भारतीय नौसेना का ऐतिहासिक आईओएस सागर-26 (IOS SAGAR-26) मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है. कई सप्ताह तक समुद्री लहरों पर मित्रता, सहयोग और संयुक्त प्रशिक्षण का संदेश देने के बाद नौसैनिक युद्धपोत आईएनएस सुनयना बुधवार को स्वदेश लौट आया. भारत की इस अनूठी पहल के तहत वन ओशन वन मिशन (One Ocean, One Mission) के संकल्प को साकार किया गया, जिसने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री भूमिका और कूटनीतिक कमान को वैश्विक मंच पर साबित किया है. स्वदेश वापसी पर युद्धपोत का भव्य फ्लैग-इन समारोह में स्वागत किया गया, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और समृद्धि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक बना.
17 देशों के नौसैनिकों ने रचा इतिहास
इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत इसका बहुराष्ट्रीय स्वरूप रहा. समुद्र को सीमाओं में बांधने के बजाय इसे सहयोग का मंच बनाते हुए भारत समेत कुल 17 देशों के नौसैनिक इस युद्धपोत पर एक साथ रहे.
· शामिल देश: इस मिशन में भारत के अलावा बांग्लादेश, इंडोनेशिया, केन्या, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, मोजाम्बिक, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, तंजानिया, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के नौसैनिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.
· साझा उद्देश्य: अलग-अलग भाषा, संस्कृति और सैन्य परंपराओं के बावजूद सभी का एकमात्र लक्ष्य सुरक्षित, स्थिर और सहयोगपूर्ण हिंद महासागर क्षेत्र का निर्माण करना था.
· चलता-फिरता मंच: आईएनएस सुनयना केवल एक युद्धपोत नहीं बल्कि एक चलता-फिरता समुद्री सहयोग मंच बन गया, जहां विदेशी नौसैनिकों ने भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता और आधुनिक तकनीकों को करीब से देखा.
संयुक्त अभ्यास और सामरिक महत्व
मिशन की शुरुआत हार्बर प्रशिक्षण से हुई, जिसके बाद समुद्री तैनाती, संयुक्त अभ्यासों और विभिन्न देशों के बंदरगाह दौरों (Port Visits) तक यह सिलसिला लगातार चलता रहा.
· इंटरऑपरेबिलिटी: समुद्र में संचार समन्वय, समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान (SAR) तथा आपदा राहत संचालन (HADR) का कड़ा अभ्यास किया गया ताकि भविष्य की चुनौतियों से मिलकर निपटा जा सके.
· सागर (SAGAR) विजन को मजबूती: यह मिशन भारत के ‘सागर’ विजन (सुरक्षा और क्षेत्र में सभी के लिए विकास) को व्यावहारिक रूप देता है. हिंद महासागर आज वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा का केंद्र है, ऐसे में 16 मित्र देशों के साथ यह तालमेल भारत की एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है.
सवाल-जवाब
आईओएस सागर-26 मिशन का मुख्य मूलमंत्र क्या था और यह किस युद्धपोत के जरिए पूरा हुआ?
इस मिशन का मुख्य मूलमंत्र ‘वन ओशन, वन मिशन’ (One Ocean, One Mission) था. समुद्र को व्यापार और रणनीति से आगे बढ़ाकर कूटनीति तथा कूटनीतिक कमान का माध्यम बनाने के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सुनयना (INS Sunayna) को इस मिशन के तहत तैनात किया गया था.
सामरिक दृष्टि से आईओएस सागर-26 मिशन को भारतीय नौसेना के लिए इतनी बड़ी कामयाबी क्यों माना जा रहा है?
हिंद महासागर वैश्विक ऊर्जा और व्यापार सुरक्षा का मुख्य केंद्र है. इस मिशन के जरिए भारत ने 16 मित्र देशों के नौसैनिकों को अपने युद्धपोत पर रखकर संयुक्त अभ्यास कराया. इससे भविष्य में आने वाली किसी भी क्षेत्रीय चुनौती या आपदा के समय विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) और क्षमता विकास को बेहद मजबूती मिली है.

