दो बार विधायक रह चुकी हैं अनुजेश यादव की मां
उपचुनाव के घमासान में अपना गढ़ बचाने के लिए समाजवादी पार्टी जातीय बिसात बिछा रही है। यादव मतदाताओं की बहुलता वाली करहल विधानसभा सीट पर सपा बीते चार चुनावों से अजेय है। इस बार बीजेपी और उसके प्रत्याशी अनुजेश यादव से मिल रही चुनौती के कारण पार्टी कोई जोखिम उठाने को तैयार नहीं है। अनुजेश यादव सैफई परिवार के रिश्तेदार हैं। उनकी मां दो बार विधायक रह चुकी हैं। करहल के एक बड़े इलाके में उनका प्रभाव माना जाता है।
अन्य जातियों का भी वोट पाने की कोशिश में सपा
बीजेपी यादव मतों में सेंधमारी के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। ऐसे में सपा अपने यादव वोट बैंक को सहेजने के साथ अन्य जातियों का समर्थन पाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए विभिन्न जातियों के नेताओं को क्षेत्रवार जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कई नेताओं के लगातार दौरे कराने की योजना भी बनाई गई है।
यादव के बाद शाक्य वोटर दूसरे नंबर पर
करहल विधानसभा सीट को सपा का गढ़ कहा जाता है। इस विधानसभा क्षेत्र में में यादव मतदाता सबसे ज्यादा हैं, जिनकी संख्या करीब सवा लाख है। दूसरे नंबर पर शाक्य मतदाता हैं, जिनकी संख्या 40 हजार के आसपास है। क्षत्रिय और जाटव मतदाता 30-30 हजार के आसपास है। पाल-धनगर मतदाताओं की संख्या 25 से 30 हजार के बीच है। ब्राह्मण और मुसलमान मतदाता 15-15 हजार बताए जाते हैं। कठेरिया समाज और लोधी समाज के मतदाता 18-18 हजार के आसपास बताई जाती है।

