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मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले में एक मेडिकल छात्रा की अपील खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा कि टेरर फंडिंग से चुकाई एमबीबीएस फीस जब तक कानूनी रूप से नहीं मिलती है. कॉलेज डिग्री देने को बाध्य नहीं है.
छात्रा ने अदालत से मांग की थी कि उसके डिग्री और अन्य प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया जाए. एआई फोटो
नई दिल्ली. अगर किसी छात्र ने कॉलेज की फीस टेरर फंडिंग से चुकाई है और इसका खुलसा हो जाए तो क्या उसे डिग्री दी जाएगी. मद्रास हाई कोर्ट ने इसी तरह के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने एमबीबीएस की एक छात्रा की अपील खारिज करते हुए कहा कि जब तक कॉलेज को उसकी फीस कानूनी रूप से मिल नहीं जाती, तब तक संस्थान को डिग्री जारी करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
मामला एमबीबीएस छात्रा पूजा कुमारी से जुड़ा है. छात्रा ने अदालत से मांग की थी कि उसके शिक्षण संस्थान को डिग्री और अन्य प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया जाए. इससे पहले हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके खिलाफ उसने डिवीजन बेंच में अपील की थी.
मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एस. ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरूल मुरुगन की बेंच ने कहा कि छात्रा द्वारा जमा की गई एमबीबीएस फीस को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने जब्त कर लिया है. एनआईए का आरोप है कि यह रकम प्रतिबंधित संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) की गतिविधियों के दौरान जबरन उगाही से जुटाई गई थी.
अदालत ने कहा कि यदि छात्रा खुद को निर्दोष मानती है और यह दावा करती है कि पैसा वैध था, तो उसे एनआईए की विशेष अदालत जाना चाहिए. वहीं से वह जब्त की किए गए रुपए को रिलीज कराने की मांग कर सकती है.
बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी निजी शिक्षण संस्थान से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह अपनी फीस वापस पाने के लिए एनआईए के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़े. अदालत के अनुसार जैसे ही फीस की रकम जब्त हुई, कानूनी रूप से छात्रा की फीस बकाया मानी जाएगी.
हाई कोर्ट ने कहा कि एनआईए मामले में भले ही छात्रा आरोपी नहीं हो, लेकिन वह उस रकम पर दावा नहीं कर सकती, जिसे जांच एजेंसी अपराध से मिला रुपए बता रही है. ऐसे में कॉलेज को फीस दिए बिना डिग्री जारी करने के लिए मजबूर करना उचित नहीं होगा.
मामले में एनआईए ने जांच के दौरान पाया था कि छात्रा के खाते में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए 1.13 करोड़ रुपये से अधिक जमा किए गए थे. जांच एजेंसी के अनुसार यह धन माओवादी संगठन द्वारा गैरकानूनी तरीके से जुटाया गया था. इसके बाद एनआईए ने कॉलेज को नोटिस देकर रुपए जब्त कर लिए थे, जिसके चलते कॉलेज ने छात्रा की डिग्री रोक दी थी
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें
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