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आरती ने अपनी खास ‘चटपटी सूखी गोभी’ की रेसिपी साझा की है, जिसे लोगों से भरपूर सराहना मिल रही है. आरती बताती हैं कि उत्तर बिहार के घरों में सब्जी बनाने की अपनी विशिष्ट परंपरा है, जिसमें स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखा जाता है. उनका कहना है कि यदि विधि सही हो, तो साधारण सब्जी भी खास बन सकती है.
सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी प्रखंड की निवासी एक साधारण गृहिणी आरती कुमारी आज अपनी पाक कला के कारण सोशल मीडिया और स्थानीय क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं. आरती का मानना है कि स्वादिष्ट भोजन केवल महंगे मसालों से नहीं, बल्कि सही तकनीक, धैर्य और पारंपरिक तरीके से तैयार होता है. हाल ही में उन्होंने अपनी खास ‘चटपटी सूखी गोभी’ की रेसिपी साझा की है, जिसे लोगों से भरपूर सराहना मिल रही है. आरती बताती हैं कि उत्तर बिहार के घरों में सब्जी बनाने की अपनी विशिष्ट परंपरा है, जिसमें स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखा जाता है. उनका कहना है कि यदि विधि सही हो, तो साधारण सब्जी भी खास बन सकती है.
शुद्धता और तैयारी: स्वाद की पहली शर्त
आरती कुमारी रेसिपी की शुरुआत सामग्री के चयन से करती हैं. उनके अनुसार, सूखी गोभी बनाने के लिए ताजी और कसी हुई (गठी हुई) गोभी का चयन बेहद जरूरी है. वह सलाह देती हैं कि गोभी को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर हल्के गुनगुने नमक वाले पानी में लगभग पांच मिनट तक भिगोकर रखना चाहिए, ताकि उसमें मौजूद अशुद्धियां निकल जाएं. इसके बाद वह दो मध्यम आकार के आलू, हरी मिर्च, अदरक और सरसों के तेल का उपयोग करती हैं. आरती का कहना है कि रिफाइंड तेल के बजाय सरसों तेल का प्रयोग सब्जी में खास सोंधापन लाता है, जो बाजपट्टी की मिट्टी की पहचान जैसा स्वाद देता है.
भूनने की कला: बिना पानी के तैयार होता है जायका
सब्जी बनाने की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए आरती कहती हैं कि कड़ाही में सबसे पहले जीरा और हींग का तड़का लगाया जाता है. इसके बाद गोभी और आलू को तेज आंच पर अच्छी तरह भूनना चाहिए. वह एक खास टिप साझा करते हुए कहती हैं, ‘मसाले डालने से पहले सब्जी को हल्का सुनहरा होने तक भूनना जरूरी है, ताकि गोभी पानी न छोड़े और उसका कुरकुरापन बना रहे.’ इसके बाद हल्दी, धनिया पाउडर और लाल मिर्च डाली जाती है. आरती की इस रेसिपी की सबसे खास बात यह है कि वह सूखी सब्जी में पानी की एक बूंद भी नहीं डालतीं. सब्जी को ढककर धीमी आंच पर उसकी अपनी भाप में पकाया जाता है, जिससे मसालों का स्वाद हर रेशे में समा जाता है और सब्जी का असली जायका बरकरार रहता है.
पारंपरिक स्वाद का खास टच
जब सब्जी पूरी तरह पक जाती है, तब उसमें थोड़ा सा गरम मसाला और खटास के लिए अमचूर पाउडर मिलाया जाता है. अंत में ताजी कटी हरी धनिया डालकर सब्जी को सजाया जाता है. आरती कुमारी के अनुसार, यह चटपटी सूखी गोभी दाल-चावल या गरमागरम पराठों के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है. उनके गांव के लोग अक्सर उनसे खाना बनाने की बारीकियां सीखने पहुंचते हैं. आरती का कहना है कि यदि गृहिणियां पारंपरिक तरीकों को थोड़े धैर्य और समझ के साथ अपनाएं, तो साधारण सी गोभी भी किसी शाही व्यंजन से कम नहीं लगेगी. उनकी यह पहल न केवल स्वाद को बढ़ावा दे रही है, बल्कि पारंपरिक रसोई संस्कृति को भी नई पहचान दिला रही है.
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