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Brinjal Cultivation: नान बाबू गोस्वामी के मुताबिक बैंगन की फसल लगभग 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है. इसके बाद कई महीनों तक लगातार तुड़ाई की जा सकती है. वे बताते है कि नियमित रूप से बाजार में बैंगन बेचने से उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है. स्थानीय मंडियों के साथ-साथ आसपास के अन्य बाजारों में भी उनकी फसल की अच्छी मांग है.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के एक किसान ने बैंगन की खेती से नई मिसाल कायम की है. पारंपरिक फसलों की जगह सब्जी उत्पादन को अपनाकर उन्होंने अब बैंगन की फसल से अच्छी कमाई शुरू कर दी है. उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान भी सब्जी की खेती की ओर रुख कर रहे है.
लोकल 18 से बातचीत में प्रगतिशील किसान नान बाबू गोस्वामी बताते है कि बैंगन ऐसी फसल है जिसकी मांग बाजार में पूरे साल बनी रहती है. इसी कारण उन्होंने अपने खेत में बड़े पैमाने पर इसकी खेती शुरू की. शुरुआत में उन्होंने खेत की बेहतर जुताई की. उन्नत किस्म के बीज चुने और समय-समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और पौधों की देखभाल पर खास ध्यान दिया.
नान बाबू गोस्वामी बताते है कि उन्होंने कक्षा 8 तक पढ़ाई की, उसके बाद पढ़ाई छोड़कर पूरी तरह खेती-किसानी को ही अपना लिया. फिलहाल वे लगभग 15 बिस्वा भूमि में बैंगन की खेती कर रहे है. नान बाबू गोस्वामी के अनुसार उन्हें बैंगन की खेती का आइडिया बलरामपुर के एक किसान को देखकर मिला. इसके बाद पानी संस्थान से उन्हें आधुनिक तरीके से खेती करने की प्रेरणा मिली.
नान बाबू गोस्वामी के मुताबिक बैंगन की फसल लगभग 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है. इसके बाद कई महीनों तक लगातार तुड़ाई की जा सकती है. वे बताते है कि नियमित रूप से बाजार में बैंगन बेचने से उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है. स्थानीय मंडियों के साथ-साथ आसपास के अन्य बाजारों में भी उनकी फसल की अच्छी मांग है.
नान बाबू गोस्वामी का कहना है कि यदि बैंगन की खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो कम क्षेत्र में भी बेहतर आय संभव है. फसल की गुणवत्ता अच्छी होने पर व्यापारी ऊंचे दाम देने को तैयार रहते है. यही वजह है कि उनकी आय अब लाखों रुपये तक पहुंच गई है.
नान बाबू गोस्वामी बताते हैं कि बैंगन की खेती में उनकी लागत लगभग 2,000 से 2,500 रुपये आई है. वहीं, वे बताते हैं कि इस फसल से लगभग 50,000 से 60,000 रुपये की आमदनी की उम्मीद है और अगर फसल बेहतर रही तो इनकम लाखों रुपये तक पहुंच सकती है.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें

