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जंतर मंतर में 7 अक्टूबर को सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए कांग्रेसी कार्यकर्ता जुटे थे. लेकिन प्रदर्शन के बीच कांग्रेसी प्रदर्शनकारियों ने जो किया और जो मौके से तस्वीरें-फुटेज सामने आई हैं, उन्हें देखने के बाद उनके मंसूबों पर सवाल खड़े होने लगे हैं. प्रदर्शनकारी लगातार हंगामे के बीच पुलिस कर्मियों को निशाना बनाते हुए कैमरों में कैद हुए. कुछ ऐसी ही हरकतों की फुटेज दिल्ली पुलिस ने भी जारी की है.
एक तरफ प्रदर्शनकारियों की देखभाल करतीं दिल्ली पुलिस की महिला कर्मी, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं प्रदर्शनकारियों का शिकार बनते जवान.
कहने के लिए कांग्रेस का मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन था. लेकिन, प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर जो नजारा नजर आया, वह कुछ और ही बयां कर रहा था. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कोशिश अपनी बात कहने से ज्यादा हंगामे को हवा देने की थी. इस हंगामे के बीच कैमरों की लेंस को अपने ऊपर केंद्रित करने के साथ-साथ उन पुलिस कर्मियो को सीधे तौर पर अपना निशाना बनाने की थी, जो किसी भी सूरत में कानून व्यवस्था को बरकरार बनाए रखना चाहते थे. शायद तभी प्रदर्शनकारियों ने हालात को काबू करने की कोशिश करते पुलिस कर्मियों को लगातार निशाना बनाया जाता रहा है.
कैमरों में कैद तस्वीरों और फुटेज से साफ पता चल रहा है कि प्रदर्शनकारियों के खास निशाने पर दिल्ली पुलिस की महिला पुलिसकर्मी भी थीं. बात इन महिला पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनकी अस्मत को तार-तार करने की भी कई बार कोशिश की गई. कई वीडियो में महिला पुलिसकर्मियों के कपड़े तार-तार होते नजर आए हैं. कुछ ऐसा ही एक वीडियो दिल्ली पुलिस ने अपने ट्विटर हैंडल से स्टीट किया है. इस वीडियो में एक फुटेज ऐसा भी है, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारी महिला पुलिस कर्मी की कॉलर को पकड़ कर खींचती नजर आ रही हैं. इस फुटेज को देखकर साफ लग रहा है कि प्रदर्शनकारियों की कोशिश महिला पुलिस कर्मी को खुद से दूर करने की जगह जबरन उसको अपनी तरफ खींचकर उनकी वर्दी को फाड़ने की कोशिश थी.
दर्द से कराहती नजर आईं दिल्ली पुलिस की महिला पुलिसकर्मी
जरा सोचिए, प्रदर्शनकारी अपने इन मंसूबों में सफल हो जाते तो उस महिला कर्मी को सरेआम बेआबरू होना पड़ जाता है. मामला सिर्फ इतने तक सीमित नहीं है. बल्कि कई महिलाकर्मियों के पेट पर इस बेरहमी से हमला किया, जिसके दर्द से वह कराहती हुईं नजर आई. एक फुटेज में एक महिला पुलिस कर्मी की वर्दी कंधे के पास से फटी हुई भी नजर आ रही है. अब आप सोचिए कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दावे के बीच प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों को अपना निशाना बना रहे थे या फिर पुलिस उनके ऊपर बल का प्रयोग कर रही थी. इस खबर के साथ दिल्ली पुलिस की ओर से पोस्ट की गई वीडियो पूरा सच बनाते के लिए काफी है.
देखें किस तरह जंतर मंतर में पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों ने निशाना बनाया है. (इमेज: दिल्ली पुलिस)
पुलिसकर्मी होने के शक के बाद बेहरमी से पिटाई
वहीं, इस प्रदर्शन के बीच एक शख्स को सिर्फ इसलिए बेहरमी से पीटा गया, क्योंकि प्रदर्शनकारियों को शक था कि वह शख्स सादे कपड़ों में पुलिस कर्मी है. इस शख्स पुलिस से लगातार यह गुहार लगाता हुआ नजर आया कि उसे हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की बस में ही रखा जाए, नहीं तो बाहर मौजूद प्रदर्शनकारी उसको जान से मार देंगे. इसी बीच कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आई, जिसमें प्रदर्शनकारियों के इतने आक्रामक रुख के बावजूद कुछ महिला पुलिस कर्मी घायल हुई महिला प्रदर्शनकारियों की मरहम पट्टी करती नजर आ रही हैं. अब इन तस्वीरों और फुटेज को देखकर आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि 7 अक्टूबर को हुए इस प्रदर्शन के बीच असल में किसका मकसद क्या था?
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international…
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