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Karnataka PUC 2nd Topper Disha Success Story: कर्नाटक बोर्ड रिजल्ट 2026 में 100% अंक लाने वाली दिशा की सफलता के पीछे की दास्तां बेहद मार्मिक है. परीक्षा के बीच ही मां को खोने वाली दिशा ने कैसे आंसुओं को अपनी ताकत बनाया और स्टेट टॉपर बनीं? पढ़िए बेटी के संघर्ष और जज्बे की पूरी कहानी.

Karnataka PUC 2nd Result 2026: मां की मौत के बाद भी बेटी दिशा ने हिम्मत नहीं हारी
नई दिल्ली (Karnataka PUC 2nd Topper Disha Success Story). सफलता के शिखर पर पहुंचने का रास्ता अक्सर कांटों भरा होता है. लेकिन कर्नाटक की दिशा ने जिस रास्ते को पार किया है, वह किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकता है. गुरुवार को जब कर्नाटक स्कूल परीक्षा और मूल्यांकन बोर्ड (KSEB) ने 12वीं के नतीजे जारी किए तो मूडबिद्री के अलवा कॉलेज की छात्रा दिशा का नाम पूरे प्रदेश में गूंज उठा. दिशा ने 100 में से 100 फीसदी अंक हासिल कर इतिहास रच दिया.
हालांकि इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाने के लिए आज दिशा की मां उसके पास नहीं हैं. दिशा की कहानी परीक्षा के अंकों से कहीं बढ़कर एक बेटी के जज्बे और मां को दी गई सच्ची श्रद्धांजलि की है. जिस समय दिशा का भविष्य तय करने वाली बोर्ड परीक्षाएं चल रही थीं, उसी समय नियति ने उनके साथ क्रूर खेल खेला. घर के अंदर एक हादसा हुआ और दिशा की दुनिया उजड़ गई. लेकिन टूटने और बिखरने के बजाय, इस बेटी ने अपनी मां के आखिरी शब्दों को अपनी ढाल बनाया.
आंसुओं से सफलता तक: टॉपर दिशा के संघर्ष की कहानी
दिशा की जिंदगी में सब कुछ सामान्य चल रहा था. वह अपने कमरे में बैठकर गणित (Math) के पेपर की तैयारी कर रही थी. अचानक बाहर कुछ गिरने की आवाज आई. दिशा बाहर दौड़ी तो देखा कि उसकी मां सविता फिसलकर गिर गई थीं. शुरुआत में चोट मामूली लगी, लेकिन अगली सुबह उसकी मां बेहोश हो गईं. उन्हें आनन-फानन में मंगलौर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने जवाब दे दिया कि उनकी हालत बेहद नाजुक है.
अस्पताल में मां और सेंटर पर परीक्षा
एक बेटी के लिए इससे बड़ी परीक्षा क्या होगी कि उसकी मां अस्पताल में जिंदगी की आखिरी सांसें गिन रही थीं और उसे अर्थशास्त्र (Economics) का पेपर देने जाना था. भारी मन से दिशा परीक्षा केंद्र पहुंची और एग्जाम दिया. परीक्षा देकर जब वह अस्पताल पहुंची तो वह आखिरी बार अपनी मां से मिल पाई. उसी रात उसकी मां सविता का निधन हो गया. घर में कोहराम मचा था, पिता और छोटी बहन दीक्षा का रो-रोकर बुरा हाल था, लेकिन दिशा के सामने अभी भी बाकी बचे हुए विषयों की चुनौती खड़ी थी.
मां के आखिरी शब्द बने हिम्मत
मां को खोने के बाद किसी के लिए भी सामान्य होना मुमकिन नहीं था, लेकिन दिशा को अपनी मां की कही एक बात बार-बार याद आ रही थी. दिशा बताती है कि जब वह एग्जाम को लेकर परेशान होती थी तो मां कहती थीं- तुमने मेहनत की है, डरो मत, जिसके माथे पर लिखा होता है, उसे मिलता ही है. मां के इन्हीं शब्दों ने दिशा को हिम्मत दी. फिर दिशा ने तय किया कि वह अपनी मां के लिए ही सही, लेकिन इस परीक्षा में हार नहीं मानेगी.
दिशा का लक्ष्य बिल्कुल साफ है. वह चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहती हैं और सीए फाउंडेशन की तैयारी में भी जुट गई है.
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