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Rajya Sabha News: राज्यसभा के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन दो दिलचस्प घटनाएं हुईं. शून्यकाल में बोलने के लिए नाम आने पर बीजेपी सांसद धर्मशीला गुप्ता ने कहा कि उनके पास बोलने वाला पेपर ही नहीं है, जिस पर सदन में ठहाके लग गए. दूसरी ओर सांसद संगीता यादव शून्यकाल में ही स्पेशल मेंशन वाला भाषण पढ़ने लगीं. सभापति ने टोका तो दोनों ने विषय बदलकर अपनी बात रखी.
संसद में आज यह हल्के-फुल्के पल देखने को मिले. पार्लियामेंट के विंटर सेशन की शुरुआत हो गई है. पहले ही दिन राज्यसभा में दो ऐसे दिलचस्प वाकये सामने आए जिन्होंने माहौल को हल्का कर दिया और सदन की गंभीर बहसों के बीच एक मानवीय झलक भी दिखा दी. मामला था शून्यकाल का, जहां सांसद अपने तय विषय पर संक्षिप्त मुद्दे उठाते हैं. लेकिन इस बार विषयों से ज्यादा चर्चा पर्चों ने बटोर ली. किसके पास पर्चा नहीं था और किसके पास था तो गलत वाला.
सबसे पहले बिहार से बीजेपी सांसद धर्मशीला गुप्ता का नंबर आया. सभापति ने स्पष्ट रूप से उनका नाम, राज्य और उनका विषय “बिहार में नेचुरोपैथी इंस्टीट्यूट” सभी बता दिया. गुप्ता खड़ी हुईं, मुस्कुराईं और बड़ी सहजता से बोलीं, “मेरे पास वो है ही नहीं जो बोलना है.” सदन में हल्की हंसी गूंज गई. गुप्ता भी इस त्रुटि पर खुद हंस पड़ीं और बोलीं “पेपर नहीं है.” सभापति ने दोबारा विषय पढ़ा और कहा “क्या कोई इनकी मदद कर सकता है?” लेकिन धर्मशीला इसी असमंजस में रहीं कि आखिर पर्चा गया कहां. बात आगे बढ़ी और सभापति ने अगले वक्ता का नाम ले लिया.
सभापति ने मुस्कुराते हुए टोका
यह घटना खत्म भी नहीं हुई थी कि कुछ ही मिनट बाद उत्तर प्रदेश की सांसद संगीता यादव के साथ इससे मिलता-जुलता, पर इससे भी रोचक मामला हो गया. शून्यकाल था, लेकिन संगीता यादव स्पेशल मेंशन वाला पर्चा लेकर उठ गईं. उन्होंने आत्मविश्वास से एआई मिशन पर बोलना शुरू किया. वो करीब एक मिनट तक बोलीं भी. सभापति ने मुस्कुराते हुए टोका, “यह जीरो ऑवर है… उसी हिसाब से बोलिए. आपका विषय दवाओं की क्वालिटी है.” संगीता यादव ने थोड़ी झेंपी मुस्कान के साथ कहा, “सर, दोनों पर्चे मुझे मिल गए थे.” फिर उन्होंने सही विषय पर बोलते हुए अपनी बात पूरी की.
‘सर मुझे विषय बताया जाए’
इतना ही नहीं, तीसरे वक्ता के साथ भी मजेदार पल आया. बिहार से ही सांसद भीम सिंह का नाम पुकारा गया तो वे खड़े हुए और सीधे बोले—“सर, मुझे विषय बताया जाए.” सभापति ने विषय बताया और इसके बाद भीम सिंह ने खाद्य पदार्थों में ऑयल की मात्रा कम करने से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रखी. सत्र के पहले ही दिन का यह हल्का-फुल्का तजुर्बा इस बात का संकेत भी था कि भारत की संसद सिर्फ नीतियों और बहसों की जगह नहीं, बल्कि इंसानी स्वभाव, छोटी-छोटी गलतियों और उनके सहज स्वीकार का मंच भी है.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

