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लखनऊ में हुए कोचिंग हादसे के बाद मथुरा प्रशासन ने अवैध रूप से चल रही कोचिंगों पर सख्ती शुरू कर दी है. बीएसए रोड सहित कई क्षेत्रों में बिना अनुमति, रजिस्ट्रेशन और फायर एनओसी के संचालित कोचिंग सेंटरों पर कार्रवाई की गई, जिनमें कुछ को सील भी किया गया. प्रशासनिक जांच में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई, जबकि कई संचालक कार्रवाई से बचने के लिए कोचिंग बंद कर फरार हो गए. हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रशासन हादसों के बाद ही क्यों सक्रिय होता है और स्थायी निगरानी क्यों नहीं हो पाती.
मथुरा: प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए कोचिंग हादसे के बाद मथुरा में प्रशासन नींद से जाग गया है. अब बिना परमिशन की चल रही कोचिंगों पर प्रशासन की कार्यवाही होती दिखाई दे रही है. आखिर हादसे के बाद क्यों जिला प्रशासन नींद से जगाता है. कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति जिला प्रशासन कर इतिश्री कर लेता है. बीएसए रोड स्थित सैकडों ऐसी कोचिंग हैं, जो बिना परमिशन और रजिस्ट्रेशन के चल रही हैं.
कब तक होते रहेंगे ऐसे हादसे
राजधानी लखनऊ में कोचिंग सेंटर में लगी आग ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ऐसे हादसे कब तक होते रहेंगे? हर बड़ी दुर्घटना के बाद वही परिचित तस्वीर सामने आती है. मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा उच्चस्तरीय जांच के आदेश दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन और कुछ अधिकारियों के निलंबन की खबरें. लेकिन क्या इतना भर पर्याप्त है? यदि किसी भवन में अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, निर्माण मानकों की अनदेखी की गई थी और संबंधित विभागों की निगरानी में चूक हुई थी तो जिम्मेदारी केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे तंत्र की बनती है.
जांचें लंबी खिंचती हैं जिम्मेदारियां धुंधली हो जाती हैं
सवाल यह भी है कि हादसे के बाद अचानक नियमों की याद क्यों आती है? क्या ऐसी इमारतें पहले अधिकारियों की नजर में नहीं थीं? दुर्भाग्य यह है कि कुछ समय बाद मामला ठंडा पड़ जाता है. जांचें लंबी खिंचती हैं जिम्मेदारियां धुंधली हो जाती हैं और जनता का ध्यान किसी नए मुद्दे की ओर चला जाता है. इस बीच पीड़ित परिवार अपने अपनों को खोने के दर्द के साथ अकेले रह जाते हैं. किसी भी समाज की संवेदनशीलता का पैमाना केवल मुआवजे की राशि नहीं होती बल्कि यह होता है कि वह ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कितनी गंभीरता से काम करता है.
आवश्यकता केवल तात्कालिक कार्रवाई की नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के कठोर पालन तथा दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने की है. यदि हर हादसे के बाद केवल शोक मुआवजा और आश्वासन ही दोहराए जाते रहे तो यह व्यवस्था पर नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक स्मृति और संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिह्न होगा.
प्रशासन की टूटी कुंभकरणीय नींद, चलाया गया चेकिंग अभियान
लखनऊ कोचिंग सेंटर में हुई आगजनी की घटना के बाद मथुरा प्रशासन की भी अब कुम्भकरणीय नींद टूट गई है. आनन-फानन में सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्र की अनुयाई में अग्निशमन विभाग और विकास प्राधिकरण की टीमें बीएसए इंजीनियरिंग कॉलेज के समीप संचालित कोचिंगों की जांच के लिए पहुंचीं. टीम के आने की सूचना सुनते ही अधिकतर कोचिंग संचालक शटर गिराकर ताला जड़कर भाग खड़े हुए, तो जिन कोचिंगों को चेक किया गया उनमें से कुछ कोचिंग सील भी की गई. प्रशासन ने कार्यवाही करते हुए अपना गुड वर्क तो दिखा दिया लेकिन सवाल यह खड़ा होता है कि जब हादसे होते हैं, तो प्रशासन क्यों नींद से जाग कार्यवाही करता है. अगर कार्यवाही पहले ही सुनिश्चित कर ली गई होती तो हाथ से शायद नहीं होते.
मुद्दा ठंडा होने के बाद फिर शुरू हो जाएगी अवैध कोचिंग और लाइब्रेरी
लोकल 18 की टीम ने ग्राउंड जीरो से उन हालातों को दिखाया जो बिना रजिस्ट्रेशन और फायर एनओसी के बिना संचालित थी सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्र से जब लोकल 18 की टीम ने बात की तो उन्होंने बताया कि शासन से डायरेक्शन मिले थे कि अवैध कोचिंगों को सील की प्रक्रिया अमल में लाई जाए. जब उनसे लोकल 18 की टीम ने यह सवाल किया की हादसे होने के बाद ही क्यों कार्यवाही सुनिश्चित की जाती है, तो कोई संतोषजनक जवाब सिटी मजिस्ट्रेट अनुपम मिश्रा नहीं दे पाए.
बीएसए इंजीनियरिंग कॉलेज पर अधिकतर कोचिंग और लाइब्रेरी बेसमेंट में चल रही हैं. कोई भी आपातकाल द्वारा की व्यवस्था नहीं है. चार दिन यह मुद्दा गरमाएगा और फिर ठंडा पड़ जायेगा. इस तरह से बीसीए कॉलेज पर कोचिंग अवैध रूप से चलती रहेगी और कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति जिला प्रशासन करता रहेगा.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

