नारा लोकेश का कर्नाटक पर तंज: ‘हमारा खाना तीखा है… निवेश भी’
तेलुगू देशम पार्टी के नेता और आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने कर्नाटक सरकार पर तंज कसा. उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर लिखा– “कहते हैं आंध्र का खाना तीखा होता है, अब लगता है हमारे निवेश भी वैसे ही हैं. कुछ पड़ोसी तो अभी से जलन महसूस कर रहे हैं.”
उनका ये बयान सीधे तौर पर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की ओर इशारा था. लोकेश ने अपने पोस्ट में #AndhraRising और #YoungestStateHighestInvestment जैसे टैग लगाए, जिससे साफ था कि वे गूगल के निवेश को आंध्र प्रदेश की बड़ी उपलब्धि बताना चाहते थे.
गूगल के फैसले से कर्नाटक में मचा हंगामा
गूगल ने बेंगलुरु की बजाय विशाखापत्तनम में AI हब लगाने का फैसला किया, जिससे कर्नाटक की राजनीति में हलचल मच गई.
विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने बिजनेस के लिए अच्छा माहौल नहीं बनाया. जनता दल (सेक्युलर) के नेताओं ने कहा कि बेंगलुरु, जो कभी भारत का सिलिकॉन वैली कहलाता था, अब निवेशकों की पहली पसंद नहीं रहा.
किरण मजूमदार-शॉ ने सड़कों पर उठाए सवाल
बायोकॉन कंपनी की चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने हाल ही में बेंगलुरु की हालत पर चिंता जताई. उन्होंने X पर लिखा- “बेंगलुरु की सड़कों की हालत इतनी खराब क्यों है? चारों तरफ कचरा क्यों फैला है? क्या सरकार निवेश को बढ़ावा देना चाहती भी है?” उनके इस सवाल के बाद कर्नाटक सरकार पर और दबाव बढ़ा.
सरकार का जवाब: ‘बेंगलुरु का कोई मुकाबला नहीं’
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस पर जवाब देते हुए कहा— “बेंगलुरु की इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप्स, और ह्यूमन रिसोर्स से कोई मुकाबला नहीं कर सकता. हमें निवेश की कमी नहीं, बल्कि पहचान की ताकत है.”
वहीं कांग्रेस नेता प्रियंक खड़गे ने कहा कि रचनात्मक आलोचना का स्वागत है, लेकिन समस्या के कारण भी समझने होंगे. उनके मुताबिक, “अभूतपूर्व बारिश, तेज़ी से बढ़ता शहरीकरण और लाखों प्रवासी कामगारों के आने से शहर पर दबाव बढ़ा है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर पड़ा है.”
कर्नाटक मंत्री का पलटवार: ‘केंद्र का लॉलीपॉप मिला है!’
जब नारा लोकेश ने कर्नाटक सरकार पर तंज कसा, तो राज्य के मंत्री संतोष लाड ने जवाबी हमला किया. उन्होंने CNN-News18 से बातचीत में कहा- “उन्हें केंद्र से लॉलीपॉप मिला है, इसलिए निवेश मिल रहा है. क्या वो कह सकते हैं कि इसमें केंद्र की कोई भूमिका नहीं है? अगर हमें भी केंद्र से उतना फंड मिले, तो हम भी वैसा ही करेंगे.”
संतोष लाड का ये बयान इस बात की तरफ इशारा करता है कि कर्नाटक सरकार को लगता है—आंध्र प्रदेश को केंद्र की मदद से फायदा मिला है, जबकि कर्नाटक को नज़रअंदाज़ किया गया है.

