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Hyderabad First Post Office: ईमेल, मैसेजिंग ऐप और डिजिटल कम्युनिकेशन के दौर में भी हैदराबाद का पहला पोस्ट ऑफिस अपनी पुरानी पहचान और सेवा को बनाए हुए है. करीब 160 साल से लगातार लोगों तक डाक सेवा पहुंचाने वाला यह पोस्ट ऑफिस शहर की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा माना जाता है. जिस दौर में चिट्ठियां और डाक ही संदेश पहुंचाने का प्रमुख माध्यम थीं, उस समय से लेकर आज के डिजिटल युग तक इस पोस्ट ऑफिस ने लंबा सफर तय किया है. इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसे खास बनाती है. आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद डाक सेवाओं की उपयोगिता और लोगों का जुड़ाव यहां आज भी देखने को मिलता है.
हैदराबाद की ऐतिहासिक पहचान हैदराबाद का नाम सुनते ही चारमीनार, बिरयानी और पुराने शहर की ऐतिहासिक गलियों का ख्याल आता है. लेकिन इसी पुराने शहर के शहालीबंडा इलाके में एक ऐसी इमारत मौजूद है. जो 160 से भी ज्यादा सालों के डाक इतिहास की गवाह रही है. शहालीबंडा पोस्ट ऑफिस हैदराबाद का सबसे पुराना डाकघर माना जाता है. जो आज भी पूरी तरह चालू है.
निज़ाम काल और अमीन-ए-टप्पा इस ऐतिहासिक डाकघर की शुरुआत 1862 में हैदराबाद के निज़ाम के दौर में हुई थी. उस समय निज़ाम सरकार ने डाक व्यवस्था को संभालने के लिए अमीन-ए-टप्पा यानी निज़ाम स्टेट पोस्टल डिपार्टमेंट की स्थापना की थी. उस दौर में संदेश भेजने के लिए डाक वाहक पैदल या घोड़ों पर सवार होकर मीलों का सफर तय करते थे.
अपनी टिकटें और अलग डाक तंत्र इस पोस्ट ऑफिस की सबसे बड़ी खासियत इसका अनूठा इतिहास है. ब्रिटिश भारत के दौरान जब देश के बाकी हिस्सों में ईस्ट इंडिया कंपनी की टिकटें चलती थीं, तब हैदराबाद स्टेट का अपना अलग डाक तंत्र था. यहाँ निज़ाम शाही की अपनी खास डाक टिकटें और मुहरें इस्तेमाल की जाती थीं.
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लोकेशन और वास्तुकला की मिसाल यह ऐतिहासिक डाकघर चारमीनार के पास लाल दरवाजा क्रॉस रोड पर स्थित है. इसका मौजूदा पिनकोड 500065 है. यह इमारत केवल चिट्ठियाँ बाँटने का जरिया नहीं रही, बल्कि हैदराबाद की आसिफ जाही वास्तुकला की एक शानदार और अनूठी मिसाल भी है.
डिजिटल दौर में भी आधुनिक सेवाएं ईमेल और व्हाट्सएप के इस ज़माने में जहाँ कई पुरानी चीज़ें इतिहास के पन्नों में खो गईं वहीं यह डाकघर आज भी मजबूती से खड़ा है. यहाँ आज भी रोज़मर्रा की चिट्ठियाँ पोस्ट करने, स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री और बचत योजनाओं के काम आम जनता के लिए किए जाते हैं.
अतीत और वर्तमान का संगम शहालीबंडा का यह डाकघर हैदराबाद के गौरवशाली अतीत और आधुनिक दौर को जोड़ने वाली एक बेहद अहम कड़ी है. अगर आप कभी पुराने शहर की सैर करने जाएं, तो 160 साल पुरानी इस जीवित विरासत को देखना अपने आप में एक खास अनुभव होगा.

