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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्वर्ग द्वार घाट वह पवित्र स्थान था जहां स्नान, दान, तप और ध्यान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. संतों और विद्वानों का मानना है कि यह घाट मोक्षदायिनी सरयू के प्रमुख तटों में शामिल था. कई धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं में भी स्वर्ग द्वार घाट का उल्लेख मिलता है. मान्यता यह भी है कि यहां साधु-संत वर्षों तक तपस्या करते रहे, इसलिए इस स्थान की आध्यात्मिक महिमा अत्यंत विशेष मानी जाती है.
अयोध्या: भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में स्थित नया घाट आज सरयू तट का एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल माना जाता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जिस घाट को आज नया घाट कहा जाता है, उसे प्राचीन समय में स्वर्ग द्वार घाट के नाम से जाना जाता था. यह घाट न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि इसका संबंध अयोध्या की प्राचीन संस्कृति और त्रेतायुगीन मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ माना जाता है. ऐसी स्थिति में चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं आखिर नया घाट का स्वर्ग द्वार घाट से क्या कनेक्शन है और क्या मान्यता है.
सरयू के प्रवाह व कटाव को रोकने के लिए बने थे घाट
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्वर्ग द्वार घाट वह पवित्र स्थान था जहां स्नान, दान, तप और ध्यान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. संतों और विद्वानों का मानना है कि यह घाट मोक्षदायिनी सरयू के प्रमुख तटों में शामिल था. कई धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं में भी स्वर्ग द्वार घाट का उल्लेख मिलता है. मान्यता यह भी है कि यहां साधु-संत वर्षों तक तपस्या करते रहे, इसलिए इस स्थान की आध्यात्मिक महिमा अत्यंत विशेष मानी जाती है.
पवन दास शास्त्री ने बताया कि वर्ष 1962 से 1965 के बीच सरयू नदी पर पुल निर्माण और तट संरक्षण का कार्य शुरू हुआ था. उस दौरान नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित करने और कटान रोकने के उद्देश्य से दोनों ओर नए घाटों का निर्माण कराया गया. चूंकि यह घाट नए स्वरूप में बनाए गए थे इसलिए लोगों ने इसे नया घाट कहना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे यही नाम प्रसिद्ध हो गया और प्राचीन स्वर्ग द्वार घाट का नाम पीछे छूटता चला गया.
आस्था का जीवंत प्रतीक
समय बीतने के साथ स्वर्ग द्वार घाट का पुराना स्वरूप लगभग लुप्त हो गया, लेकिन इसकी धार्मिक पहचान आज भी संत समाज और स्थानीय लोगों की स्मृतियों में जीवित है. यही वजह है कि अयोध्या के संत और धर्माचार्य लगातार यह मांग उठा रहे हैं कि नया घाट पर स्वर्ग द्वार घाट की प्राचीन पहचान और इतिहास को फिर से प्रदर्शित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी सनातन विरासत और धार्मिक परंपराओं को समझ सकें.
आज नया घाट सरयू आरती, दीपदान और धार्मिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बन चुका है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान करने पहुंचते हैं. शाम के समय सरयू तट का दृश्य अत्यंत मनमोहक दिखाई देता है.जहां श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. नया घाट केवल एक घाट नहीं बल्कि अयोध्या की प्राचीन आस्था, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रतीक माना जाता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

