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सुल्तानपुर जिला जिसे केशपुर, कहा जाता है. यहां पर भी गौतम बुद्ध ने लगभग 6 महीने प्रवास किया था.चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी यहां पर गौतम बुद्ध के स्थलों का जिक्र किया है लेकिन दुर्भाग्य है कि सुल्तानपुर का यह बौद्ध स्थल अब सिर्फ खंडहर हो चुका है. यहां पर जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं जो भी पुराने अवशेष बचे हैं उनका संरक्षण करने वाला कोई नहीं स्थानीय लोगों की यह मांग है कि सारनाथ और श्रावस्ती की तरह केशपुर को भी डेवलप किया जाना चाहिए.
सुल्तानपुरः जब भी सारनाथ और श्रावस्ती का जिक्र आता है, भगवान गौतम बुद्ध याद आने लगते हैं, क्योंकि यूपी का सारनाथ भगवान बुद्ध के पहली बार उपदेश देने के लिए प्रसिद्ध है. वहीं श्रावस्ती में भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के कई वर्ष व्यतीत किए लेकिन उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला जिसे केशपुर, कहा जाता है. यहां पर भी गौतम बुद्ध ने लगभग 6 महीने प्रवास किया था.
चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी यहां पर गौतम बुद्ध के स्थलों का जिक्र किया है लेकिन दुर्भाग्य है कि सुल्तानपुर का यह बौद्ध स्थल अब सिर्फ खंडहर हो चुका है. यहां पर जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं जो भी पुराने अवशेष बचे हैं उनका संरक्षण करने वाला कोई नहीं स्थानीय लोगों की यह मांग है कि सारनाथ और श्रावस्ती की तरह केशपुर को भी डेवलप किया जाना चाहिए.
जाने के लिए रास्ता नहीं पगडंडी है सहारा
जो स्थल वाराणसी के सारनाथ और श्रावस्ती जैसे प्रसिद्ध और भव्य पर्यटक स्थलों के मांग कर रहा हो वह आज सिर्फ और सिर्फ स्वयं के अस्तित्व को बचाने की भीख मांग रहा है. दरअसल हम बात कर रहे हैं केशपुर की जो सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर कुड़वार ग्रैंड ग्राम सभा में स्थित गढ़ा आश्रम एक ऐतिहासिक स्थल है. जो हजारों वर्ष पुराना बताया जाता है इस ऐतिहासिक स्थल तक पहुंचाने के लिए सिर्फ पगडंडी ही एकमात्र सहारा है. यानी कि आप सिर्फ और सिर्फ पैदल चलकर ही इस आश्रम तक पहुंच सकते हैं.
यदि आप चार पहिया वाहन से यहां तक जाना चाहते हैं तो आपको सावधान हो जाने की आवश्यकता है क्योंकि इस स्थल पर चार पहिया वाहन नहीं है. पूर्व प्रधान अर्जुन कुमार सिंह कहते हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाल में यहां पर मिट्टी का रास्ता बनवाया था लेकिन अभी तक पक्का रास्ता न बनने की वजह से वह मिट्टी बह गई और अब यहां तक पहुंचाने के लिए पैदल एक मात्र विकल्प है.
शौचालय तक नहीं है इंतजाम
इस आश्रम में रहने वाले भरत दास लोकल 18 से बातचीत के दौरान कहते हैं कि यहां पर एक शौचालय तक भी नहीं बनवाया गया है. जिससे यहां पर आने वाली महिला पर्यटकों या श्रद्धालुओं शौच के लिए 40 फीट नीचे जाना पड़ता है. जो कि जंगल और जहरीले जानवरों का खतरा हमेशा बना रहता है. इस ऐतिहासिक स्थल तक बिजली के खंभे भी नहीं पहुंच सके हैं. एक सोलर लाइट यहां पर लगाई गई है और वही उजाले का एकमात्र साधन है.
स्थानीयों की मांग पर्यटन स्थल विकसित किया जाए
स्थानीय निवासी नौशाद अहमद कहते हैं कि ग्रामीणों की यह मांग है कि सरकार द्वारा इस स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए और यहां तक पहुंचाने के लिए रास्ता बनवाया जाए बिजली की व्यवस्था की जाए और शौचालय की भी व्यवस्था की जाए. गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित या प्राचीन स्थल आज सारनाथ और श्रावस्ती बनने के इंतजार में है कैसे गौतम बुद्ध का और बौद्ध धर्म से संबंधित वह स्थल है. जहां पर बहुत धर्म के अनुयायियों का डाटा लगता था लेकिन दुर्भाग्य किया. अभी भी सारनाथ और श्रावस्ती बनने के इंतजार में ठोकरे खा रहा है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

