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धर्म नगरी अवंतिका मे विश्वा प्रसिद्ध बाबा महाकाल आस्था का प्रमुख केंद्र है. मंदिर परिसर में मौजूद प्राचीन कोटितीर्थ कुंड का धार्मिक महत्व भी विशेष है. पौराणिक मान्यताओं में इस कुंड का वर्णन मिलता है और इसे बेहद पवित्र माना गया है. इसी जल से बाबा महाकाल का आज भी स्न्नान होता है. जानिए आखिर क्यों.
विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन मे कई ऐसे अनगिनत रहस्य छुपे है. जो कम लोग ही जानते है. महाकाल मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन कोटितीर्थ कुंड का विशेष धार्मिक महत्व है. मान्यता है कि सदियों से इसी कुंड के पवित्र जल से भगवान महाकालेश्वर का पूजन, अभिषेक, मंगला आरती और पंचामृत अभिषेक किया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देशभर के पवित्र तीर्थों और जलाशयों का जल इस कुंड में समाहित है.
इसे औषधीय गुणों से युक्त भी माना जाता है. श्रद्धालुओं की मान्यता है कि बाबा महाकाल के अभिषेक के बाद इस पवित्र जल का सेवन करने से रोग, कष्ट, पीड़ा और बाधाएं दूर होती हैं. यही वजह है कि कोटितीर्थ कुंड आस्था का केंद्र है. लेकिन यह पवित्र कुंड कैसे बना है इसके पीछे भी एक पर्चीन कहानी छुपी हुई है.
हनुमान जी से जुडा है कनेक्शन
पौराणिक मान्यता अनुसार अयोध्या नगरी भगवान श्री राम के विजयी होने पर यज्ञ के लिए सभी पवित्र जलाशय का जल भगवान हनुमान जी लेकर आए थे. और आखरी में वह अवंतिका नगरी में पहुंचे थे, तभी उन्होंने इस कुंड में उस समस्त तीर्थो का जल डाला था. महाकाल मंदिर परिसर में स्थित भगवान सूर्यमुखी हनुमान जी प्रतिमा, जिनके एक हाथ में कलश है और दूसरे हाथ में सोटा है, जो इस कथा को प्रमाणित करता हैं. यहा दूर दूर से श्रद्धालु आते है.
आखिर क्या है इस कुंड की विशेषता?
कोटितीर्थ कुंड की मुख्य विशेषताएँ और मान्यताएं सभी तीर्थों का फल है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस कुंड के जल से आचमन करने मात्र से करोड़ों तीर्थों के समान पुण्य की प्राप्ति होती है. जल अभिषेक का भी है विशेष महत्व, मंदिर में भगवान महाकाल की भस्म आरती, मंगला आरती और अन्य पूजन के लिए इसी कुंड के पवित्र जल का उपयोग किया जाता है. इतना ही नहीं मान्यता है कि औषधीय व चमत्कारी जल इस कुंड मे है. ऐसा विश्वास है कि इस जल के छिड़काव या इसे ग्रहण करने से शारीरिक कष्ट, रोग और व्याधियां दूर होती हैं. साथ ही यह ऐतिहासिक कुंड आदि अनादि काल से भरा हुआ है . विपरीत परिस्थितियों में भी कभी नहीं सूखता.

