चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के जोरदार प्रदर्शन के बीच भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर बड़ा प्रहार किया है. बीजेपी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना बयान शेयर करते हुए कांग्रेस की राजनीति को ‘विरोध की राजनीति’ बताया है. बीजेपी ने पीएम मोदी के बयान के जरिये यह संदेश देने की कोशिश की है कि कांग्रेस का रवैया किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हर बड़े सुधार का विरोध करती रही है.
बीजेपी ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान को शेयर करते हुए लिखा, ‘रिफॉर्म का नाम सुनते ही कांग्रेस विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है.’ इसके साथ ही पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस के इसी पुराने पैटर्न को एक बार फिर उजागर किया है.
PM मोदी ने कांग्रेस के किस ‘पैटर्न’ का किया जिक्र?
SIR के मुद्दे पर आमने-सामने BJP-कांग्रेस
दरअसल, इस समय चुनाव आयोग की ओर से चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR विपक्ष और बीजेपी के बीच बड़े राजनीतिक टकराव का मुद्दा बनी हुई है. कांग्रेस और INDIA ब्लॉक के नेताओं का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं. विपक्षी दल CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं.
इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के मुख्यालय की तरह मार्च किया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद नेताओं ने आकाशवाणी भवन परिसर में धरना शुरू कर दिया. हालांकि मंगलवार शाम पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया. पुलिस इन्हें बस में बिठाकर किंग्सवे कैंप थाने लेकर गई और फिर वहां से इन सभी को छोड़ दिया गया.
झूठों के सरताज राहुल गांधी
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘झूठ नंबर वन: राहुल गांधी दिनभर कहते रहे कि उन्हें चुनाव आयोग से मिलने नहीं दिया जा रहा. जबकि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस या इंडी गठबंधन की ओर से मुलाकात की कोई औपचारिक रिक्वेस्ट ही नहीं मिली थी. झूठ नंबर दो: शाम 4 बजे पुलिस के डीसीपी के माध्यम से पता चला कि राहुल गांधी मिलना चाहते हैं. चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रतिनिधियों के माध्यम से मिलने के लिए वह तत्काल तैयार था. लेकिन राहुल गांधी तैयार नहीं हुए. स्पष्ट है कि उनका उद्देश्य चुनाव आयोग से मिलकर अपनी बात रखना नहीं, बल्कि ड्रामा करना था.’

