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Petrol vs Diesel : क्या आपको पता है कि 1 टन वजन में पेट्रोल और डीजल का वॉल्यूम अलग-अलग होता है. इस वजन में पेट्रोल ज्यादा लीटर आएगा, जबकि लीटर में बदलने पर डीजल कम हो जाएगा. ऐसा कच्चे तेल से रिफाइनरी में पेट्रोल और डीजल बनाते समय अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के कारण होता है.

पेट्रोल और डीजल के वजन में काफी अंतर होता है.
नई दिल्ली. पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल तो आप भी पूरी जिंदगी करते आए हैं. तो चलिए, एक सवाल का जवाब दीजिए. अगर आप एक टन वजन का पेट्रोल लाते हैं और उतने ही वजन का डीजल तो दोनों कितने-कितने लीटर मिलेंगे. ज्यादातर लोगों को यही लगता होगा कि एक टन में जितना लीटर डीजल आएगा, उतना ही पेट्रोल भी होगा. लेकिन, सच्चाई इससे कहीं अलग है. पेट्रोल और डीजल के वजन की वजह से दोनों के बीच लीटर में भी काफी अंतर हो जाता है. अगर आप इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं तो आपको बाकायदा कैलकुलेशन और आंकड़ों के जरिये इसकी जानकारी देते हैं.
सबसे पहले आपको बताते हैं कि असल में 1 टन कितना होता है. 1 टन वजन में करीब 1,000 किलोग्राम होते हैं. लेकिन, यह तो आपको पता ही है कि लीटर और किलोग्राम में अंतर होता है और लीटर हमेशा किलोग्राम से कम होता है. यही वजह है कि 1,000 टन तेल को अगर लीटर में देखा जाए तो इससे ज्यादा ही पेट्रोल और डीजल आएगा. अब पेट्रोल और डीजल भी अपने आप में हल्का और भारी होता है तो इसके लीटर की संख्या में भी आपको ठीकठाक अंतर दिख जाएगा.
1 टन में कितने लीटर पेट्रोल
सबसे पहले पेट्रोल का वजन देखते हैं. 1 लीटर पेट्रोल का वजन करीब 710 ग्राम होता है. इसकी वजह ये है कि पेट्रोल का घनत्व पानी से भी कम होता है. इस लिहाज से 1,000 किलोग्राम पेट्रोल को जब लीटर में बदलते हैं तो यह करीब 1,350 लीटर के आसपास होता है. प्रति लीटर पेट्रोल पर जो 300 ग्राम की कमी दिखती है, वही जब 1 टन में बदली जाती है तो करीब 300 से 350 लीटर तक ज्यादा आंकड़ा आता है.
1 टन में कितना डीजल आएगा
अब बात करते हैं डीजल की, जिसका वजन पेट्रोल से थोड़ा अधिक होता है. डीजल का घनत्व थोड़ा अधिक होने की वजह से 1 लीटर डीजल का वजन 820 से 860 ग्राम तक हो सकता है. यह जो प्रति लीटर औसतन 150 ग्राम की बचत होती है, यही 1 टन में बदलने पर लीटर में भी ज्यादा हो जाती है. इस तरह, एक टन में करीब 1,200 लीटर डीजल आ सकता है. यह पेट्रोल के मुकाबले करीब 150 लीटर कम होता है.
क्यों होता है दोनों में अंतर
पेट्रोल और डीजल में यह अंतर इसलिए होता है, क्योंकि दोनों के घनत्व में अंतर होता है. पेट्रोल हल्के हाइड्रोकार्बन यानी छोटी चेन वाले हाइड्रोकार्बन से बना होता है, जिससे इसका घनत्व कम होता है और एक ही वजन में ज्यादा वॉल्यूम यानी लीटर तेल आ जाता है. डीजल थोड़ा भारी यानी लंबी चेन वाले हाइड्रोकार्बन से बना होता है, लिहाजा इसका घनत्व पेट्रोल से ज्यादा होता है और इसका वॉल्यूम थोड़ा कम हो जाता है. यह अंतर रिफाइनरी में कच्चे तेल से पेट्रोल और डीजल बनाने की प्रक्रिया के कारण होता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

