असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व सरमा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बड़ा राजनीतिक बयान दिया है. उन्होंने दावा किया है कि राज्य की 126 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस सिर्फ लगभग 22 सीटों पर ही मजबूत स्थिति में है. सरमा के इस बयान के बाद असम की राजनीति में हलचल बढ़ गई है क्योंकि यह आंकड़ा चुनावी मौसम से पहले एक तरह का एग्जिट पोल जैसा माहौल बना रहा है.
हिमंता ने यह दावा क्यों किया?
1. असम में ‘मुस्लिम बहुल सीटें’ कांग्रेस का पारंपरिक आधार
असम की लगभग 35–38 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 40% से ज्यादा है. इनमें से आधी सीटें कांग्रेस के पास ऐतिहासिक रूप से जाती रही हैं. सरमा इन्हीं सीटों को 22 संभावित सुरक्षित सीटें बताकर कांग्रेस को एक सीमित दायरे की पार्टी दिखाना चाहते हैं.
2. टिकट की नीलामी वाली बात: अंदरुनी कलह को हाईलाइट करना
असम कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर कई बार विवाद सामने आए हैं. सरमा का दावा है कि इन 22 सीटों पर उम्मीदवार आपस में टिकट के लिए दौड़ रहे हैं, कुछ पैसे और प्रभाव की राजनीति से टिकट हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. यानी सीएम कांग्रेस की डिसिप्लिन और यूनिटी पर सवाल उठा रहे हैं.
3. भाजपा की मजबूत पोजिशन को और ठोस दिखाना
सरमा यह संदेश देना चाहते हैं कि भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियां 2026 के चुनाव में फिर “क्लीन स्वीप” के मूड में हैं. कांग्रेस को सीमित कर दिखाकर भाजपा अपनी जीत को “तय” जैसा माहौल बनाना चाहती है.
क्या यह ‘एग्जिट पोल’ जैसा बयान?
राजनीति विशेषज्ञों की मानें तो हिमंता का यह दावा एक तरह का प्री-पॉल मैसेजिंग है. हालांकि इसे एग्जिट पोल नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह जनता के बीच यह संदेश जरूर देता है कि भाजपा पहले से बढ़त में है और कांग्रेस सिर्फ कुछ खास इलाकों में ही सिमटी है. इस तरह के बयान अक्सर चुनाव से पहले विपक्ष के मनोबल को गिराने, अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत दिखाने, मीडिया नैरेटिव सेट करने के लिए दिए जाते हैं.
असम कांग्रेस का जवाब- ‘हिमंता डर गए हैं’
सीएम सरमा जानबूझकर कांग्रेस को कमतर दिखा रहे हैं. असम की जनता भाजपा से नाराज़ है—इसलिए सीएम अब धार्मिक ध्रुवीकरण करके चुनावी माहौल बनाना चाहते हैं.
-देबब्रत सैकिया (कांग्रेस नेता)22 सीटों का आंकड़ा दिखाना हिमंता का राजनीतिक खेल है. जमीन पर कांग्रेस की स्थिति इससे काफी मजबूत है.
-भूपेन बोरा (असम कांग्रेस पूर्व प्रमुख)हिमंता मुस्लिम वोटों को बांटकर फायदा उठाना चाहते हैं. कांग्रेस या एआईयूडीएफ किसी सीट पर मजबूत है, इसका फैसला जनता करेगी.
-बदरुद्दीन अजमल, एआईयूडीएफ नेता
असम में राजनीतिक समीकरण क्या कहते हैं?
असम में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले इन बातों पर सहमति है कि भाजपा अभी भी मजबूत संगठन और संसाधनों के साथ मैदान में है. कांग्रेस भीतर से कमजोर दिखती है, लेकिन उसका वोटबैंक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. मुस्लिम बहुल सीटें अभी भी चुनाव का अहम फैक्टर रहेंगी. एआईयूडीएफ और कांग्रेस के बीच वोट बंटवारा भाजपा को फायदा दिला सकता है. इसी राजनीतिक गणित के आधार पर हिमंता का 22 सीट वाला बयान एक बड़ी राजनीतिक चाल भी माना जा रहा है.

