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अमित शाह ने आजादी के बाद के आंदोलनों का अध्ययन करने का निर्देश दिया है.यह निर्देश इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा जुलाई के आखिरी सप्ताह में नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में दिए गए. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सम्मेलन में देश भर से लगभग 800 अधिकारी शामिल हुए. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि बीपीआरएंडडी को विशेष रूप से प्रदर्शनों के कारणों, पैटर्न्स, परिणामों और उसे पीछे के लोगों का विश्लेषण करने को कहा गया है. अध्ययन के आधार पर एक SOP तैयार किया जाए, जो भविष्य में वेस्टेड इंटरेस्ट्स द्वारा भड़काई जाने वाले बड़े आंदोलनों को रोकने में मदद करे.
इसके अलावा टेरर फंडिंग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ईडी, एफआईयू-आईएनडी और सीबीडीटी को अज्ञात टेरर नेटवर्क की पहचान, उनके लिंकेज और डिजाइन्स का विश्लेषण करने के लिए एक अलग SOP तैयार करने को कहा गया है. वित्तीय अनियमितताओं के माध्यम से इन नेटवर्क्स को ट्रेस किया जाएगा. शाह ने बीपीआरएंडडी को राज्य पुलिस के साथ समन्वय कर विभिन्न धार्मिक समागमों का अध्ययन करने का भी निर्देश दिया.
इसका फोकस हादसों जैसे भगदड़ की वजहों को समझना और ऐसे आयोजनों की निगरानी व नियमन के लिए SOP तैयार करना है. यह कदम हाजी अली दरगाह या कुंभ मेला जैसे बड़े आयोजनों में होने वाली घटनाओं को रोकने में सहायक होगा. सूत्रों के अनुसार अमित शाह ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए), बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को पंजाब में खालिस्तानी उग्रवाद और सामान्य आपराधिक गतिविधियों से निपटने के लिए अलग-अलग मेथडोलॉजी विकसित करने को कहा है. अधिकारी ने कहा कि खुफिया एजेंसियों को पंजाब-संबंधी मुद्दों का अच्छा ज्ञान रखने वाले अधिकारियों की टीम गठित करनी चाहिए. एनआईए को आतंक-आपराधिक नेक्सस के घरेलू नोड्स को बाधित करने के लिए आउट-ऑफ-द-बॉक्स अप्रोच अपनानी चाहिए, जिसमें जेलों में कैद अपराधियों को एक जेल से दूसरी जेल स्थानांतरित करना शामिल है.

