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Tata Group Row : टाटा समूह की सभी कंपनियों की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने एन चंद्रशेखरन को तीसरी बार चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया, लेकिन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया है. अब टाटा संस नोएल की आपत्तियों को खारिज करते हुए चंद्रशेखरन की नियुक्ति को सही करार दिया है.
चंद्रशेखरन को तीसरी बार चेयरमैन बनाने के ऐलान का नोएल टाटा ने विरोध किया है.
नई दिल्ली. दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के जाने के बाद से ही टाटा समूह में कुछ न कुछ विवाद चल ही रहा है. पिछले कुछ महीने से तो समूह में एकसाथ कई मुद्दों पर मतभेद दिख रहा है. हालिया मामला टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को तीसरी बार भी नियुक्त करने का है. इस मामले में एक ओर तो टाटा संस चंद्रशेखरन की नियुक्ति का बचाव कर रही है तो दूसरी ओर टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस नियुक्ति का विरोध किया है. यह बात तो आप सभी जानते ही होंगे कि रतन टाटा के जाने के बाद समूह की कमान नोएल टाटा के हाथ में आ गई है. लिहाजा उनके विरोध को इस तरह से खारिज किया जाना विवाद को और हवा दे रहा है.
दरअसल, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने समूह के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) के तहत चंद्रशेखरन की नियुक्ति को लेकर डाले गए वोट की कानूनी वैधता को चुनौती दी थी. इस पर टाटा संस ने पहले नोएल की सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और रिटायर्ड जज बीएन श्रीकृष्ण के कानूनी राय का हवाला दिया. टाटा संस का कहना है कि 17 सितंबर को दिया गया बोर्ड का प्रस्ताव कानूनी रूप से सही था और चंद्रशेखरन की नियुक्ति पूरी तरह वैधानिक है.
लेटर का जवाब लेटर से दिया
नोएल टाटा और टाटा ट्रस्ट ने 20 सितंबर को एक पत्र जारी कर एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर विरोध जताया था. टाटा संस ने इसके जवाब में 24 सितंबर, गुरुवार को पत्र लिखकर अपना कानूनी पक्ष रखा. पत्र के साथ टाटा संस ने कानूनी राय और मशविरे वाले डॉक्यूमेंट भी भेजे हैं. इस पत्र को टाटा संस के कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय ने जारी किया है और टाटा संस के सभी निदेशकों को भी पत्र भेजा गया है.
क्या है टाटा ट्रस्ट का विरोध
टाटा संस ने अपने पत्र में टाटा ट्रस्ट के उस तर्क का भी विरोध किया है, जिसमें प्रस्ताव के खारिज होने की वजह ट्रस्ट के दोनों नॉमिनी निदेशकों के वोट को बताया था. टाटा संस ने वरिष्ठ एडवोकेट के हवाले से भी कानून का पक्ष रखा है. विवाद की शुरुआत आर्टिकल 121 से होती है. इसमें कहा गया है कि बोर्ड के जिन फैसलों को निदेशकों के बहुमत से लिया जाता है, उसमें आर्टिकल 104बी के तहत नियुक्त निदेशकों की सहमति भी जरूरी होती है. इस आर्टिकल में टाटा ट्रस्ट के नॉमिनी से जुड़ा प्रावधान है. लिहाजा इसमें नोएल टाटा ने भी सीधे दखल दिया है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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