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हाईकोर्ट ने सुंदरी देवी के मामले में बहुत सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने विभाग को 30 दिन के भीतर नियुक्ति देने का कड़ा आदेश दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि एक दिन की भी देरी अब बर्दाश्त नहीं होगी. अधिकारियों को 45 दिन में अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी. आदेश का पालन न करने पर अधिकारियों पर अवमानना की कारवाई होगी.

राजस्थान हाईकोर्ट ने लैंगिक समानता पर दिया बहुत अहम संदेश दिया है.
जयपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति (कंपैशनेट अपॉइंटमेंट) के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि बहू को भी बेटी के समान अधिकार प्राप्त हैं. यह निर्णय लैंगिक समानता को मजबूत करने और इस विषय पर कानूनी स्पष्टता प्रदान करने वाला माना जा रहा है. सुंदरी देवी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रवि चिरानिया ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि उन्हें बिना किसी देरी के अनुकंपा नियुक्ति दी जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश का पालन न करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि वर्ष 2023 में ही एक खंडपीठ इस बात को स्पष्ट कर चुकी है कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में बहू को बेटी के समान अधिकार प्राप्त हैं. इसके बावजूद विभाग द्वारा बार-बार तकनीकी आपत्तियां उठाना न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और इससे अनावश्यक रूप से न्याय में देरी होती है.
मामले के अनुसार, सुंदरी देवी लोक निर्माण विभाग के एक कर्मचारी की बहू हैं, जिनका 19 नवंबर 2016 को सेवा के दौरान निधन हो गया था. उस समय उनके पति एक गंभीर दुर्घटना के कारण बिस्तर पर थे. परिवार के भरण-पोषण के लिए सुंदरी देवी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने उनके आवेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया.
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब 25 मई 2020 को उनके पति का भी निधन हो गया, जिससे पूरा परिवार उनकी जिम्मेदारी पर आ गया. इसके बावजूद विभाग ने उनकी याचिका लंबित रखी और उन मुद्दों पर आपत्तियां उठाता रहा, जिन पर न्यायपालिका पहले ही स्पष्ट निर्णय दे चुकी थी.
हाईकोर्ट ने विभाग को 30 दिनों के भीतर सुंदरी देवी को नियुक्ति देने का आदेश दिया है और स्पष्ट किया है कि एक दिन की भी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. साथ ही, अदालत ने 45 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं.
अदालत ने चेतावनी दी कि आदेश का पालन न करने या अनावश्यक देरी होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी. इस फैसले को महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, खासकर उन महिलाओं के लिए जो कठिन परिस्थितियों में परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

