लाल किले की प्राचीर के पास ब्लास्ट वाली साजिश के तार जब जांच एजेंसी सुलझाने बैठी तो सरहद पार से लेकर सात समंदर दूर तक फैले खौफनाक मंसूबों की परतें उखड़ने लगीं. लेकिन दिल्ली ब्लास्ट मामले की जांच कर रही एनआईए (NIA) के सामने एक ऐसी दीवार खड़ी हो गई है जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत और उसके बाद कश्मीर की वादियों में भड़के तनाव ने एनआईए के उन कदमों को रोक दिया है जो आतंकवाद की जड़ तक पहुंचाने वाले थे.
दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर हुए ब्लास्ट मामले की जांच में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत में दाखिल अपने रिमांड नोट में खुलासा किया है कि अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाओं का असर दिल्ली के इस महत्वपूर्ण आतंकी मामले की जांच पर पड़ रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर में उपजी कानून-व्यवस्था की स्थिति ने जांच की गति को रोक दिया है.
NIA जांच और कश्मीर का घटनाक्रम
1. खामेनेई की मौत और कश्मीर में गतिरोध
ईरान के नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मृत्यु के बाद कश्मीर के कुछ हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और तनाव देखा गया. NIA ने कोर्ट को सूचित किया है कि इस कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के कारण उनकी टीम जम्मू-कश्मीर के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन और छापेमारी पूरी नहीं कर सकी. यह पहली बार है जब किसी अंतरराष्ट्रीय नेता की मौत के कारण दिल्ली के आतंकी मामले की जांच में इस तरह का तकनीकी और व्यावहारिक गतिरोध पैदा हुआ है.
2. जमीर अहमद अहंगर: विदेशी हैंडलर्स का मोहरा
जांच में सबसे बड़ा खुलासा नए गिरफ्तार आरोपी जमीर अहमद अहंगर को लेकर हुआ है. NIA के मुताबिक, अहंगर महज एक स्थानीय मददगार नहीं है बल्कि वह सोशल मीडिया के जरिए सीधे विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में था. वह एन्क्रिप्टेड ऐप्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर सीमा पार बैठे अपने आकाओं से निर्देश ले रहा था. एजेंसी का मानना है कि अहंगर के जरिए लाल किला ब्लास्ट की साजिश के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सकता है.
3. विदेशी फंडिंग और डिजिटल फुटप्रिंट्स
रिमांड नोट से यह स्पष्ट होता है कि इस साजिश के तार भारत के बाहर से जुड़े हैं. अहंगर के डिजिटल उपकरणों से कई ऐसे सबूत मिले हैं जो आतंकी फंडिंग और विदेशी कड़ियों की ओर इशारा करते हैं. NIA ने अदालत से अतिरिक्त रिमांड की मांग की है ताकि आरोपी को कश्मीर ले जाकर उन ठिकानों की पहचान की जा सके जहाँ उसने हथियारों या विस्फोटकों की खेप प्राप्त की थी.
4. कानून-व्यवस्था और जांच की चुनौती
एजेंसी के लिए बड़ी चुनौती यह है कि कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति बहाल होने तक उसे इंतजार करना पड़ रहा है. NIA ने कोर्ट में बिग सबमिशन देते हुए कहा है कि आरोपियों को घाटी के संवेदनशील इलाकों में ले जाकर साक्ष्य जुटाना फिलहाल सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा है. इसके कारण जांच के कई महत्वपूर्ण ‘लिंक्स’ अधूरे पड़े हैं.
मामले के मुख्य प्वाइंट
· जांच में बाधा: कश्मीर में खामेनेई की मौत के बाद भड़के प्रदर्शनों ने NIA के सर्च ऑपरेशन को पूरी तरह ठप कर दिया है.
· विदेशी हैंडलर कनेक्शन: आरोपी ज़मीर अहमद अहंगर सोशल मीडिया के माध्यम से सीमा पार के आतंकियों से लगातार निर्देश प्राप्त कर रहा था.
· रिमांड की मांग: NIA ने आरोपियों से और अधिक पूछताछ और कश्मीर में स्पॉट-वेरिफिकेशन के लिए कोर्ट से अतिरिक्त रिमांड अवधि मांगी है.
· लाल किला ब्लास्ट साजिश: जांच का दायरा अब दिल्ली से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल गया है, जिसमें विदेशी साजिशकर्ताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है.
· सुरक्षा प्रोटोकॉल: घाटी में शांति बहाल होते ही NIA आरोपियों को कश्मीर के उन ठिकानों पर ले जाएगी जहाँ साजिश को अंतिम रूप दिया गया था.
सवाल-जवाब
अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत का दिल्ली लाल किला ब्लास्ट जांच से क्या संबंध है?
सीधा संबंध नहीं है, लेकिन उनकी मौत के बाद कश्मीर में उपजे तनाव और प्रदर्शनों के कारण NIA की टीमें वहां सुरक्षित तरीके से सर्च ऑपरेशन और आरोपियों की निशानदेही पूरी नहीं कर पा रही हैं.
ज़मीर अहमद अहंगर की भूमिका इस मामले में कितनी महत्वपूर्ण है?
अहंगर इस मामले की सबसे अहम कड़ी है क्योंकि वही विदेशी हैंडलर्स और स्थानीय साजिशकर्ताओं के बीच एक पुल (Bridge) की तरह काम कर रहा था. उसके खुलासे पूरी साजिश का पर्दाफाश कर सकते हैं.
क्या NIA को अतिरिक्त रिमांड मिल गई है?
NIA ने रिमांड नोट के जरिए कोर्ट को कश्मीर की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति से अवगत कराया है और जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है.
सोशल मीडिया का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा था?
आरोपी सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कोड वर्ड्स में बातचीत करने और धमाकों की प्लानिंग से जुड़े निर्देश प्राप्त करने के लिए कर रहा था.
जामा मस्जिद ब्लॉस्ट केस में कश्मीर में सर्च ऑपरेशन क्यों जरूरी है?
साजिश की जड़ें कश्मीर से जुड़ी होने के कारण, NIA को उन ठिकानों से साक्ष्य जुटाने हैं जहाँ हथियार छुपाए गए थे या जहाँ साजिश की गुप्त बैठकें हुई थीं.

