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सोनम वांगचुक इस वक्त जोधपुर की जेल में बंद हैं. (फाइल फोटो) नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में लेने का बचाव किया, और तर्क दिया कि उनके बयान राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा थे. जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की.
सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक को जनमत संग्रह और रेफरेंडम की मांग करके “ज़हर फैलाने” की इजाज़त नहीं दी जा सकती, खासकर लद्दाख जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके में, जो देश की रक्षा और सीमा पर तैनात सेनाओं के लिए सप्लाई चेन के लिए बहुत ज़रूरी है. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस इलाके को ठप होने से रोकना बहुत ज़रूरी है.
केंद्र सरकार ने वांगचुक के उन बयानों पर सवाल उठाया जिनमें उन्होंने दावा किया था कि हर इलाके को यह तय करने का अधिकार है कि वह किससे संबंधित है और उन्होंने जनमत संग्रह और रेफरेंडम की वकालत की थी. मेहता ने पूछा कि क्या ऐसे बयान NSA लगाने के लिए सही मामला नहीं बनाते?
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

