Last Updated:
Trump vs BRICS : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ब्रिक्स देशों के संगठन पर सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स डॉलर के खिलाफ एक हमला है, जिसे अमेरिका कतई बर्दाश्त नहीं करेगा.
ट्रंप ने ब्रिक्स संगठन को डॉलर पर हमला बताया है. नई दिल्ली. अमेरिका ने डॉलर की इज्जत और साख बचाए रखने के लिए इराक, इरान, वेनेजुएला सहित कई देशों को बर्बाद किया, लेकिन अब उनका पाला भारत, चीन और रूस जैसे दिग्गजों से पड़ा है. कसर तो उन्होंने यहां भी नहीं छोड़ी और टैरिफ लगाकर कारोबार को प्रभावित किया. आज भी बार-बार टैरिफ लगाने की धमकी दे रहे हैं, लेकिन अब उनका डर साफ-साफ दिखाई देने लगा है. इसी डर के कारण राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर उलूल-जुलूल बयान देते दिखाई देते हैं. भारत, रूस और चीन जैसे देशों संगठन ब्रिक्स से ट्रंप को कुछ ज्यादा ही डर लगता है. पिछले कुछ महीनों में कई बार ट्रंप ने इस संगठन का नाम लेकर खुले मंच से धमकी दी है.
ब्रिक्स को किस बात की चिंता
ब्रिक्स देशों ने उन एकतरफा शुल्क और गैर-शुल्क उपायों के बढ़ने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है जो व्यापार को बाधित करते हैं. अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली के साथ द्विपक्षीय बैठक में मंगलवार को ट्रंप ने कहा कि डॉलर को लेकर उनका रुख बेहद कड़ा है और जो कोई भी डॉलर में लेन-देन करना चाहता है उसे उन लोगों की तुलना में लाभ होगा जो ऐसा नहीं करना चाहते. मैंने उन सभी से कहा जो ब्रिक्स में शामिल होना चाहते हैं. ठीक है, लेकिन हम आपके देश पर शुल्क लगाएंगे. इसके बाद हर कोई पीछे हट गया. वे सभी ब्रिक्स से दूर हो गए. ब्रिक्स, डॉलर पर हमला है.
खुलेआम धमकी दे रहे डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने संभावित सदस्यों से कहा कि यदि वे ऐसा करना चाहते हैं, तो मैं अमेरिका में आने वाले आपके सभी उत्पादों पर शुल्क लगा दूंगा. ब्रिक्स देशों ने शुल्क में अंधाधुंध वृद्धि के रूप में व्यापार-प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों को बढ़ावा देने पर पिछले महीने चिंता व्यक्त की थी. ट्रंप प्रशासन ने इस साल कई देशों पर शुल्क लगाए हैं. भारतीय निर्यात पर 50 प्रतिशत शुल्क लगा हुआ है. यही वजह है कि भारत और चीन को लेकर ट्रंप का रुख हमेशा सख्त बना रहता है.
ट्रंप को क्यों सता रहा डर
डोनाल्ड ट्रंप को ब्रिक्स से डर इसलिए लगता है, क्योंकि ब्रिक्स देशों ने अपने ग्लोबल ट्रेड में डॉलर के बजाय लोकल करेंसी के इस्तेमाल पर जोर दिया है. रूस, चीन और भारत सहित समूह में शामिल अन्य देश भी डॉलर से बचकर अपनी लोकल करेंसी में लेनदेन शुरू करने पर जोर दे रहे हैं. पिछले दिनों ब्राजील में हुई ब्रिक्स देशों की बैठक में इस संगठन ने कारोबार के लिए खुद की करेंसी बनाने का प्रस्ताव दिया, जिससे डोनाल्ड ट्रंप और भी ज्यादा भड़के हुए हैं.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें

