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पश्चिम एशिया में मचे भीषण युद्ध और तेल संकट को देखते हुए भारत सरकार ने देश के भीतर ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए कड़ा स्टैंड लिया. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिमी देशों के भारी राजनयिक दबावों के बावजूद भारत ने अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी. भारत ने रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का आयात रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ाया, जिससे देश को बड़े आर्थिक नुकसान और महंगाई की मार से समय रहते बचा लिया गया.
केंद्र सरकार ने व्यापार समझौतों से लेकर रूस से कच्चे तेल तक बड़े फैसले लिए. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान में लगभग सौ से ज्यादा दिनों तक चले युद्ध के बाद समझौता हो गया. भले ही दोनों देशों ने हमले रोक दिए और होर्मुज फिर से ऑपरेशनल हो चुका है, लेकिन 28 फरवरी से लेकर 18 जून तक दुनिया के तमाम देशों को भी इसके प्रभाव का सामना करना पड़ा. इस दौरान भारत ने देश को नुकसान से बचाने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बड़े रणनीतिक कदम उठाए हैं.
युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट की सप्लाई चैन बुरी तरह से प्रभावित हो रही थी. ऐसे में भारत ने अपने व्यापार का तेजी से विविधीकरण किया. व्यापार में विविधीकरण भारत की रणनीति रही है. अमेरिका के साथ तनाव से भरे संबंध और पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया. इसके अलावा, फरवरी 2026 में भारत ने अमेरिका के साथ बड़ा व्यापारिक समझौता किया.
फरवरी 2026 में भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) (सऊदी अरब, यूएई, कतर, ओमान, कुवैत, बहरीन) के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ पर हस्ताक्षर किए. पश्चिम एशिया में सप्लाई संकट को देखते हुए भारत ने राजनयिक दबावों के बावजूद अपनी जरूरतों के लिए रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया.
इसके साथ ही, अमेरिका-ईरान हमलों के दौरान पीएम मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत के हितों की रक्षा करने और नए गठबंधनों को मजबूत करने के लिए कई देशों का दौरा किया. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने व्यापार और पाम ऑयल की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित की.
हमले की शुरुआत से ठीक पहले पीएम मोदी इजरायल पहुंचे थे. इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक संतुलन बनाए रखने पर चर्चा हुई. हालांकि, इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर भीषण हमला किया.
दोनों पक्षों की तरफ से जारी हमलों के बीच मई 2026 में पीएम मोदी ने एक साथ यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया. यूएई के साथ ऊर्जा आपूर्ति, जबकि यूरोपीय देशों (विशेषकर इटली) के साथ ज्वाइंट स्ट्रेटेजिक एक्शन प्लान के तहत क्रिटिकल मिनरल्स और डिफेंस डील की गईं.
अमेरिका और ईरान में समझौता होने से ठीक पहले पीएम मोदी ने फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा किया. नई व्यापारिक साझेदारियों, ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और संतुलित कूटनीति के जरिए भारत ने यह संकेत दिया कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में उसका लक्ष्य केवल नुकसान से बचना नहीं, बल्कि नए अवसरों को साधना भी है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

