Last Updated:
Mahashivratri 2025: कहा जाता है कि अमरनाथ गुफा में कबूतर का एक जोड़े ने भगवान शंकर के मुंह से ऐसी बात सुन ली कि अमर हो गया. इस ठंडी और दुर्गम जगह पर वो आज भी रहता है और नजर आता है.

हाइलाइट्स
- अमरनाथ गुफा में कबूतर का जोड़ा अमर माना जाता है
- कबूतरों ने शिव से अमरकथा सुनकर अमरत्व प्राप्त किया
- अमरनाथ गुफा में कबूतरों का दिखना शुभ माना जाता है
महाशिवरात्रि का दिन है. पूरा देश उत्तर से लेकर दक्षिण तक शिवमय है. भगवान शिव को लेकर तमाम किस्से – कहानियां हैं. शिव से जुड़ी एक कहानी आज भी लोगों को चकित करती है. उत्सुकता जगाती है. भगवान शिव से संबंधित सबसे पवित्र निवास में हजारों सालों से कबूतर का एक ऐसा जोड़ा रहता है, जो अमर माने जाते हैं. उनकी आयु कितनी है कोई नहीं बता सकता. इस दुर्गम जगह में जाने वाले श्रृद्धालुओं को कबूतर का जोड़ा अक्सर नजर आ जाता है. इसके पीछे एक कहानी है.
करीब दो साल पहले लोकप्रिय टीवी प्रोग्राम कौन बनेगा करोड़पति में अमिताभ बच्चन ने इससे संबंधित एक सवाल भी पूछा था. ये सवाल 50 लाख रुपए के लिए पूछा गया था. सवाल था वो कौन सा मंदिर है जहां भगवान शिव से सृष्टि का रहस्य को सुनने के बाद वहां रहने वाले कबूतर का जोड़ा अमर हो गया.
जवाब के विकल्प के तौर पर कई प्रसिद्ध मंदिरों के नाम लिए गए. इसमें सोमनाथ, अमरनाथ मंदिर और उज्जैन मंदिर शामिल थे. हॉटसीट पर बैठी प्रतियोगी ने कुछ देर सोचने के बाद अमरनाथ मंदिर को सही जवाब बताया. ये जवाब वाकई सही था. इसकी कहानी बहुत रोचक है.
तीन देवता ही अमर हैं, उसके बाद ये कबूतर
हिंदू मान्यताओं में माना जाता है कि दुनिया में केवल तीन देवता ब्रह्मा, विष्णु और शिव ऐसे हैं, जो अमर हैं. उन्हें अमरता इसलिए हासिल है, क्योंकि वो सृष्टि के रहस्य को जानते हैं, जिसे अमरकथा कहा जाता है. ये कथा ऐसा तत्वज्ञान है, जिसे मालूम हो जाए तो वह अमर हो जाता है. चूंकि शिव ने पहली और आखिरी बार ये कथा एक निर्जन गुफा में पार्वती को सुनाई थी, लिहाजा इस गुफा का नाम ही अमर गुफा हो गया.
अमरनाथ गुफा में रहने वाले वो कबूतर
जब भी कोई अमरनाथ गुफा में जाता है तो वहां उन्हें कबूतर का एक जोड़ा ठंडे स्थान पर बैठा नजर आता है, ये यहां चिरकाल से रह रहा है, कुछ लोग इन्हें शिव-पार्वती भी कहते हैं. उन्हें देखना बहुत शुभ माना जाता है. वैसे आपको बता दें कि इस ठंडी गुफा में कबूतरों का रहना भी किसी हैरत से कम नहीं, क्योंकि इस दुर्गम और ठंडी जगह पर कबूतर नहीं मिलते. उनका मिलना असामान्य बात है.
पार्वतीजी ने जिद पकड़ ली कि उन्हें वो अमरकथा सुननी ही है जो केवल अमरत्व प्राप्त कर चुके ब्रह्मा, विष्णु और महेश को मालूम है. शिव को बात माननी पड़ी. तब वो पार्वती को लेकर सुनसान पड़ी एक गुफा में इसे सुनाने के लिए पहुंचे.
तब शिव ने पार्वती को अमरकथा सुनाई
हुआ ये कि भगवान शिव अमर थे. उन्हें बार -बार जीवन लेने की जरूरत नहीं पड़ती थी. पार्वती को बार बार जीवन लेना पड़ता था. हर बार शिव का वरण करना होता था. तब पार्वती ने उनसे जब पूछा कि ऐसा होने के पीछे वजह क्या है. तब शंकर ने बताया कि इसकी वजह वो अमर कथा है, जो वो जानते हैं, जो इसे सुन लेगा, वो खुद फिर अमर हो जाएगा.
शिव को ये कथा पार्वती को सुनानी पड़ी
तब पार्वती ने जिद पकड़ ली कि वो तो इस कथा को जरूर सुनेंगी. शिव ने बहुत मना करने की कोशिश की लेकिन हार माननी पड़ी. अब उन्हें पार्वती को ये अमरकथा तो सुनानी थी लेकिन ये ध्यान भी रखना था कि कोई और इसे बिल्कुल नहीं सुन पाए. इसलिए उन्होंने साथ रहने वाले अनुचरों को छोड़कर पार्वती के साथ इस सुनसान गुफा का रुख किया.
अमरनाथ गुफा में जाने वाले श्रृद्धालुओं को एक कबूतर का जोड़ा वहां कभी कभी नजर आता है. अगर ये दीख जाए तो इसे बहुत शुभ मानते हैं.
अपने नाग भी गुफा के बाहर छोड़ दिए
मान्यता है कि शंकर जब पार्वती को अमर कथा सुनाने ले जा रहे थे, तो उन्होंने गले में धारण किए जाने वाले छोटे नागों को भी बाहर छोड़ दिया. जहां उन्हें छोड़ा उसका नाम अनंतनाग पड़ा. माथे के चंदन को चंदनबाड़ी में उतारा. पिस्सुओं को पिस्सू टॉप पर. आखिर में बारी आई शेषनाग की. जिसे शेषनाग नामक जगह पर छोड़ा गया. ये सारी जगहें अमरनाथ यात्रा पर जाने पर रास्ते में आती हैं.
गुफा में पहले कबूतर का एक जोड़ा था
शिव जब इस गुफा में पहुंचे तो उनका ध्यान वहां पहले से बैठे कबूतरों के जोड़े पर नहीं गया. शिव समाधिस्थ हुए. उन्होंने पार्वती को कथा सुनानी शुरू की. कथा लंबी थी लिहाजा पार्वती को बीच में ही नींद आ गई लेकिन कबूतर ध्यान से सुनते रहे. कथा सुनाने के बाद जब शिव ने समाधि भंग की तो देखा पार्वती तो सो रही हैं लेकिन कबूतरों का एक जोड़ा टुकुर – टुकुर उनकी ओर ध्यान लगाए बैठा है.
अमरनाथ गुफा कोई छोटी गुफा नहीं है बल्कि 19 मीटर लंबी और 16 मीटर चौड़ी है. इसकी ऊंचाई 11 मीटर है. (विकी कामंस)
शिव के गुस्से से ये कबूतर कैसे बचे
शिव नाराज हो गए कि ये क्या हो गया. उन्होंने उन कबूतरों को मारने का प्रयास ही किया था कि दोनों कबूतर उनकी शरण में चले गए. कबूतरों ने उनसे प्रार्थना की कि अगर उन्होंने उन्हें मार दिया तो कथा का औचित्य क्या रह जाएगा. वो तो गलत साबित हो जाएगी.
शिव ने उन्हें छोड़ दिया. दोनों को आशीर्वाद भी दिया कि अब वह इस गुफा में हमेशा शिव – पार्वती की तरह निवास करेंगे. इसी वजह से वो कबूतरों का जोड़ा वहां अब भी रहता है. हिंदू पौराणिक कथाओं में कबूतरों को देवताओं का दूत माना जाता है. उन्हें अक्सर भगवान विष्णु और भगवान शिव से जोड़ा जाता है.
हर साल गुफा में तैयार होती है बर्फ की विशाल शिवलिंग
वैसे ये पवित्र गुफा हर जाड़े में ऐसा शिवलिंग बर्फ से तैयार करती है, जिसका कोई जोड़ नहीं. इसे देखने के लिए हजारों लोग दूर दूर से यहां आते हैं. ये शिवलिंग बिल्कुल प्रकृति द्वारा तैयार होता है और धीरे धीरे बर्फ जब पिघलती है तो इस हिमानी शिव लिंग का भी लोप हो जाता है. इस गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है. गुफा 11 मीटर ऊंची है.
क्यों मुस्लिम गड़रिये को भी मिलता है गुफा का चढ़ावा
अमरनाथ गुफा का सबसे पहले पता सोलहवीं शदी की शुरुआत में एक मुसलमान गडरिए को चला था. आज भी चौथाई चढ़ावा उस मुसलमान गडरिए के वंशजों को मिलता है. हैरानी की बात यह है कि अमरनाथ गुफा एक नहीं है बल्कि अमरावती नदी के पथ पर आगे बढ़ते समय और भी कई छोटी-बड़ी गुफाएं दिखती हैं, जो सभी बर्फ से ढकी हैं.
Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh
February 26, 2025, 13:01 IST

