Last Updated:
ASW-SWC Warships: भारतीय नौसेना का स्वदेशी एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) तटीय और कम गहरे पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों को नष्ट करने वाला घातक युद्धपोत है. इसकी मारक रेंज 1,800 नॉटिकल मील है. यह एडवांस्ड लाइटवेट टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर्स और अत्याधुनिक सोनार सिस्टम से लैस है. कम गहराई में पानी के नीचे छिपी साइलेंट सबमरीन को खोजने और उन्हें पानी के भीतर ही नेस्तनाबूद करने में यह माहिर है.
भारत अपनी क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है.
नई दिल्ली. चीन से भीख में मिली ‘हांगोर क्लास’ सबमरीन के दम पर हिंद महासागर में दादागीरी का ख्वाब देख रहे पाकिस्तान को इतिहास का सबसे बड़ा शॉक लगने वाला है. बीजिंग की गोद में बैठकर इस्लामाबाद जिन पनडुब्बियों को अपनी गुप्त ताकत मान रहा है, भारतीय नौसेना के नए और स्वदेशी ‘एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट’ (ASW-SWC) ने पानी के नीचे उनका डेथ वारंट लिख दिया है. समंदर के उथले पानी में अदृश्य होकर वार करने का दावा करने वाली ये चीनी सबमरीन जैसे ही भारतीय सीमा के पास फटकेंगी, इंडियन नेवी का यह खूंखार ‘सबमरीन हंटर’ अपनी तीसरी आंख यानी एडवांस्ड सोनार से इनकी सांसों तक को नाप लेगा. चीन की इस जंग लगी तकनीक को पानी की गहराई में ही जिंदा दफन करने के लिए भारत के ट्रिपल-ट्यूब टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर्स उंगलियों के इशारे पर मौत बरसाने को तैयार खड़े हैं.
भारतीय नौसेना में अब तक ऐसे 6 स्वदेशी ASW-SWC युद्धपोत शामिल हो चुके हैं जिनमें INS अरनाला और INS अंजादीप मुख्य हैं. सरकार ने कुल 16 ऐसे ‘सबमरीन हंटर्स’ बनाने की मंजूरी दी है. समुद्र में भारत की बढ़ती ताकत और हिंद महासागर में दुश्मनों की नापाक हरकतों पर नकेल कसने के लिए भारतीय नौसेना के बेड़े में ‘एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट’ (ASW-SWC) को शामिल किया जा रहा है. कोचीन शिपयार्ड (CSL) और जीआरएसई (GRSE) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित यह युद्धपोत उथले पानी यानी तटीय इलाकों में छिपी दुश्मन की खतरनाक पनडुब्बियों को ढूंढकर उन्हें नेस्तनाबूद करने में माहिर है.
वर्तमान समय में जब चीन और पाकिस्तान की सबमरीन का खतरा तटीय क्षेत्रों में बढ़ रहा है. ऐसे में भारत का यह घातक हथियार नौसेना के लिए गेमचेंजर साबित होगा. करीब 900 से 1100 टन क्षमता वाले इस आधुनिक पोत को अत्याधुनिक रडार, एडवांस सोनार और खतरनाक हथियारों के पेलोड से लैस किया गया है जो समुद्र की गहराई में साइलेंट किलर की तरह काम करने वाली सबमरीन को आसानी से अपना शिकार बना सकता है.
ASW-SWC वॉरशिप की 5 मुख्य बातें
• उथले पानी का बेताज बादशाह: यह मुख्य रूप से भारत के तटीय इलाकों (Base Port से 200 नॉटिकल मील के भीतर) और कम गहरे पानी में एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस को अंजाम देने के लिए विशेष रूप से बनाया गया है.
• स्वदेशी मारक क्षमता: इस युद्धपोत में 80% से अधिक स्वदेशी उपकरण लगे हैं जो आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित करते हैं.
• वाटर-जेट प्रोपल्शन तकनीक: यह जहाज पारंपरिक प्रोपेलर के बजाय तीन शक्तिशाली डीजल इंजन और वाटर-जेट प्रोपल्शन से चलता है जिससे यह कम गहरे पानी में भी 25 नॉट्स की तेज स्पीड से दौड़ सकता है.
• अंडर-वॉटर ‘आंखें’: दुश्मन की पनडुब्बी को पकड़ने के लिए इसमें डीआरडीओ का ‘अभय’ हल-माउंटेड सोनार और एडवांस लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार (LFVDS) फिट किया गया है.
• मल्टी-रोल ऑपरेशंस: सबमरीन को नष्ट करने के अलावा यह जहाज लो-इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस (LIMO), सर्च एंड रेस्क्यू और समुद्र में बारूदी सुरंगें (Mine-Laying) बिछाने में सक्षम है.
पेलोड, रेंज और क्षमता: कितना है दमदार?
इस उथले पानी के शिकारी को बेहद आक्रामक हथियारों से लैस किया गया है. अगर इसके मारक पेलोड की बात करें तो दुश्मन की सबमरीन पर हमला करने के लिए इसमें एलएंडटी (L&T) द्वारा निर्मित दो ट्रिपल-ट्यूब लाइटवेट टॉरपीडो लॉन्चर्स दिए गए हैं, जो पानी के अंदर टॉरपीडो दागकर पनडुब्बियों को तबाह कर देते हैं. इसके अलावा पनडुब्बी रोधी मल्टीफंक्शनल रॉकेट लॉन्चर्स भी इसमें शामिल हैं.
जहाज की खुद की सुरक्षा और सतह पर हमलों के लिए इस पर एक 30mm क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) नेवल सरफेस गन और दो 12.7mm की स्टेबलाइज्ड रिमोट कंट्रोल्ड गन्स (SRCG) लगाई गई हैं. हवा से आने वाले खतरों से निपटने के लिए इसमें शार्ट रेंज एयर डिफेंस मिसाइल (VSHORAD) लॉन्चर भी फिट है. इसकी क्षमता 1,800 नॉटिकल मील (लगभग 3,300 किलोमीटर) है यानी यह एक बार में बिना रुके लंबी दूरी तक गश्त लगा सकता है.
अंडर-वॉटर सबमरीन के खिलाफ क्या है इसकी खासियत?
समुद्र के तटीय और कम गहरे इलाकों में बड़ी पनडुब्बियों या बड़े डेस्ट्रॉयर्स को ऑपरेट करने में काफी दिक्कतें आती हैं. दुश्मन देश इसी का फायदा उठाकर उथले पानी में अपनी छोटी या डीजल-इलेक्ट्रिक सबमरीन छुपा देते हैं. ASW-SWC की सबसे बड़ी खासियत इसका कम ड्राफ्ट (Draught – 2.7 मीटर) होना है, जिसकी वजह से यह बहुत कम गहरे पानी में भी आसानी से नेविगेट कर लेता है.
इसके वेरिएबल डेप्थ सोनार पानी की अलग-अलग परतों (Thermal Layers) को चीरकर छिपी हुई सबमरीन की सटीक लोकेशन का पता लगा लेते हैं. जैसे ही दुश्मन की पनडुब्बी ट्रैक होती है, यह एंटी-सबमरीन रॉकेट्स और एडवांस्ड लाइटवेट टॉरपीडो की झड़ी लगा देता है. इसके अलावा, इसमें लगा एंटी-टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम दुश्मन द्वारा दागे गए टॉरपीडो को हवा/पानी में ही चकमा देकर डिफ्यूज (Decoy) करने की क्षमता रखता है.
सवाल-जवाब
ASW-SWC का मुख्य काम क्या है और इसे किसने बनाया है?
इसका मुख्य काम तटीय और उथले पानी में दुश्मन की पनडुब्बियों (Submarines) को खोजना और नष्ट करना है. इसे भारतीय नौसेना के लिए कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (GRSE) ने बनाया है.
इस युद्धपोत की रेंज और अधिकतम गति कितनी है?
इसकी अधिकतम गति 25 नॉट्स (लगभग 46 किमी/घंटा) है और 14 नॉट्स की रफ्तार पर इसकी कुल रेंज 1,800 नॉटिकल मील (3,300 किलोमीटर) से अधिक है.
पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए इसमें कौन से मुख्य हथियार लगे हैं?
पनडुब्बियों के खिलाफ इसमें दो ट्रिपल-ट्यूब लाइटवेट टॉरपीडो लॉन्चर्स, मल्टीफंक्शनल एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर्स और समुद्र के तल पर बिछाने के लिए एंटी-सबमरीन माइंस (Mine-laying rails) दी गई हैं.
अंडर-वॉटर सर्विलांस (निगरानी) के लिए इसमें कौन सी तकनीक का इस्तेमाल हुआ है?
इसमें पानी के नीचे देखने और सुनने के लिए डीआरडीओ द्वारा विकसित ‘अभय’ हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार (LFVDS) तकनीक का उपयोग किया गया है.
About the Author
डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें

