अनुमति मिल चुकी है. यह सौदा भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उन चुनौतियों का जवाब है जो मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आई थीं. इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमान (Su-30MKI और राफेल) को पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल की जा रही चीनी PL-15 मिसाइलों से गंभीर ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ (BVR) खतरे का सामना करना पड़ा था. ‘defence.in’ की रिपोर्ट के अनुसार, PL-15 मिसाइलें AESA रडार सीकर से लैस हैं और इनकी मारक क्षमता करीब 200 से 300 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे वे लंबी दूरी की लड़ाई में बेहद खतरनाक साबित होती हैं.
| R-37M vs PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल |
| R-37M मिसाइल | PL-15 मिसाइल |
| R-37M (RVV-BD) मिसाइल की अधिकतम मारक दूरी 300-400 किमी तक बताई जाती है, जबकि एक्सपोर्ट वर्जन RVV-BD की रेंज लगभग 200 किमी तक सीमित रहती है. | चीन की PL-15 missile एक लंबी दूरी की, एक्टिव रडार-गाइडेड BVRAAM मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता 200–300 किमी तक बताई जाती है, जबकि इसका एक्सपोर्ट वर्जन PL-15E करीब 145 किमी रेंज का है. |
| यह मिसाइल टर्मिनल फेज में मैक 5-6 (7400 KMPH) की रफ्तार हासिल कर सकती है, जिससे यह दुश्मन के हाई-वैल्यू एयरक्राफ्ट को तेजी से निशाना बनाने में सक्षम होती है. | यह मिसाइल AESA (Active Electronically Scanned Array) रडार सीकर से लैस है, जो इसे जैमिंग से बचाते हुए जटिल वातावरण में भी लक्ष्य को ट्रैक करने में सक्षम बनाता है. |
| R-37M को खासतौर पर बड़े और अहम एयरबोर्न प्लेटफॉर्म जैसे AWACS, टैंकर, बॉम्बर और कमांड एयरक्राफ्ट को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. | PL-15 में ड्यूल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर लगा है, जिससे यह अंतिम चरण में भी हाई स्पीड (Mach 5+) और ऊर्जा बनाए रखती है, जिससे हिट करने की संभावना बढ़ती है. |
| इसमें लगभग 60 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव फ्रैगमेंटेशन वॉरहेड होता है और यह जेटिसनेबल रॉकेट बूस्टर व लॉफ्टेड ट्राजेक्टरी का उपयोग कर लंबी दूरी हासिल करती है. | इसे चीन के आधुनिक फाइटर जेट्स जैसे Chengdu J-10C, Shenyang J-16, Chengdu J-20 और पाकिस्तान के JF-17 Block 3 पर तैनात किया गया है; मई 2025 में इसका पहली बार युद्ध में इस्तेमाल भी हुआ. |
| यह मिसाइल Su-57, Su-30, Su-35 और MiG-31BM जैसे लड़ाकू विमानों से लॉन्च की जा सकती है, हालांकि अत्यधिक फुर्तीले फाइटर जेट्स के खिलाफ इसकी प्रभावी मारक दूरी कम हो जाती है. | भारत के लिए यह मिसाइल फर्स्ट-शॉट बढ़त का खतरा पैदा करती है; हालांकि मई 2025 में पंजाब में DRDO को इसका मलबा मिलने के बाद इसकी तकनीक का विश्लेषण कर स्वदेशी Astra Mk-2 कार्यक्रम को मजबूत करने की दिशा में काम तेज किया गया है. |
निर्णायक बढ़त
बदले हालात और माहौल में R-37M मिसाइल का शामिल होना भारतीय वायुसेना को एक निर्णायक बढ़त दिला सकता है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक, भारत करीब 1.2 अरब डॉलर (11000 करोड़ रुपये से ज्यादा) के सौदे के तहत लगभग 300 R-37M मिसाइलें खरीदने पर विचार कर रहा है. इन मिसाइलों का मुख्य प्लेटफॉर्म Su-30MKI होगा, जो वर्तमान में भारतीय वायुसेना का सबसे अहम और भारी-भरकम एयर सुपीरियरिटी फाइटर है. तकनीकी दृष्टि से इस मिसाइल का इंटीग्रेशन अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है. R-37M पहले से ही रूस के Su-30SM विमान पर ऑपरेशनल है, जो भारतीय MKI वेरिएंट से काफी हद तक समानता रखता है. ऐसे में अपग्रेड मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर स्तर पर होंगे, जिनमें Bars रडार और मिशन कंप्यूटर में बदलाव शामिल हैं, ताकि विमान मिसाइल के गाइडेंस और टार्गेटिंग सिस्टम के साथ पूरी तरह तालमेल बिठा सके. योजना के अनुसार, हर Su-30MKI विमान दो R-37M मिसाइलों को अपने अंडर-फ्यूजलेज हार्डपॉइंट्स पर ले जा सकेगा, जिससे उसकी एयरोडायनामिक स्थिरता और मल्टी-रोल क्षमताएं प्रभावित नहीं होंगी.
चीन की PL-15 और PL-17 एयर टू एयर मिसाइलों के खतरे को देखते हुए भारत ने रूस से घातक मिसाइल खरीदने का फैसला किया है. (फाइल फोटो/Reuters)
400 किलोमीटर तक कार करने की क्षमता
R-37M की सबसे बड़ी खासियत इसकी असाधारण मारक दूरी है. यह मिसाइल उच्च ऊंचाई और तेज गति से उड़ान भरने वाले इंटरसेप्टर विमान से दागे जाने पर 400 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है. Su-30MKI से लॉन्च किए जाने पर इसकी प्रभावी रेंज करीब 350 किलोमीटर मानी जा रही है, जो इसे मौजूदा अधिकांश एयर-टू-एयर मिसाइलों से कहीं आगे ले जाती है. यही कारण है कि इसे उभरती चीनी PL-17 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों के सीधे मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है. एविएशन जगत में R-37M को ‘AWACS किलर’ के नाम से भी जाना जाता है. यह मिसाइल पारंपरिक डॉगफाइट के लिए नहीं, बल्कि दुश्मन के उच्च-मूल्य वाले हवाई संसाधनों (जैसे एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम, मिड-एयर रीफ्यूलिंग टैंकर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म) को निशाना बनाने के लिए डिजाइन की गई है. इसकी मारक क्षमता का आधार इसका ड्यूल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर है, जो इसे टर्मिनल फेज में मैक 6 (करीब 7,400 KMPH) की हाइपरसोनिक गति तक पहुंचा देता है. इतनी तेज रफ्तार दुश्मन को प्रतिक्रिया करने के लिए बेहद कम समय देती है.
मॉडर्न गाइडेंस सिस्टम
मिसाइल का गाइडेंस सिस्टम भी अत्याधुनिक है. यह शुरुआती चरण में इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम के साथ मिड-कोर्स अपडेट्स का उपयोग करती है और अंतिम चरण में एक्टिव रडार होमिंग सीकर लक्ष्य को सटीक रूप से पकड़ लेता है. इसकी ‘लॉफ्टेड ट्रैजेक्टरी’ (यानी लॉन्च के बाद ऊपरी वायुमंडल में चढ़कर फिर लक्ष्य पर तेजी से गिरना)इसे ऊर्जा बचाने और अंतिम चरण में अधिक गति बनाए रखने में मदद करती है, जिससे दूर या बचने की कोशिश कर रहे लक्ष्यों को भी आसानी से भेदा जा सकता है. हालांकि, भारत इस खरीद को एक स्थायी समाधान के रूप में नहीं, बल्कि एक अंतरिम रणनीतिक कदम के रूप में देख रहा है. देश का दीर्घकालिक लक्ष्य स्वदेशी रक्षा तकनीकों पर निर्भरता बढ़ाना है. इसी दिशा में ‘अस्त्र’ मिसाइल सीरीज पर तेजी से काम चल रहा है. अस्त्र Mk2 को 200 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने के लिए विकसित किया जा रहा है, जबकि अस्त्र Mk3, जिसमें हाल ही में सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल परीक्षण हुआ है, भविष्य में करीब 350 किलोमीटर की मारक क्षमता प्रदान कर सकता है.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

