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महराजगंज जिले के निचलौल से बहुआर जाने वाली सड़क की बात करें तो यह बीच जंगल से होते हुए निकलती है. सीमावर्ती क्षेत्र के बहुत से ऐसे स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चे प्रतिदिन इसी रास्ते से होकर आते जाते हैं. इनमें से ज्यादातर बच्चे ऐसे हैं जो साइकिल से अपने स्कूल और कॉलेज जाते हैं. ऐसे में उन बच्चों के लिए स्थिति पहले जैसी नहीं रही है बल्कि तेंदुए के हमलों के बाद से उनके बीच एक भय का माहौल बना हुआ है.
महराजगंज: निचलौल से बहुआर तक जाने वाली सड़क से लोगों का आना-जाना काफी कम हो गया है. इसके पीछे की वजह यह है कि इस क्षेत्र में लगातार तेंदुओं की गतिविधियां बढ़ रही है और ऐसे में इस सड़क से आने जाने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है. बीते कुछ दिनों में ही तेंदुए के हमले की कई घटनाएं सामने आई जिसके बाद से लोगों के बीच एक डर का माहौल बन गया है. इस रोड की बात करें तो यह रोड बीच जंगल से होते हुए जंगल के उस पार स्थित गांवों तक जाती है.
ऐसे में एक बड़ी जनसंख्या ऐसी है जो प्रतिदिन इस सड़क से होते हुए आवागमन करती है. इन इलाकों के लिए निचलौल एक बड़ा कस्बा है जहां से उनके दैनिक जीवन की जरूरतें भी पूरी होती है और उन्हें छोटे-बड़े काम के लिए आना जाना पड़ता है. तेंदुए की घटनाएं जब से सामने आई है तब से इस सड़क पर पहले जैसी हलचल देखने को नहीं मिल रही है बल्कि बहुत ही कम लोग सड़क पर देखने को मिल रहे हैं.
तेंदुए के डर का बना हुआ है माहौल
महराजगंज जिले के निचलौल से बहुआर जाने वाली सड़क की बात करें तो यह बीच जंगल से होते हुए निकलती है. सीमावर्ती क्षेत्र के बहुत से ऐसे स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चे प्रतिदिन इसी रास्ते से होकर आते जाते हैं. इनमें से ज्यादातर बच्चे ऐसे हैं जो साइकिल से अपने स्कूल और कॉलेज जाते हैं. ऐसे में उन बच्चों के लिए स्थिति पहले जैसी नहीं रही है बल्कि तेंदुए के हमलों के बाद से उनके बीच एक भय का माहौल बना हुआ है.
बहुत से ऐसे अभिभावक हैं जो अपने बच्चों को स्कूल और कॉलेज पहुंचने के लिए जा रहे हैं तो वहीं बहुत से लोग ऐसे हैं जो दूसरे रास्ते से होते हुए पहुंच रहे हैं. ऐसा बताया जा रहा है कि शाम होते ही इस सड़क पर लोगों का आना-जाना कम हो जा रहा है. इसके साथ ही पहले के अपेक्षा अभी सड़क पर लोगों का आवागमन इतना ज्यादा नहीं हो रहा है बल्कि बीते कुछ दिनों से इस सड़क पर लोगों की चहलकदमी कम हो गई है. ध्यान देने वाली बात यह है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में जंगली जानवरों ने राहगीरों पर हमला किया हो. समय-समय पर इस क्षेत्र में जानवरों के हमलों की खबरें आती रहती हैं इसके बाद से इस इलाके में रहने वाले लोगों के बीच एक दशक का माहौल बन जाता है.
निचलौल–बहुआर सड़क से जाने से कतरा रहे हैं लोग
निचलौल से बहुआर जाने वाली सड़क सीमावर्ती क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण सड़क है. जंगली जानवरों के हमले के बाद से लोगों के लिए एक मुसीबत का सबब बन गया है. ध्यान देने वाली बात यह है कि जंगल में अंदर जाने पर यह सड़क काफी जर्जर स्थिति में भी देखने को मिलती है. सड़क में बहुत से गड्ढे देखने का मिलते हैं. ऐसे में जो लोग हैं उन्हें बहुत ही सावधानी के साथ सड़क पर चलना पड़ता है. इसके साथ ही इन दिनों जंगली जानवरों के हमले के बाद से स्थिति और भी खतरनाक बन चुकी है. जहां लोग पहले सैकड़ो की संख्या में इस सड़क से आवागमन करते थे अब जाने से लोग थोड़े कतरा रहे हैं. अभी इस रास्ते से न होकर किसी दूसरे रास्ते का सहारा ले रहे हैं ताकि वह इस खतरे से दूर रहे.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

