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Kedarnath Yatra: सड़क किनारे एक मंदिर पर 3 युवा केदारनाथ का एक छोटा मंदिर लिए बैठे थे. बातचीत में पता चला कि ये युवा छपरा से केदारनाथ दर्शन के लिए एक लंबी और कठिन यात्रा पर निकले है. फिलहाल 4 दिनों में ये छपरा से बलिया पहुंचे है. ये वो युवा हैं जिन्होंने बाबा केदारनाथ से मन्नत मांगी थी कि अगर उनकी स्केटिंग की प्रैक्टिस पूरी हो जाएगी तो वे बाबा के दर्शन के लिए स्केटिंग से ही जाएंगे.
बलिया: रास्ते कितने भी मुश्किल क्यों न हों, हौसले कम नहीं होते. जिन्हें बाबा केदारनाथ बुलाते हैं उनके कदम कभी पीछे नहीं हटते. लोकल-18 की टीम जब बाढ़ प्रभावित इलाकों में कटान का कवरेज करने जा रही थी तो रास्ते में उन्हें एक अनोखा नजारा देखने को मिला. सड़क किनारे एक मंदिर पर 3 युवा केदारनाथ का एक छोटा मंदिर लिए बैठे थे. बातचीत में पता चला कि ये युवा छपरा से केदारनाथ दर्शन के लिए एक लंबी और कठिन यात्रा पर निकले है.
फिलहाल 4 दिनों में ये छपरा से बलिया पहुंचे है. ये वो युवा हैं जिन्होंने बाबा केदारनाथ से मन्नत मांगी थी कि अगर उनकी स्केटिंग की प्रैक्टिस पूरी हो जाएगी तो वे बाबा के दर्शन के लिए स्केटिंग से ही जाएंगे और आज वे 57 किलो का वजन (एक मंदिर और बैग) लेकर स्केटिंग के जरिए बाबा के दर्शन के लिए आगे बढ़ रहे है. रास्ते में हर कोई उनका स्वागत कर रहा है. उनका मानना है कि वे 1.5 से 2 महीने में केदारनाथ पहुंच जाएंगे.
चंदन कुमार (छपरा निवासी) ने बताया कि मैं अपने 2 दोस्तों के साथ स्केटिंग के जरिए केदारनाथ दर्शन के लिए निकला हूं. अपने गांव से 4 दिनों में हम बलिया पहुंचे है. हमारा मानना है कि लगभग 1.5 से 2 महीने में हम केदारनाथ पहुंच जाएंगे. हम करीब 2.5 सालों से स्केटिंग का अभ्यास कर रहे है. हमने खुद से 27 किलो वजन का एक केदारनाथ का मंदिर बनाया है. इसके साथ ही 30 किलो का बैग पीठ पर लेकर हम यह सफर तय कर रहे है. मेरे पिताजी किराने की दुकान चलाते है.
आकाश कुमार ने कहा कि मैंने केदारनाथ बाबा से मन्नत मांगी थी कि अगर मेरी स्केटिंग की प्रैक्टिस पूरी हो जाएगी तो मैं इसी के माध्यम से उनकी डोली लेकर दर्शन करने जाऊंगा. मैं अभी इंटरमीडिएट का छात्र हूं. मेरे पिताजी प्राइवेट नौकरी करते है. मैं पहली बार एक प्रतियोगिता में गया था. जिसमें मेरे भाई भी शामिल थे. हम दोनों को जीत मिली थी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हमें इनाम के तौर पर 2 स्केटिंग दिए थे.
गंगा स्केटर (छपरा जिले के परसा गांव निवासी) ने बताया कि हम स्केटिंग के जरिए केदारनाथ दर्शन के लिए जा रहे है. जिसमें हरिद्वार भी शामिल है. बरसात का मौसम है. जरूरत पड़ने पर हम कैंप लगाकर या किसी मंदिर में रुक जाते है. हमने बैग में खाना बनाने से लेकर रोजमर्रा का हर सामान रखा है. उन्होंने आगे कहा कि गांव के लोग हमारी बहुत मदद कर रहे है. वे हमें भोजन, पानी और नाश्ता करा रहे है. ढाबों पर खाना खाने पर ढाबे वाले पैसे नहीं ले रहे है. हम किसी खास होटल में नहीं रुकते, क्योंकि हमें पैसे बचाने है. अभी बाबा के दर्शन बाकी है. मैं पिछले 6 सालों से स्केटिंग की प्रैक्टिस कर रहा हूं.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें

