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मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के गुड़ी वन परिक्षेत्र में बीते कुछ वर्षों में ऐसा बदलाव देखने को मिला है, जिसे किसी चमत्कार से कम नहीं कहा जा सकता. एक समय यह इलाका अतिक्रमण और अवैध कटाई की वजह से पूरी तरह बर्बाद हो चुका था, जंगल सिमटते जा रहे थे और हरियाली लगभग खत्म हो चुकी थी, लेकिन अब वही जमीन फिर से हरे-भरे जंगल में बदलती नजर आ रही है.
खंडवा में हरियाली का बड़ा चमत्कार! 4 साल पहले जो जंगल था रेगिस्तान जैसा, आज वहीं लहलहा रहे हैं हरे-भरे बांसवन अमले की मेहनत से वीरान जमीन बनी घना जंगल
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के गुड़ी वन परिक्षेत्र में बीते कुछ वर्षों में ऐसा बदलाव देखने को मिला है, जिसे किसी चमत्कार से कम नहीं कहा जा सकता. एक समय यह इलाका अतिक्रमण और अवैध कटाई की वजह से पूरी तरह बर्बाद हो चुका था, जंगल सिमटते जा रहे थे और हरियाली लगभग खत्म हो चुकी थी, लेकिन अब वही जमीन फिर से हरे-भरे जंगल में बदलती नजर आ रही है.
गुड़ी रेंज में लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या बनी हुई थी। वन भूमि पर कब्जे कर खेती की जा रही थी और धीरे-धीरे पूरा क्षेत्र बंजर होता जा रहा था। खासतौर पर वर्ष 2018 के बाद अतिक्रमण तेजी से बढ़ा, जिससे जंगल का अस्तित्व खतरे में पड़ गया। हालात इतने खराब हो गए थे कि यह इलाका किसी सूखे रेगिस्तान जैसा दिखाई देने लगा था.
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स्थिति की गंभीरता को समझते हुए वन विभाग ने सख्त कदम उठाए। वर्ष 2024-25 में विशेष अभियान चलाकर नहारमाल और भिलाई खेड़ा क्षेत्र को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण मुक्त कराया गया. इस दौरान कई बार अतिक्रमणकारियों से विरोध और झड़प की स्थिति भी बनी, लेकिन वनकर्मियों ने पीछे हटने के बजाय लगातार कार्रवाई जारी रखी.
अतिक्रमण हटाने के बाद सबसे बड़ी चुनौती थी उस जमीन को फिर से जंगल में बदलना। इसके लिए वन विभाग ने सुनियोजित कार्ययोजना तैयार की। रेंजर स्तर से लेकर मैदानी कर्मचारियों तक सभी ने मिलकर लगातार गश्त बढ़ाई, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की और पौधरोपण का बड़ा अभियान शुरू किया.
करीब 400 हेक्टेयर भूमि पर 35 हजार से अधिक बांस के पौधे लगाए गए, साथ ही बबूल और अन्य स्थानीय प्रजातियों के बीज भी बोए गए। प्राकृतिक रूप से उगने वाले पौधों को भी संरक्षण दिया गया। लगातार देखरेख, बारिश और अनुकूल वातावरण के कारण अब इस क्षेत्र में तेजी से हरियाली लौट आई है। जहां पहले सूखी जमीन थी, वहां अब घना जंगल आकार लेने लगा है.
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस क्षेत्र में अब न केवल हरियाली बढ़ी है, बल्कि वन्यजीवों की वापसी भी शुरू हो गई है. चीतल, सांभर और तेंदुआ जैसे वन्य प्राणी यहां फिर से दिखाई देने लगे हैं, जो इस बात का संकेत है कि जंगल धीरे-धीरे अपने पुराने स्वरूप में लौट रहा है.
इस पूरे क्षेत्र की निगरानी के लिए वन विभाग के लगभग 30 कर्मचारी लगातार तैनात हैं. इसके साथ ही आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ड्रोन से भी नजर रखी जा रही है, ताकि दोबारा अतिक्रमण न हो सके और जंगल सुरक्षित रह सके.
गुड़ी रेंज की खास बात यह भी है कि इसकी सीमाएं महाराष्ट्र के जंगलों से जुड़ी हुई हैं, जिससे यहां वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। यह इलाका सतपुड़ा और निमाड़ के विशाल वन क्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए इसका संरक्षण पर्यावरण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
खंडवा के गुड़ी जंगल की यह कहानी एक बड़ी सीख देती है कि अगर मजबूत इरादे, सही योजना और निरंतर प्रयास हो, तो बंजर जमीन को भी फिर से हरा-भरा जंगल बनाया जा सकता है.

