
ARMY ATTACK DRONE : रूस यूक्रेन वॉर हो या इजरायल हिज़्बुल्लाह की लड़ाई. सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुए हथियारों में अटैक ड्रोन भी एक है. एसिमेट्रिक वॉरफेयर में ड्रोन ने सबकी नाक में दम कर रखा है. महज़ कुछ हजार या लाख कीमत के ड्रोन अगर टार्गेट को हिट कर जाए तो भी नुकसान और अटैक रोकना है, तो इसे इंटरसेप्ट करने के लिए करोड़ों की कीमत के एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करानजो कि दुश्मन आर्थिक नुकसान दे जाता है. भारतीय सेना ने भी ऐसा ही एक अटैक ड्रोन बनाया है, जो कि दुश्मन के इलाकों में 20 किलोमीटर तक अंदर जाकर मौत बरसा सकता है.
बाज की ताक़त
बाज अटैक ड्रोन दुनिया का इकलौता ड्रोन है, जो कि रॉकेट लॉन्चर फायर कर सकता है. इसका नाम बाज ही इसकी स्पीड को देखते हुए रखा गया है. ये 1 मिनट में 1 किलोमीटर की दूरी तय कर लेता है. इस अटैक ड्रोन की अधिकतम रेंज 20 किलोमीटर है. खास बात तो ये है कि स्पीड के साथ साथ ये विस्फोटक भी 50 किलो तक ले जा सकता है. ये एक मेल्टी वेपन अटैक ड्रोन है. जो कि अंग्रेज़ी के अक्षर H के आकार का है. इससे रॉकेट लॉंचर , छोटे हथियार और ग्रेनेड लॉंचर फायर करने के अलावा आसानी से मोर्टार बम और एक्पलोसिव दुशमन पर गिरा सकता है . इसे आसानी से आपरेट किया जा सकता है. कर्नल विकास चतुर्वेदी, जिन्होने इस ड्रोन को बनाया उनका कहना है कि, इस ड्रोन को सेना के हर फायरिग रेंज में टेस्ट किया जा चुका है. साथ ही 14000 फिट की उचाई पर टेस्ट किया जा चुका है और रिजल्ट पर्फेक्ट आया.
एंटी टैंक ड्रोन भी है बाज
इस ड्रोन को एंटी टैंक रोल में भा दुश्मन के MMG/LMG बंकर , एम्यूनेशन डंप और कमॉड कंट्रोल सेंटर के नष्ट करने में कारगर है. इसके अलावा इसे काउंटर इंसर्जेंसी काउंटर टेररिज्म में सर्वेलांस और आतंकियों के हाइडआउट को नष्ट करने के लिए किया जा सकता है. जम्मू कश्मीर में आए दिन होने वाले आतंकी हमले और हमलों को अंजाम देकर आतंकियों का जंगल में छिप जाना. अब बाज की नजर से कुछ नहीं छिपने वाला. ना सिर्फ़ ये उन्हें ढूँढेगा बल्कि जहां भी छिपे होंगे उस अड्डों को भी तहस नहस कर देगा. एक और खास बात बाज की ये है कि इसे लॉजेस्टिक ड्रोन की तरह भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है. इस ड्रोन की खासियत को देखते ही खुद सेना प्रमुख ने सेना में शामिल करने की मंजूरी दी है. और अब ये आर्मी डिजाइन ब्यूरो के पास और फिर सेना में शामिल होने के लिए स्वदेशी कंपनियों से इसके उत्पादन के लिए भेजा जाएगा.
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FIRST PUBLISHED : December 6, 2024, 14:18 IST

