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Infra Project in Bengal : पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बन चुकी है. अब यहां इन्फ्रा प्रोजेक्ट शुरू होने की उम्मीद भी बढ़ गई है. प्रदेश में एक बंदरगाह का निर्माण 10 साल से अटका हुआ है. इसके निर्माण की बोली अडानी समूह ने जीती थी, लेकिन बाद में ममता बनर्जी की सरकार ने इसे बिना कारण बताए रद्द कर दिया था.

बंगाल में भाजपा की जीत से 25 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू किया जाएगा.
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद 25,000 करोड़ रुपये की ताजपुर बंदरगाह परियोजना को लेकर उद्योग जगत की उम्मीदें एक बार फिर जग गई हैं. यह परियोजना लंबे समय से अटकी हुई है. उद्योग को उम्मीद है कि राज्य और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय से प्रस्तावित इन्फ्रा प्रोजेक्ट का काम फिर से आगे बढ़ेगा. वैसे दिसंबर, 2025 में पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (डब्ल्यूबीआईडीसी) द्वारा जारी नई वैश्विक निविदा अब रद्द हो गई है, क्योंकि इसमें कंपनियों की ओर से पर्याप्त भागीदारी देखने को नहीं मिली थी.
नेशनल शिपिंग एंड लॉजिस्टिक्स कमेटी, बीसीसीएंड आई के चेयरमैन अदीप नाथ पाल चौधरी ने बताया कि बंगाल में केंद्र-राज्य के तालमेल से परियोजना के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है. हालांकि, इसका पूरा लाभ अंतिम छोर तक संपर्क और सुगम मल्टीमॉडल एकीकरण पर निर्भर करेगा. चौधरी बामर लॉरी एंड कंपनी लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक भी हैं. उन्होंने कहा कि ताजपुर बंदरगाह पूर्वी भारत के व्यापार के लिए एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है. इससे बड़े जहाज सीधे लंगर डाल सकेंगे और लॉजिस्टिक की लागत कम होगी. साथ ही कोलकाता और हल्दिया बंदरगाह पर भीड़भाड़ कम होगी जिससे जहाजों के आने-जाने का समय कम हो सकेगा.
2 हफ्ते पहले ही रद्द हुई थी निविदा
समुद्री बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि ताजपुर में एक नए बंदरगाह के डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, उसे चलाने और ट्रांसफर करने की निविदा को दो सप्ताह पहले ही रद्द कर दिया गया है, क्योंकि इसके लिए न्यूनतम बोलियां प्राप्त नहीं हुई थीं. भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में ताजपुर बंदरगाह और कुल्पी बंदरगाह के विकास का वादा किया है. ये परियोजनाएं राज्य में औद्योगिकीकरण, लॉजिस्टिक और रोजगार को बढ़ावा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं.
10 साल पहले बना था बंदरगाह का प्लान
पूर्वी मिदनापुर जिले में ताजपुर बंदरगाह परियोजना का विचार करीब एक दशक पहले बना था. शुरू में इस परियोजना को कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट (अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह, कोलकाता) के साथ भागीदारी में शुरू किया गया था. बाद में राज्य सरकार ने बंदरगाह को सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) में विकसित करने का फैसला किया था. साल 2021 में पश्चिम बंगाल सरकार ने बंदरगाह परियोजना के लिए डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, परिचालन और स्थानांतरण (डीबीएफओटी) के आधार पर बोलियां मांगीं.
अडानी की कंपनी ने जीती बोली
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकानमिक जोन (एपीएसईजेड) ने इस बोली में सज्जन जिंदल के जेएसडब्ल्यू समूह की कंपनी जेएसडब्ल्यू इन्फ्रास्ट्रक्चर को पछाड़ कर शीर्ष बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अक्टूबर, 2022 में एपीएसईजेड को आशय पत्र (एलओआई) भी सौंप दिया था. उस समय इस परियोजना में लगभग 25,000 करोड़ रुपये का निवेश आने की बात कही गई थी. हालांकि, नवंबर 2023 में राज्य सरकार ने बिना कोई कारण बताए नई निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी. जून 2025 में बंगाल मंत्रिमंडल ने अडानी समूह के साथ पूर्व में हुई व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला किया और नई निविदा प्रक्रिया को मंजूरी दी.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

