दूरदर्शन ने नई दिल्ली में संगीत, नृत्य और नाटक के साथ अपने 66वें स्थापना दिवस में भारत की समृद्ध विरासत और आधुनिक रचनात्मकता को उजागर किया।
India
-Oneindia Staff
देश
के
पहले
और
सबसे
विश्वसनीय
प्रसारक
दूरदर्शन
ने
आज
अपना
66वाँ
स्थापना
दिवस
नई
दिल्ली
में
एक
भव्य
सांस्कृतिक
संध्या
‘श्रृंगारजली
–
परंपरा
से
आधुनिकता
तक
की
सांस्कृतिक
यात्रा’
के
साथ
मनाया।
इस
अवसर
पर
देशभर
के
प्रतिभाशाली
कलाकारों
ने
एक
मंच
पर
भारत
की
गहरी
सांस्कृतिक
विरासत
और
समकालीन
रचनात्मकता
का
संगम
प्रस्तुत
किया।

1959
में
15
सितंबर
को
अपनी
स्थापना
के
बाद
से
दूरदर्शन
केवल
एक
प्रसारक
नहीं,
बल्कि
भारत
की
सामाजिक,
सांस्कृतिक
और
लोकतांत्रिक
यात्रा
का
दर्पण
रहा
है।
श्वेत-श्याम
प्रसारण
से
लेकर
डिजिटल
युग
तक,
दूरदर्शन
ने
समय
की
मांग
के
अनुसार
स्वयं
को
निरंतर
बदला
है
और
सदैव
जनता
का
विश्वसनीय
मंच
बना
रहा
है।
इस
वर्ष
की
स्थापना
दिवस
संध्या
में
संगीत,
नृत्य,
नाटक
और
संवाद
की
विविध
प्रस्तुतियों
के
माध्यम
से
दूरदर्शन
की
इस
समृद्ध
यात्रा
का
उत्सव
मनाया
गया।
मैथिली
ठाकुर
–
परंपरा
की
आवाज़,
आधुनिक
आत्मा
के
साथ
अपनी
मधुर
और
सशक्त
आवाज़
के
लिए
प्रसिद्ध
मैथिली
ठाकुर
ने
भजन
और
ठुमरी
प्रस्तुत
किए।
भक्ति
और
लोक
परंपराओं
को
आधुनिक
पीढ़ी
से
जोड़ने
की
उनकी
शैली
ने
दर्शकों
को
मंत्रमुग्ध
कर
दिया।
वुसत
इक़बाल
ख़ान
और
आबाद
अहमद
–
दिल्ली
घराने
की
विरासत
ऐतिहासिक
दिल्ली
घराने
का
प्रतिनिधित्व
करते
हुए
वुसत
इक़बाल
ख़ान
ने
जुगनी
और
अमीर
ख़ुसरो
के
अमर
कलाम—‘छाप
तिलक’
और
‘दमादम
मस्त
कलंदर’
प्रस्तुत
किए।
उनके
साथ
वाह
उस्ताद
सीज़न
वन
के
विजेता
आबाद
अहमद
ने
राग
अहीर
भैरव
की
ख़याल
परंपरा
से
प्रस्तुति
की
शुरुआत
की।
दोनों
कलाकारों
की
जुगलबंदी
ने
सूफ़ियाना
प्रेम,
भक्ति
और
एकता
का
अद्भुत
वातावरण
निर्मित
किया।
देवाचल
की
प्रेम
कथा
के
कलाकार
दूरदर्शन
के
चर्चित
धारावाहिक
देवाचल
के
कलाकारों
ने
मंच
पर
अपने
पात्रों
के
संवादों
के
माध्यम
से
प्रेम,
संघर्ष
और
मानवता
की
भावनाओं
को
जीवंत
किया।
इस
विशेष
प्रस्तुति
ने
दर्शकों
को
एक
संवेदनशील
और
आध्यात्मिक
अनुभव
प्रदान
किया।
नृत्य-नाटक:
सीता-रावण
वादम्
–
शक्तियों
का
युद्ध
कथकली
और
कुचिपुड़ी
का
यह
अनोखा
संगम
सीता
और
रावण
के
ऐतिहासिक
संवाद
को
आधुनिक
दृष्टिकोण
से
प्रस्तुत
करता
है।
हनुमान
की
सूक्ष्म
भूमिका
से
आरंभ
होकर
‘सीता
विशेष
दर्शन’,
‘सीता
शोकम्’
और
अंत
में
‘तीव्र
वादम्’
(शक्तियों
का
युद्ध)
ने
समाज
में
स्त्री
की
स्थिति
पर
कालातीत
प्रश्न
उठाए
और
अंत
में
हर
स्त्री
को
अपनी
अंतर्निहित
दुर्गा
शक्ति
को
जागृत
करने
का
संदेश
दिया।
संचालन
की
ऊर्जा
कार्यक्रम
का
संचालन
किया
लोकप्रिय
जोड़ी
सुगंधा
मिश्रा
और
संकेत
भोसले
ने।
अपनी
ऊर्जा,
हास्य
और
गर्मजोशी
से
उन्होंने
समारोह
को
और
भी
जीवंत
बना
दिया।
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