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Bhilwara Labour Chowk: भीलवाड़ा शहर में निर्माण कार्य, मरम्मत या अन्य श्रमिक कार्यों के लिए मजदूर और मिस्त्री ढूंढ़ने वालों के लिए कुछ प्रमुख चौराहे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं. इन स्थानों पर रोजाना सुबह बड़ी संख्या में दैनिक मजदूर, राजमिस्त्री और कुशल कामगार काम की तलाश में एकत्रित होते हैं. स्थानीय ठेकेदार, मकान मालिक और व्यापारी भी इन्हीं स्थानों से अपनी जरूरत के अनुसार श्रमिकों को काम पर रखते हैं. शहर के ये पांच प्रमुख चौराहे मजदूरों और काम देने वालों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं, जिससे रोजगार और निर्माण गतिविधियों को गति मिलती है.
भीलवाड़ा – भीलवाड़ा शहर में मकान निर्माण, मरम्मत, रंगाई-पुताई, टाइल्स फिटिंग और अन्य कामों के लिए मजदूर व मिस्त्री की जरूरत हमेशा बनी रहती है. कई बार लोगों को अचानक काम निकलने पर मजदूर ढूंढने में परेशानी होती है, लेकिन शहर में कुछ ऐसे प्रमुख चौराहे हैं जहां रोज सुबह बड़ी संख्या में मजदूर और कारीगर काम की तलाश में पहुंचते हैं. इन स्थानों पर राजमिस्त्री, पेंटर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, बढ़ई और अन्य कामगार आसानी से मिल जाते हैं. सुबह के समय यहां मजदूरों की भीड़ देखने लायक होती है. शहर के लोग भी इन जगहों पर पहुंचकर अपनी जरूरत के अनुसार मजदूर तय कर लेते हैं. वर्षों से यह व्यवस्था शहर में रोजगार का बड़ा माध्यम बनी हुई है.
भीलवाड़ा शहर में बढ़ते निर्माण कार्यों और नई कॉलोनियों के विस्तार के साथ मजदूरों और मिस्त्रियों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में आर सी व्यास कॉलोनी मजदूर चौराहा, पांसल चौराहा, अहिंसा सर्किल, रीको 1 नम्बर चौराहा और पूर का बजरंग चौराहा आम लोगों और मजदूरों के बीच रोजगार का बड़ा माध्यम बने हुए हैं. सुबह के समय इन स्थानों पर सैकड़ों मजदूर काम मिलने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं. शहर के लोग भी यहां से आसानी से अपनी जरूरत के अनुसार कारीगर तय कर लेते हैं.
तिलक नगर के पास स्थित अहिंसा सर्किल भी शहर के प्रमुख मजदूर केंद्रों में गिना जाता है. यहां खासतौर पर पेंटर, टाइल्स मिस्त्री, इलेक्ट्रिशियन और प्लंबर आसानी से मिल जाते हैं. शहर में बढ़ते नए मकानों और दुकानों के निर्माण के कारण इन कारीगरों की मांग लगातार बढ़ रही है. कई लोग जरूरत पड़ने पर यहां से मोबाइल नंबर लेकर सीधे मजदूरों को बुला लेते हैं. वहीं रीको 1 नम्बर चौराहा औद्योगिक क्षेत्र के कारण काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां फैक्ट्री और गोदामों में काम करने वाले मजदूरों के साथ वेल्डिंग और मशीन रिपेयरिंग से जुड़े कारीगर भी बैठते हैं. सुबह के समय यहां रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और कई मजदूरों को तुरंत काम भी मिल जाता है.
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भीलवाड़ा शहर के उपनगर पूर में स्थित बजरंग चौराहा भी मजदूरों और मिस्त्रियों का प्रमुख केंद्र बन गया है. पूर क्षेत्र में लगातार बढ़ती आबादी और नई कॉलोनियों के कारण यहां निर्माण कार्य तेजी से हो रहे हैं. इसी वजह से मजदूरों की मांग भी बढ़ी है. बजरंग चौराहे पर सुबह के समय आसपास के गांवों से आए मजदूर भी बैठते हैं. यहां बढ़ई, रंगाई-पुताई करने वाले कारीगर और निर्माण मजदूर आसानी से मिल जाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस चौराहे की वजह से अचानक काम निकलने पर मजदूर ढूंढने में ज्यादा परेशानी नहीं होती. कई मजदूर वर्षों से यहां बैठ रहे हैं, जिससे लोगों में उनकी अच्छी पहचान भी बन चुकी है.
शहर के आर सी व्यास कॉलोनी में स्थित मजदूर चौराहा शहर का सबसे चर्चित स्थान माना जाता है. यहां सुबह सात बजे से ही मजदूरों की लाइन लगना शुरू हो जाती है. आसपास की कॉलोनियों में निर्माण कार्य अधिक होने के कारण लोग सबसे पहले यहीं पहुंचते हैं. इसके अलावा पांसल चौराहा भी मजदूरों के लिए बड़ा केंद्र बन चुका है. यहां ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मजदूर भी बड़ी संख्या में बैठते हैं. मकान मालिक और ठेकेदार सीधे यहां पहुंचकर मजदूर तय करते हैं. राजमिस्त्री, हेल्पर और प्लास्टर का काम करने वाले कारीगर यहां आसानी से मिल जाते हैं. सुबह के समय यह पूरा क्षेत्र किसी खुले रोजगार बाजार जैसा दिखाई देता है, जहां काम की तलाश में लोग घंटों इंतजार करते नजर आते हैं.

