राजनीति की राहों में तेजस्वी का विवादित कदम
दरअसल,तेजस्वी यादव की यात्रा जब बाहुबली अनंत सिंह के गढ़ मोकामा पहुंची तो यहां उन्होंने घोड़े की सवारी की और अपने संबोधन के दौरान ही कलम पब्लिक के बीच में फेंककर बताने की कोशिश की कि वे बंदूक की जगह कलम के पैरोकार हैं. उनकी और आरजेडी के सोशल मीडिया अकाउंट से लिखा गया, जेडीयू वाले बंदूक बांटते हैं और बिहार भर में भाजपाई तलवार बांटते हैं! बिहार के युवाओं के सामने विकल्प स्पष्ट है! बिहार हिंसा नहीं, ज्ञान को चुनेगा! बिहार बंदूक नहीं, कलम को चुनेगा! बिहार अपराधियों को छुड़ाने वाली भाजपा नीतीश सरकार नहीं, जन समर्पित तेजस्वी सरकार को चुनेगा! जाहिर है तेजस्वी यादव का उद्देश्य अपनी राजनीति को आगे बढ़ाना और खुद को बिहार का नेतृत्वकर्ता के तौर पर स्थापित कर आगामी चुनाव में सफलता पाना है. मगर इस क्रम में वह जो बात कहना चाहते थे उसमें ही चूकते नजर आए. उनकी हरकत ने उस मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए जो वह बिहार की जनता को बताना चाहते हैं. उन्होंने ‘कलम की कदर’ नहीं की और उस कलम का ही अपमान कर बैठे जिसे सिर-माथे लगाने की हमारे संस्कार, हमारी संस्कृति और परंपरा हैं.
तेजस्वी यादव ने मोकामा में कलम बांटकर कहा कि वह बंदूक की जगह कलम से क्रांति करना चाहते हैं. लेकिन, उनके कलम वितरण के तरीके पर सवाल उठे.
बिहार की सांस्कृतिक विरासत में कलम की महत्ता
कलम के अपमान के पीछे राजनीतिक मानसिकता
तेजस्वी यादव की कलम बांटने (फेंकने) की घटना पर यदि हम ध्यान दें तो यह घटना सिर्फ एक सीधी-सादी गलती नहीं थी, बल्कि यह उस अनमयस्क मानसिकता की पराकाष्ठा है जिसमें कलम और उसके महत्व को नजरअंदाज किया जाता है. अपने और अपनी पार्टी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कलम बांटने की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर “कलम से क्रांति लाऊंगा! मैं नया बिहार बनाऊंगा!” कह देने भर से क्रांति तो कतई नहीं आने वाली है. उन्होंने कलम को पब्लिक के बीच जिस तरह से उछाला, यह संकेत करता है कि वह कलम को अब केवल वस्तु के रूप में देख रहे हैं. सवाल यह कि क्या आज हम उस कलम के महत्व को समझ रहे हैं जो देश-समाज को दिशा दिखाती है? क्या यह बात हम सबको आत्मसात करनी चाहिए कि समाज को दिशा देने के लिए कलम का आदर करना चाहिए?
कलम गिराना एक प्रतीकात्मक घटनाभर नहीं!
सोशल मीडिया और राजनीति में कलम का खोता सम्मान
दरअसल, कलम के अपमान (जाने-अनजाने) के पीछे एक गहरी मानसिकता छिपी हुई है जो समाज और राजनीति में हम निरंतर देख रहे हैं. सोशल मीडिया के इस दौर में हो रही राजनीति के महासंग्राम में वास्तव में कलम का कोई स्थान नहीं रह गया है. यह विचारणीय है कि कलम से जोड़ने वाली सोच की दिशा किस तरह से बदल रही है.राजनीतिक मंचों पर हम प्राय: देखते हैं कि शब्दों और बयानों (अपशब्दों की परिभाषा की सीमा से भी परे चले जाना) का खेल अधिक महत्वपूर्ण होता है, जबकि सच को उजागर करने वाली कलम की कोई कीमत नहीं रह जाती. कलम को ‘क्रांति का औजार’ बताने के लिए पब्लिक के बीच जिस तरह से उछालकर बांटा गया इसने समाज में यह संदेश दिया कि कलम कोई अमूल्य वस्तु नहीं, बल्कि एक साधारण टूल (औजार या उपकरण) है.
शिक्षा और कलम का गहरा रिश्ता, शिक्षा संस्कार का आधार
बिहार अधिकार यात्रा के दौरान 18 सितंबर को खगड़िया में तेजस्वी यादव ने एक बच्चे को अपने हेलीकाप्टर में बैठाकर एक कलम दी.
क्या हम कलम की कीमत समझते हैं?
शिक्षा का अर्थ सिर्फ पाठ्यक्रम और किताबों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह जीवन के हर पहलू में लागू होता है. यदि हमें अपने समाज को आगे बढ़ाना है तो हमें इस मूलभूत सत्य को समझना होगा कि कलम वह शक्तिशाली औजार है जो सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक बदलाव लाता रहा है, ला रहा है और आगे भी लाता रहेगा. जाहिर है जो लोग इसे केवल एक साधारण लेखन उपकरण मानते हैं वे समाज की वास्तविकता और आवश्यकताओं से अनजान होते हैं.कलम का सम्मान, उसका आदर और उसकी कीमत हमारी सांस्कृतिक पहचान और मानसिकता का प्रमाण होते हैं. लेकिन जब इसी कलम का अपमान किया जाता है तो यह समाज के चेतन और बौद्धिक विकास के प्रति भी एक घातक संदेश है, क्योंकि राजनीति का मुख्य उद्देश्य समाज के उत्थान के लिए रास्ते तैयार करना होता है, न कि उस ज्ञान के प्रतीक का अपमान करना जो इस उत्थान के आधार का माध्यम हो!
कलम की गरिमा बनाए रखना क्यों जरूरी है?
समाज और राजनीति, सभी कलम का सम्मान करें
आजकल के राजनेता, पत्रकार और समाज सुधारक सब एक दूसरे के साथ मिलकर इस दिशा में काम करने के बजाय कलम का मजाक उड़ाने में व्यस्त हैं. कृपया ध्यान रखें कि कलम की महत्ता समझने के लिए किसी बड़े महापुरुष या विद्वान की जरूरत नहीं है. यह हर उस व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा है जो समाज में बदलाव लाना चाहता है. अपील यही है कि हमें कलम को केवल एक साधारण लेखन उपकरण के रूप में नहीं देखना चाहिए. कलम, समाज और देश के भविष्य की दिशा को तय करने वाला सबसे शक्तिशाली अस्त्र है. अगर कलम गिर जाए तो उसे उठाकर सम्मान से अपने माथे पर लगाएं, क्योंकि यही हमारी शिक्षा, हमारी संस्कृति और हमारे समाज के सशक्त करने की शक्ति का प्रतीक है.
कलम का अपमान हम सबके लिए एक चेतावनी
तेजस्वी यादव के इस कृत्य को केवल व्यक्तिगत गलती भी मान लें तो भी यह उन मूल्यों का उल्लंघन है जो हमें अपने समाज और संस्कृति से मिलते हैं. जब हम कलम का सम्मान नहीं करते तो हम समाज के उन आदर्शों और मान्यताओं की भी अवहेलना कर रहे होते हैं जो हमें सशक्त, जागरूक और प्रबुद्ध बनाती हैं. दरअसल, राजनीति का तंत्र यदि एक तरफ देश की दिशा तय करने का कार्य करता है तो दूसरी तरफ वह समाज के उस भावनात्मक और मानसिक स्वरूप को भी आकार देता है. अगर राजनीति में शामिल व्यक्ति खुद कलम का अपमान करते हैं तो यह क्या संदेश देता है? यदि हम समाज में बदलाव लाना चाहते हैं तो हमें कलाम के सम्मान को प्राथमिकता देनी होगी. यह घटना एक चेतावनी है कि हमें अपनी शिक्षा, संस्कृति और विचारों के मूल्यों को समझना होगा, ताकि हम अपने समाज और संस्कृति का सही तरीके से निर्माण कर सकें.

