PM Modi-Trump Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आज की द्विपक्षीय मुलाकात बहुत ही अहम है. पीएम मोदी और ट्रंप 16 महीने बाद द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे. इस दौरान दोनों के बीच ट्रेड से लेकर ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया संघर्ष पौर तमाम दूसरे द्विपक्षीय मसलों पर बातचीत होगी. अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत का मामला मंगलवार को पीएम मोदी ने उठाया था. आज की बैठक में भी यह मुद्दा छाया रह सकता है. कारण कि भारत ने पहले ही इस मसले पर अमेरिका के समक्ष अपना विरोध दर्ज करा दिया है.
पिछले 16 महीने में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका के संबंधों में कई मुद्दों पर तनाव और मतभेद बढ़े हैं. ऐसे कई मामले हैं, जहां भारत और अमेरिका के रिश्तों में बर्फ जमती दिखी है. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में मतभेद की कई वजहें हैं. जिसे आज की मुलाकात में पीएम मोदी और ट्रंप मिलकर सुलझाने की कोशिश कर सकते हैं.
1. अमेरिकी हमले में भारतीयों की मौत
हॉर्मुज में भारतीय नाविकों वाले कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी हमले में तीन नाविकों की मौत का मसला सबसे ताजा है. यह भारत को नागवार गुजरा है. भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो के सामने इस हमले का खुलकर विरोध भी दर्ज किया. भारत में कार्यवाहक अमेरिकी राजदूत को भारतीय विदेश मंत्रालय ने दो बार सम्मन कर सख्त विरोध दर्ज कराया. लेकिन ताज्जुब की बात ये रही कि अमेरिका की तरफ से तीन नाविकों के प्रति संवेदना भी व्यक्त नहीं की गई.
2. व्यापार और टैरिफ विवाद
ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका फर्स्ट नीति के तहत कई देशों पर आयात शुल्क बढ़ाने की नीति अपनाई. भारत को दुनिया के सबसे अधिक टैरिफ वाले देशों की सूची में डाला गया. भारत के साथ व्यापार घाटे का मुद्दा उठाते हुए अमेरिकी पक्ष ने भारतीय बाजार में अधिक पहुंच की मांग की. कृषि, डेयरी, ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे. बाद में ट्रंप और मोदी के बीच ट्रेड समझौते की घोषणा के बाद और ट्रंप की टैरिफ को अमेरिकी अदालत से झटका मिलने के बाद इस मसले दोनों देशों के बीच थोड़ी नरमी आई.
3. रूस से भारत के संबंध
भारत ने रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा सहयोग जारी रखा. तेल भी खरीदना जारी रखा. यूक्रेन युद्ध के बाद भी भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया. अमेरिका के कुछ नेताओं ने इस पर असंतोष जताया. हालांकि वॉशिंगटन ने भारत की रणनीतिक जरूरतों को भी समझने की कोशिश की.
4. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान मध्यस्थता का दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने कई अवसरों पर और बार बार ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता का दावा किया. जो भारत और पीएम माफी को नागवार गुजरा. पीएम मोदी और भारतीय विदेश मंत्रालय ने बार बार दोहराया कि ऑपरेशन सिंदूर को रोकने का फैसला पाकिस्तानी अनुरोध और दोनों देशों के DGMO के बीच बातचीत से हुआ यानी द्विपक्षीय तौर पर हुआ.
5. पाकिस्तान और दक्षिण एशिया नीति!
भारत में यह धारणा बनी कि ट्रंप प्रशासन के कुछ कदम पाकिस्तान को फिर से रणनीतिक महत्व दे रहे हैं. जिससे आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भारत की चिंताएं जगजाहिर है.
6. आव्रजन और वीजा मुद्दे!
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में H-1B वीजा और भारतीय पेशेवरों से जुड़े नियमों को लेकर भी चिंता रही. भारतीय आईटी कंपनियां और अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवर इन नीतिगत बदलावों से प्रभावित हुए है. यही नहीं, अवैध इमिग्रेशन के खिलाफ भारतीयों को अमेरिका से भेजने का तरीका भी भारत को पसंद नहीं आया.
7. भारत पर ट्रंप की सार्वजनिक टिप्पणियां
डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार भारत के व्यापारिक शुल्कों और बाजार संरक्षणवादी नीतियों की आलोचना की.
कुछ बयानों को नई दिल्ली में अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा गया.
8. हालिया भू-राजनीतिक मतभेद
पश्चिम एशिया, ईरान और कुछ वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर दोनों देशों की प्राथमिकताएं हमेशा एक जैसी नहीं रहीं. भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की नीति पर कायम रहा, जबकि ट्रंप प्रशासन कई मामलों में अधिक स्पष्ट समर्थन की अपेक्षा करता रहा.
ये कुछ ऐसे मसले हैं, जिसने भारत और अमेरिका के संबंधों को पिछले दो दशकों में सबसे कमजोर किया है. खासकर ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में क्योंकि ट्रंप के पहले कार्यकाल में भारत और अमेरिका के संबंधों में एक नई मजबूती दिखी थी. खासकर पीएम मोदी और ट्रंप की व्यक्तिगत केमेस्ट्री की वजह से. ऐसे में आज दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बैठक से ये साफ हो जाएगा कि आखिर मोदी और ट्रम्प और भारत और अमेरिका अपने सम्बन्धों को किस दिशा में और किस रफ्तार से ले जाना चाहते हैं.

