लखनऊ. यूपी चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा धमाका होने वाला है. यूपी के पूर्व सीएम और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव 12 दिसंबर 2026 को श्रीरामलला का दर्शन करेंगे. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 12 दिसंबर को परिवार के साथ रामलला के दर्शन करने अयोध्या जाएंगे. हनुमानगढ़ी में भी माथा टेकेंगे. सपा नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने छोटी दीपावली के अवसर पर इस तारीख का ऐलान किया है. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले अखिलेश का यह दौरा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सपा की राजनीतिक छवि और अयोध्या के साथ उसके रिश्ते के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है.
यूपी चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आखिरकार रामलला के दर्शन का कार्यक्रम तय कर लिया है. वह 12 दिसंबर, शनिवार को अयोध्या पहुंचेंगे. इस दौरान उनके साथ परिवार के सदस्य भी मौजूद रहेंगे. अखिलेश हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के दर्शन करेंगे और राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के सामने शीश झुकाएंगे. इस कार्यक्रम का ऐलान सपा नेता तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय ने किया है. पिछले दिनों अयोध्या दौरे पर पहुंचे अखिलेश यादव ने पवन पांडेय को ही रामलला के दर्शन के लिए तारीख तय करने की जिम्मेदारी दी थी. अब छोटी दीपावली के मौके पर पवन पांडेय ने 12 दिसंबर की तारीख घोषित कर दी है.
अयोध्या गोलीकांड से लेकर रामलला दर्शन तक की कहानी
अयोध्या और समाजवादी पार्टी का रिश्ता समझने के लिए 30 अक्टूबर 1990 की घटना को याद करना होगा. उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे. राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर बड़ी संख्या में कारसेवक अयोध्या पहुंचे थे. राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित स्थल की ओर बढ़ रहे कारसेवकों को रोकने के लिए पुलिस ने गोली चलाई. इसके बाद 2 नवंबर 1990 को भी गोलीबारी हुई. इन घटनाओं में लोगों की जान गई. मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे और आंकड़े सामने आए. मुलायम सिंह यादव ने बाद में 28 लोगों की मौत की बात कही थी, जबकि आधिकारिक आंकड़ों और दूसरे संगठनों के दावों में अंतर रहा.
मुलायम सिंह के राज में चली थी गोली
मुलायम सिंह यादव ने उस समय कानून-व्यवस्था और देश की एकता-अखंडता का हवाला देते हुए पुलिस कार्रवाई का बचाव किया था. उनके इस फैसले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को दो अलग-अलग ध्रुवों में बांटने में बड़ी भूमिका निभाई. भाजपा ने इस गोलीकांड को रामभक्तों पर गोली चलाने के मुद्दे के रूप में उठाया, जबकि मुलायम सिंह यादव ने इसे विवादित स्थल की सुरक्षा और सांप्रदायिक तनाव रोकने के फैसले के तौर पर पेश किया.
गोलीकांड के बाद कैसे बना मुलायम का M-Y समीकरण?
1990 के अयोध्या गोलीकांड ने मुलायम सिंह यादव की राजनीति को एक नई पहचान दी. शुरुआत में पुलिस कार्रवाई को लेकर हिंदू समुदाय के एक हिस्से में नाराजगी देखने को मिली. 1991 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसका राजनीतिक फायदा भी मिला और वह प्रदेश की सत्ता में आई. लेकिन दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदल गईं. मुस्लिम समुदाय के बड़े हिस्से में मुलायम सिंह यादव की छवि एक ऐसे नेता की बनी जिसने बाबरी मस्जिद को बचाने के लिए कठोर फैसला लिया था.
1993 के विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने कांशीराम की बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन किया. सपा-बसपा गठबंधन ने भाजपा को सत्ता से बाहर रखा और मुलायम सिंह यादव दोबारा मुख्यमंत्री बने. यहीं से मुस्लिम-यादव यानी M-Y समीकरण समाजवादी पार्टी की राजनीति का प्रमुख आधार बन गया. पार्टी ने लंबे समय तक इसी सामाजिक समीकरण के सहारे उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत रखी.
2024 में अखिलेश क्यों नहीं पुहंचे अयोध्या?
यह सवाल 2024 में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय से ही उठता रहा है. अखिलेश यादव को राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिला था, लेकिन उन्होंने समारोह में शामिल होने के बजाय बाद में परिवार के साथ दर्शन करने की बात कही थी. 15 जनवरी 2024 को उन्होंने कहा था कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद वह परिवार के साथ राम मंदिर में दर्शन करने आएंगे. इसके बाद भी वह अयोध्या पहुंचे, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं किए. साल 2026 में अखिलेश अबतक तीन बार अयोध्या पहुंचे, लेकिन रामलला से नहीं मिला था सपा अध्यक्ष का जुड़ाव. अक्टूबर के दौरे में अखिलेश ने अयोध्या से भाजपा को राजनीतिक चुनौती भी दी थी. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी और कहा कि सपा ने पवन पांडेय को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है.
2024 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या की फैजाबाद सीट पर समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने भाजपा के लल्लू सिंह को हराया था. यह परिणाम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि इसी अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ था और जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया गया था. भाजपा ने राम मंदिर निर्माण को अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनाया था. इसके बावजूद फैजाबाद सीट पर सपा की जीत ने राजनीतिक विमर्श को नया मोड़ दिया. अखिलेश यादव ने इस जीत को संविधान, सामाजिक न्याय और PDA की राजनीति से जोड़कर पेश किया. अवधेश प्रसाद को आगे करके उन्होंने दलित प्रतिनिधित्व का संदेश देने की कोशिश की. इस चुनाव के बाद सपा के लिए अयोध्या सिर्फ धार्मिक राजनीति का केंद्र नहीं रही, बल्कि सामाजिक समीकरण और चुनावी रणनीति का भी महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गई.

