सहारनपुर: सहारनपुर जनपद, जो कि उत्तर प्रदेश का अंतिम जिला है, तीन राज्यों की सीमाओं से घिरा हुआ है. पश्चिमी यूपी में किसान बड़ी मात्रा में सब्जियों की पैदावार करते हैं और यहां की सब्जियां यूपी के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और यहां तक कि दिल्ली की मंडियों में भी भेजी जाती हैं. सहारनपुर के किसान खीरा, लौकी, कद्दू, भिंडी, टिंडा, तोरी, बैंगन, फ्रेंच बीन्स और टमाटर जैसी फसलों की खेती करते हैं.
अब धीरे-धीरे गर्मी बढ़ रही है और इस मौसम में सब्जी की खेती करने वाले किसानों के सामने फल फटने की समस्या काफी देखने को मिलती है. सब्जियों के फटने से जहां उत्पादन प्रभावित होता है, वहीं किसानों की आय भी कम हो जाती है. आखिर यह समस्या क्यों होती है और इससे कैसे बचा जा सकता है, इस बारे में कृषि विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है.
गर्मी के मौसम में खेतों में नमी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. सब्जी की फसल में नियमित सिंचाई करनी चाहिए, लेकिन सिंचाई का समय और मात्रा सही होना भी उतना ही आवश्यक है. किसानों को सुबह या शाम के समय हल्की सिंचाई करनी चाहिए.
सही सिंचाई और उर्वरक से मिलेगी राहत
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं प्रोफेसर डॉ. आई.के. कुशवाहा ने बताया कि गर्मियों में सब्जियों के फटने के कई कारण होते हैं. सबसे प्रमुख कारण सिंचाई की कमी है. जब तेज गर्मी के कारण खेत पूरी तरह सूख जाता है और अचानक भारी सिंचाई कर दी जाती है, तो पौधा तेजी से पानी अवशोषित करता है. इससे फल पर दबाव बढ़ता है और उसमें दरार (क्रैक) आ जाती है.
उन्होंने बताया कि गर्म भूमि में अचानक पानी देने से फल उस दबाव को सहन नहीं कर पाता और फट जाता है. इस समस्या से बचने के लिए किसानों को संतुलित उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए.
सूक्ष्म तत्वों का करें उपयोग
डॉ. कुशवाहा के अनुसार, जिंक सल्फेट, बोरॉन, मैग्नीशियम, मोलिब्डेनम और कैल्शियम जैसे सूक्ष्म तत्व फल के छिलके को मजबूत बनाते हैं और उसकी चमक बढ़ाते हैं. यदि किसानों ने बेसल डोज में संतुलित उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है, तो वे 7 से 10 दिन के अंतराल पर स्प्रे के रूप में इनका छिड़काव कर सकते हैं.
जरूरी सलाह
किसानों को अपने खेत में नमी बनाए रखनी चाहिए और खेत को पूरी तरह सूखने नहीं देना चाहिए. संतुलित सिंचाई और उचित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर फल फटने की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है.

