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Tamil Nadu Election Results: बिहार और उत्तर प्रदेश के प्रवासी मजदूरों के बीच तेजस्वी यादव की लोकप्रियता को भुनाने के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने उन्हें आमंत्रित किया था. तेजस्वी ने सीएम स्टालिन के ‘सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस’ के लिए कुछ प्रमुख सीटों पर चुनाव प्रचार किया था. अब जब तमिलनाडु चुनाव के रूझान काफी हद तक सामने आ गए हैं तो इन सीटों के नतीजे चौंकाने वाले रहे हैं.

तेजस्वी यादव ने जहां मांगे थे वोट, वहां तीसरे नंबर पर सिमटी DMK; स्टालिन की बड़ी हार के संकेत .
पटना. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने द्रविड़ राजनीति के स्थापित स्तंभों को हिलाकर रख दिया है. इतना ही नहीं, इंडि अलायंस के सहयोगी दलों के लिए भी यह बड़ा झटका माना जा रहा है. इसी कड़ी में एक नाम बिहार के नेता प्रतिपक्ष और राजद प्रमुख तेजस्वी यादव का भी है. तेजस्वी ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के ‘सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस’ (SPA) के लिए जमकर पसीना बहाया था. उन्होंने खासकर उन इलाकों में रैलियां की थीं, जहां प्रवासी उत्तर भारतीयों और मजदूरों की संख्या अधिक है. लेकिन, अब जब इसकी मतगणना हो रही है तो इसके रुझानों ने अब यह साफ कर दिया है कि तेजस्वी ने ‘सामाजिक न्याय’ और ‘उत्तर-दक्षिण एकता’ का जो नारा तेजस्वी ने बुलंद किया था, वह अभिनेता विजय की पार्टी ‘टीवीके’ (TVK) की आंधी के सामने फीका पड़ता नजर आ रहा है.
कोयंबटूर नॉर्थ: हिंदी भाषी वोट बैंक और तेजस्वी का प्रभाव
कोयंबटूर नॉर्थ उन सीटों में से एक थी जहां तेजस्वी यादव ने विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया था. यहां उत्तर भारतीय और प्रवासी मजदूरों की बड़ी आबादी है. तेजस्वी यादव ने यहां एम.के. स्टालिन के साथ एक बड़ी रैली की थी. हालांकि, रुझानों और परिणामों के अनुसार, यहां डीएमके (DMK) गठबंधन के उम्मीदवार पिछड़ गए हैं. इस सीट पर एआईएडीएमके (AIADMK) और टीवीके (TVK) के बीच सीधी टक्कर देखी जा रही है. इससे यह साफ है कि तेजस्वी का ‘प्रवासी कार्ड’ स्थानीय सत्ता विरोधी लहर को कम करने में नाकाम रहा.
तिरुपुर दक्षिण: मजदूरों के गढ़ में तेजस्वी की सभा का नतीजा
तिरुपुर दक्षिण विधानसभा सीट पर तेजस्वी यादव ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था. उन्होंने यहां बिहारी मजदूरों और तमिल जनता के बीच सेतु बनने की कोशिश की थी. लेकिन आज की मतगणना में यहां डीएमके गठबंधन के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर खिसक गए हैं. दरअसल, इस औद्योगिक बेल्ट में युवाओं ने अभिनेता विजय की पार्टी को बड़े पैमाने पर वोट दिया है. साफ है कि तेजस्वी यादव ने जहां-जहां प्रचार किया, वहां युवाओं का झुकाव ‘बदलाव’ की ओर अधिक दिखा.
मेट्टुपालयम: सामाजिक न्याय का नारा और जमीनी हकीकत
नीलगिरी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मेट्टुपालयम सीट पर भी तेजस्वी यादव ने प्रचार किया था. उन्होंने यहां पेरियार और कर्पूरी ठाकुर के सिद्धांतों का जिक्र करते हुए पिछड़ों को एकजुट करने का प्रयास किया था. लेकिन यहां के नतीजे बताते हैं कि सत्ता पक्ष (DMK) के खिलाफ गुस्सा उम्मीद से कहीं ज्यादा था. इस सीट पर विपक्षी गठबंधन ने मजबूत बढ़त बनाई है, जिससे तेजस्वी के प्रचार का असर नगण्य साबित हुआ है.
मदुराई सेंट्रल: क्या काम आया तेजस्वी का साथ?
मदुराई के शहरी इलाकों में भी तेजस्वी यादव की मौजूदगी दर्ज की गई थी. यहां की रैलियों में तेजस्वी ने भाजपा के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था. हालांकि, मदुराई सेंट्रल सीट पर डीएमके और टीवीके के बीच कांटे की टक्कर है. स्थानीय समीकरण बताते हैं कि तेजस्वी यादव ने जिन वर्गों को साधने की कोशिश की थी, वे वोट बैंक इस बार कई हिस्सों में बंट गए हैं, जिससे स्टालिन के उम्मीदवारों की राह बेहद कठिन हो गई है.
रैलियों में भीड़, पर वोटों में तब्दील नहीं
साफ है कि जिन आधा दर्जन से अधिक सीटों पर तेजस्वी यादव ने व्यक्तिगत रूप से प्रचार किया था, वहां डीएमके गठबंधन को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. वहीं, एम.के. स्टालिन और उदयनिधि स्टालिन की अपनी सीटों (कोलाथुर और चेपॉक) पर फंसी हुई स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि इस बार तमिलनाडु में ‘चेहरा’ और ‘बदलाव’ की मांग सबसे ऊपर रही, जिसमें तेजस्वी जैसे बाहरी स्टार प्रचारकों की अपील गौण हो गई.
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