गोंडा: आज के समय में, जहां ज्यादातर लोग बड़ी कंपनियों में नौकरी को ही सफलता मानते हैं, वहीं कुछ लोग अलग रास्ता चुनकर नई मिसाल कायम कर रहे हैं. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के एक युवक की है, जिसने टाटा कंपनी की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर खेती को अपनाया और आज लोबिया (बोड़ा) की खेती से लाखों रुपये की कमाई कर रहा है.
क्या है योग्यता
जितेंद्र कुमार बताते हैं कि उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन और बीएड की पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी की, लेकिन कुछ कारणों से उन्हें सफलता नहीं मिल पाई. फिर उन्होंने टाटा कंपनी में नौकरी शुरू की, लेकिन कुछ समय बाद ही उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी और अपने घर वापस आ गए. गांव लौटकर उन्होंने खेती-किसानी को ही अपना पेशा बना लिया.
जितेंद्र पहले शहर में नौकरी करते थे, जहां उन्हें हर महीने ठीक-ठाक वेतन मिलता था. लेकिन नौकरी की भागदौड़, तनाव और परिवार से दूर रहने के कारण वे संतुष्ट नहीं थे. तभी उन्होंने कुछ नया करने का फैसला किया. उन्होंने सोचा कि अगर सही तरीके से खेती की जाए, तो इसमें भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.
शुरुआत कैसे की
नौकरी छोड़ने के बाद जितेंद्र अपने गांव लौट आए और खेती के बारे में जानकारी जुटाने लगे. उन्होंने कृषि विशेषज्ञों से सलाह ली और इंटरनेट के माध्यम से नई तकनीकों के बारे में सीखा. इसके बाद उन्होंने लोबिया यानी बोड़ा की खेती शुरू करने का निर्णय लिया, क्योंकि इसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है और लागत भी ज्यादा नहीं आती.
कौन सी वैरायटी है
जितेंद्र बताते हैं कि उन्होंने बीएनआर काशी कंचन वैरायटी का लोबिया (बोड़ा) लगाया है. यह वैरायटी गोंडा के वातावरण के लिए काफी अनुकूल है. इसकी पैदावार अधिक होती है और इसमें रोग लगने की संभावना भी कम रहती है.
शुरुआत में उन्होंने कम जमीन पर खेती शुरू की. बेहतर बीज का चयन किया और समय-समय पर सिंचाई व खाद का सही उपयोग किया. मेहनत रंग लाई और पहली ही फसल में उन्हें अच्छा उत्पादन मिला. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अगले सीजन में खेती का दायरा बढ़ा दिया. वर्तमान में वे लगभग एक एकड़ क्षेत्र में बोड़ा की खेती कर रहे हैं.
कम समय में तैयार फसल
जितेंद्र कुमार बताते हैं कि लोबिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम समय में तैयार हो जाती है और इसकी देखभाल भी ज्यादा कठिन नहीं होती. बाजार में इसकी अच्छी कीमत मिलती है, जिससे किसान को अच्छा मुनाफा होता है. उन्होंने अपनी फसल को सीधे मंडी में बेचने के साथ-साथ स्थानीय बाजारों में भी सप्लाई शुरू कर दी है.
कौन-सी खाद का प्रयोग
जितेंद्र बताते हैं कि वे अपनी खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं करते. वे जैविक खाद का उपयोग करते हैं. साथ ही, कीटनाशक दवाओं की जगह गोमूत्र, बेसन और गुड़ का घोल बनाकर उसका छिड़काव करते हैं.
आज स्थिति यह है कि वे हर साल लोबिया की खेती से लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. उनकी इस सफलता को देखकर गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. जितेंद्र का कहना है कि अगर मेहनत और सही जानकारी के साथ खेती की जाए, तो यह भी एक बेहतरीन करियर बन सकता है.

