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मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून को लेकर हिंसा के बीच खुफिया सूत्रों ने बताया कि जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश, आईएसआईएस और अलकायदा ने हाथ मिला लिया है, जिससे भारत की पूर्वी सीमा पर खतरा बढ़ गया है.
बीएसएफ के महानिदेशक भी कुछ महीनों पहले बांग्लादेश बॉर्डर से सटे इलाकों में गए थे और जांच की थी. (File Photo)
हाइलाइट्स
- जमात-उल-मुजाहिदीन, आईएसआईएस और अलकायदा ने हाथ मिलाया.
- पश्चिम बंगाल की पूर्वी सीमा पर खतरा बढ़ा. भारत के लिए बड़ी टेंशन.
- खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है. एक जैसी रणनीति अपना रहे आतंकी.
पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद वक्फ कानून को लेकर हिंसा की आग में जल रहा है. एजेंसियों की पल-पल उस पर नजर है. लेकिन अब जो खबर सामने आ रही है, वह भारत को टेंशन देने वाली है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक, भारत के तीन दुश्मनों जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश और आईएसआईएस और अलकायदा ने हाथ मिला लिया है. इसके चलते भारत का ईस्टर्न फ्रंटियर खतरे में है. खुफिया सूत्रों का ये भी कहना है कि तीनों आतंकी संगठनों का टारगेट पश्चिम बंगाल है और आने वाले वक्त में यह खतरा और बड़ा हो सकता है. क्योंकि ये संगठन पश्चिम बंगाल में फैली अशांति का फायदा उठाने की पूरी कोशिश कर सकते हैं.
शीर्ष खुफिया सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) की गतिविधियों के कारण भारत की पूर्वी सीमा पर काफी खतरा मंडरा रहा है. आईएसआईएस और अलकायदा बंगाल को अंतरराष्ट्रीय हमलों का केंद्र बना सकते हैं. इनका मकसद शरिया के खिलाफ विद्रोह दिखाकर बवाल कराना है. खुफिया एजेंसियों का ये भी कहना है कि तृणमूल कांग्रेस की सरकार जिस तरह कम्यूनल टेंशन से निपट रही है, उसने जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश को फिर से मौका दिया है. इससे न केवल बंगाल बल्कि भारत की पूरी पूर्वी सीमा के लिए खतरा पैदा हो गया है.
रणनीति एक जैसी
एजेंसियों को शक है कि इस क्षेत्र में जिस तरह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, वह ठीक उसी तरह हैं जिस रणनीति का इस्तेमाल जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश किया करते हैं. सरकार विरोधी रैलियां की जाती हैं ताकि अपने आतंकी एजेंडे को धार दी जा सके. सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया और मदरजों के जरिये बेरोजगार और निराश युवाओं को टारगेट किया जाता है. उन्हें आतंकी मंसूबे पूरा करने के लिए भर्ती किया जाता है.
कहां से आ रहा पैसा
पश्चिम बंगाल की सैकड़ों किलोमीटर लंबी सीमा में तमाम ऐसी जगह हैं, जहां बाड़ नहीं हो पाई है. नदी और खाई है. इसी रास्ते से जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश के कार्यकर्ता हथियार और पैसा मुहैया करा रहे हैं. प्रचार की सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं. 2024 में नादिया में तमाम नकली आधारकार्ड भी पकड़े गए थे, जिससे साफ हो गया था कि आतंकी यहां के स्थानीय लोगों के बीच घुलने मिलने की कोशिश कर रहे हैं. वे नकली मुद्रा का इस्तेमाल करते हैं. ड्रग्स की तस्करी करते हैं. हवाला नेटवर्क के जरिए पैसे जुटाते हैं. इनका आका पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई है.
कैसे जुड़ रहे तार
सिलीगुड़ी में हाल ही में 2 करोड़ के नकली नोट जब्त किए गए थे. जब जांच हुई तो पता चला कि ये पैसे जमात उल मुजाहिदीन मॉड्यूल के लिए थे. सूत्रों ने बताया कि बांग्लादेश में 2016 से लापता सलाउद्दीन अहमद जैसे नेता बंगाल के सीमावर्ती गांवों से मदरसों का इस्तेमाल करके काम करते हैं. जेएमबी असम के एक्यूआईएस मॉड्यूल और म्यांमार स्थित रोहिंग्या उग्रवादियों के साथ मिलकर एक क्षेत्रीय आतंकी नेटवर्क तैयार कर रहा है. सूत्रों ने बताया कि जेएमबी के स्लीपर सेल, जो पहले से ही बोधगया और पटना में हुए विस्फोटों से जुड़े हुए हैं, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकते हैं. इससे असम, त्रिपुरा और बिहार में कट्टरपंथी फैल सकते हैं, जिससे संसाधनों पर दबाव पड़ेगा और हिंदू-मुस्लिम तनाव बढ़ेगा.

