जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 हिंदुओं के नरसंहार का बदला लेने के लिए भारत की सेनाओं ने सात अप्रैल की रात ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया. इस ऑपरेशन के जरिए भारत ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर आतंकवादियों के ठिकाने पर बम बरसाए थे. इसमें 100 से अधिक दुर्दांत आतंकवादियों के मारे जाने की सूचना है. इस ऑपरेशन से बौखलाए पाकिस्तान ने आतंकवादियों की मौत का बदला लेने के लिए ऑपरेशन बुनयान उल मार्सूस लॉन्च किया था. लेकिन, उसके इस ऑपरेशन की 48 घंटे के भीतर ही हवा निकल गई. भारत के वार से पस्त पाकिस्तान ने शनिवार को संघर्ष विराम की पहल की और दोनों देशों के बीच शाम पांच से संघर्ष विराम लागू कर दिया गया. हालांकि इसके बावजूद पाकिस्तान की सेना से कुछ जगहों पर गोलीबारी की. लेकिन, इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान की गिदड़भभकी और उसकी वास्तविकता की पोल खोल दी. दूसरी तरह भारत ने इस ऑपरेशन के जरिए दुनिया के सामने अपनी एक ही तस्वीर पेश की है.
संयुक्त राष्ट्र से दूरी
भारत ने पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से समर्थन मांगने की कोशिश नहीं की. यह दिखाता है कि भारत को अपनी ताकत और रणनीतिक स्वायत्तता पर पूरा भरोसा है. ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि भारत अब पुरानी कूटनीति पर निर्भर नहीं है और वह अपनी संप्रभुता को मजबूती से लागू कर सकता है.
आतंकियों और उनके पनाहगारों पर एकसाथ हमला
पहली बार भारत ने यह धारणा तोड़ी कि आतंकी और उनके समर्थक अलग हैं. भारत ने आतंकियों के साथ-साथ उनके पीछे खड़े लोगों को भी निशाना बनाया. यह भी साफ किया कि पाकिस्तानी सेना के ताकतवर अधिकारी आतंकी हमलों को बढ़ावा देते हैं. अब पाकिस्तान को इस जवाबदेही से बचने के लिए नया बहाना ढूंढना होगा.
युद्ध और आर्थिक कमजोरी
जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और छोटे-मोटे हमले चल रहे थे, पाकिस्तान ने आईएमएफ से कर्ज के लिए बातचीत की और उसे कर्ज मिल भी गया. यह हैरान करने वाला था. इससे पता चलता है कि पाकिस्तान छोटी लड़ाइयां लड़ सकता है, लेकिन पूर्ण युद्ध के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं. आईएमएफ का कर्ज युद्ध नहीं जीत सकता.
भारत की धैर्य की सीमा
22 अप्रैल 2025 को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने पहलगाम हमले के साथ भारत के धैर्य की परीक्षा ली. शायद वे भारत को उकसाना और अपमानित करना चाहते थे. लेकिन उनका यह दांव उल्टा पड़ा. भारत ने कड़ा जवाब दिया और आतंकियों को कोई फायदा नहीं हुआ. उनकी सोच शायद 2008 के मुंबई हमलों में अटकी हुई था. लेकिन, बीते करीब दो दशक में कई चीजें बदल गई हैं.
भारत की जद में पूरा पाकिस्तान
भारत ने दिखाया कि पाकिस्तान का कोई भी हिस्सा उसकी पहुंच से बाहर नहीं है. पाकिस्तान का नूर खान एयरबेस जो सबसे सुरक्षित माना जाता था और रावलपिंडी जैसे सैन्य शहर को भी निशाना बनाया गया. यह दिखाता है कि भारत की सैन्य ताकत कितनी व्यापक है.
इस्लामी फतवे पर एकाधिकार टूटा
पाकिस्तान हमेशा इस्लामी फतवों का इस्तेमाल मुस्लिम देशों से हमदर्दी बटोरने के लिए करता था. लेकिन इस बार भारत के उलेमाओं ने अपनी सरकार को फतवा दिया. इससे पाकिस्तान का इस्लामी फतवों पर एकाधिकार टूट गया. ध्यान रहे दारुल उलूम देवबंद भारत में है.
भारत का सीक्रेट प्लान
लोकतांत्रिक देश में गोपनीयता बनाए रखना मुश्किल है, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत से बहुत कम जानकारी लीक हुई. यह दिखाता है कि भारत ने ऑपरेशनल गोपनीयता और जनता के एकजुट समर्थन में जबरदस्त कौशल दिखाया.
ऑपरेशन बुनयान उल मार्सूस
पाकिस्तान के ऑपरेशन बुनयान उल मार्सूस के बारे में बहुत कम जानकारी या वीडियो सबूत सामने आए हैं. ऐसा लगता है कि यह उतना प्रभावी नहीं हुआ, जितना पाकिस्तान ने दावा किया. सीजफायर ने शायद पाकिस्तान को और नुकसान से बचा लिया. पाकिस्तानी सेना ने अपनी उपलब्धियों के बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन भारत के आसमान खुले रहे. उड़ानें रुकी नहीं और न ही दिल्ली या अमृतसर में मिसाइलें गिरने की कोई तस्वीर सामने आई.

