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सतना के जिला रोजगार अधिकारी अजय शुक्ला ने लोकल 18 से कहा कि यह योजना उन युवाओं के लिए संजीवनी की तरह है जो सीधे कॉलेज या संस्थान से पासआउट होते हैं. जिनके पास काम का कोई पुराना अनुभव नहीं होता है. आंकड़ों की बात करें तो सतना जिले में साल 2024 में करीब 100 युवा इसका लाभ प्राप्त कर चुके हैं. वहीं साल 2025 में लगभग 150 बेरोजगार युवाओं को विभिन्न उद्योगों और संस्थानों में ट्रेनिंग के साथ जोड़ा गया है.
आज के दौर में पढ़ाई पूरी करने के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है नौकरी पाना. वहीं डिग्री हाथ में होने के बाद भी जब युवा मार्केट में जाते हैं तो कंपनियां एक्सपीरियंस मांगती हैं. इसी खाई को पाटने और फ्रेशर्स को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की एक शानदार पहल जमीन पर कमाल कर रही है. इस योजना का नाम है मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना, सतना जिले में इस योजना का असर साफ देखने को मिल रहा है जहां हर साल सैकड़ों बेरोजगार युवाओं को रोजगार और स्किल डेवलपमेंट का एक बेहतरीन मौका मिल रहा है.
सतना के जिला रोजगार अधिकारी अजय शुक्ला ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि यह योजना उन युवाओं के लिए संजीवनी की तरह है जो सीधे कॉलेज या संस्थान से पासआउट होते हैं और जिनके पास काम का कोई पुराना अनुभव नहीं होता है. आंकड़ों की बात करें तो सतना जिले में साल 2024 में करीब 100 युवा इसका लाभ प्राप्त कर चुके हैं. वहीं साल 2025 में लगभग 150 बेरोजगार युवाओं को विभिन्न उद्योगों और संस्थानों में ट्रेनिंग के साथ जोड़ा गया है.
सतना में 100 से 150 युवाओं को हर साल मिल रहा है काम
साल 2023 से शुरू की गई मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के तहत 18 से 29 वर्ष के मध्य प्रदेश के मूल निवासी युवा आवेदन कर सकते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो आवेदक का 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा या ग्रेजुएशन होना जरूरी है. योजना की सबसे खास बात यह है कि ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग के दौरान युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर ₹8,000 से लेकर ₹10,000 तक का मासिक स्टाइपेंड भी दिया जाता है जिससे सीखने के दौरान उनका जेब खर्च भी आसानी से चलता रहे.
आवेदन के लिए जरूरी शर्तें और रजिस्ट्रेशन का तरीका
यदि आप इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो कुछ महत्वपूर्ण चीजें पहले से तैयार रखनी होंगी. आवेदक की समग्र आईडी का आधार ई केवाईसी होना अनिवार्य है साथ ही बैंक खाते का डीबीटी एक्टिव होना चाहिए. पंजीकरण की प्रक्रिया बेहद आसान और पूरी तरह से निशुल्क है, इच्छुक अभ्यर्थियों को योजना के आधिकारिक वेब पोर्टल mmsky.mp.gov.in पर जाना होगा और वहां अपनी समग्र आईडी के माध्यम से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके बाद युवा अपनी पसंद का कोर्स और ट्रेनिंग लोकेशन चुनकर कंपनियों में उपलब्ध वैकेंसी के लिए सीधे आवेदन कर सकते हैं.
कंपनियों के लिए भी है ‘डबल फायदा’ का सौदा
यह योजना सिर्फ युवाओं के लिए ही नहीं बल्कि कंपनियों और उद्योगों के लिए भी बहुत फायदेमंद है. सबसे बड़ा वित्तीय लाभ यह है कि प्रशिक्षुओं को मिलने वाले कुल स्टाइपेंड का 75% हिस्सा खुद मध्य प्रदेश सरकार वहन करती है और कंपनियों को अपनी जेब से सिर्फ 25% राशि ही देनी होती है. इससे उद्योगों को बेहद कम लागत पर काम सीखने के लिए तैयार और उत्साही मैनपावर मिल जाती है. इसके अलावा कंपनियों को भविष्य के लिए बिना किसी भारी रिक्रूटमेंट खर्च के अपनी जरूरत के हिसाब से तैयार कुशल कर्मचारी मिल जाते हैं.
पूरी तरह डिजिटल है सिलेक्शन प्रोसेस
इस योजना में लड़कों को शॉर्टलिस्ट करने की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल है. सबसे पहले कंपनियां आधिकारिक पोर्टल पर अपनी जरूरतों के हिसाब से रिक्तियां पोस्ट करती हैं. इसके बाद पोर्टल पर रजिस्टर्ड युवा अपनी योग्यता के अनुसार ऑनलाइन अप्लाई करते हैं. कंपनियां अपनी लॉगिन आईडी से आवेदकों की प्रोफाइल और रिज्यूम देखकर योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करती हैं. इसके बाद उन्हें इंटरव्यू या सीधे चयन के लिए बुलाया जाता है और दोनों पक्षों के सहमत होने पर ऑनलाइन डिजिटल कॉन्ट्रैक्ट साइन होते ही युवा ट्रेनिंग ज्वाइन कर लेता है.
1 साल की ट्रेनिंग में मिलेंगे कॉर्पोरेट के गुर
यह पूरा कार्यक्रम 1 वर्ष यानी 12 महीने की अवधि का है जिसमें काम के घंटे संबंधित कंपनी के सामान्य नियमों के अनुसार तय होते हैं. इस 1 साल के दौरान युवाओं को विभिन्न उद्योगों के 700 से अधिक कोर्सेस के माध्यम से प्रैक्टिकल नॉलेज मिलती है जिसमें मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर्स में आधुनिक मशीनों का संचालन, आईटी सेक्टर में सॉफ्टवेयर व डिजिटल मार्केटिंग और बैंकिंग व रिटेल सेक्टर्स में सेल्स और कस्टमर मैनेजमेंट जैसे काम शामिल हैं. इसके साथ ही बड़ी कंपनियों के प्रोफेशनल माहौल में काम करते हुए युवाओं को टीम वर्क, कॉर्पोरेट कल्चर, टाइम मैनेजमेंट और अपनी बातचीत की शैली को बेहतर बनाने का बेहतरीन अवसर मिलता है.
ट्रेनिंग के बाद स्थायी नौकरी का बड़ा अवसर
1 साल का यह व्यावहारिक प्रशिक्षण पूरा होने पर मध्य प्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड द्वारा एक राज्य स्तरीय सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है. जो युवाओं के करियर को एक मजबूत शुरुआत देता है. सबसे अच्छी बात यह है कि ट्रेनिंग पूरी होने के बाद कंपनियां अपनी आवश्यकता और छात्र की परफॉर्मेंस के आधार पर योग्य लड़कों को ऑन-रोल यानी स्थायी नौकरी पर रख सकती हैं. जिससे युवाओं को भविष्य में रोजगार के लिए कहीं और भटकना नहीं पड़ता है.

