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जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच सोमवार को इस गंभीर मामले को सुनेगी. सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने पुलिस की ज्यादती का हवाला देकर तुरंत दखल की मांग की. सीजेआई ने मीडिया की फेक न्यूज पर भी नाराजगी जताई है. वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के पीएम आवास घेराव पर भी वकीलों ने शिकायत की है.
छात्रों पर लाठीचार्ज के मामले में सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत करेंगे सुनवाई. (File Photo : PTI)
नई दिल्ली: जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस एक्शन पर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच इस मामले को सुनने के लिए तैयार हो गई है. अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस हाई प्रोफाइल मामले की सुनवाई होगी. सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने सीजेआई के सामने यह मुद्दा उठाया था. उन्होंने कोर्ट को बताया कि छात्र प्रदर्शन से जुड़ी पिटीशन फाइल कर दी गई है. इस पिटीशन को डायरी नंबर भी मिल गया है. उन्होंने पुलिस पर छात्रों के साथ हद से ज्यादा सख्ती करने का आरोप लगाया. सीनियर एडवोकेट ने कोर्ट से तुरंत इस मामले में दखल देने की मांग की. उनकी दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘हम इस मामले की सुनवाई सोमवार को करेंगे’.
सीजेआई ने मीडिया को क्यों लगाई फटकार?
इससे पहले सीजेआई सूर्यकांत ने मीडिया की कुछ झूठी खबरों का कड़ाई से खंडन किया. मीडिया में दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शन से जुड़ी पिटीशन को सुनने से मना कर दिया है. सीजेआई ने ओपन कोर्ट में साफ किया कि इस मामले में कोई रिट पिटीशन फाइल ही नहीं हुई थी. कोर्ट में केवल एक लेटर भेजा गया था. सीजेआई ने कहा, ‘यह पूरी तरह गलत बताया गया कि मामला कोर्ट में दाखिल किया गया था. सुबह 10 बजे तक कोर्ट में इस मामले का एक भी पन्ना दाखिल नहीं हुआ था’.
उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि मीडिया बिना जिम्मेदारी के खबरें चला रहा है. यह लेटर एडवोकेट नरेंद्र मिश्रा ने भेजा था. इसमें नीट यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया गया था. लेटर में सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने की अपील की गई थी.
वकील की मांग पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पहले दखल देने से क्यों किया था इनकार?
इस हफ्ते की शुरुआत में एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा उठाया था. उन्होंने छात्रों पर पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाते हुए तुरंत सुनवाई की मांग की थी. तब सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने उन्हें फटकार लगाई थी. कोर्ट ने कहा था, ‘कृपया हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए’. वकील ने नीट एग्जाम को लेकर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस एक्शन के वीडियो का हवाला दिया था.
इस पर बेंच में मौजूद जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहन ने साफ कह दिया था कि उन्हें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है. कोर्ट के पास वीडियो देखने का समय नहीं है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर तुरंत सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया था. लेकिन अब पिटीशन फाइल होने के बाद कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा.
पीएम आवास के बाहर विपक्ष के हंगामे पर सैकड़ों वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की?
जंतर मंतर पर छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद सियासत भी काफी गर्म हो गई है. पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में 21 जुलाई को विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के पास धरना दिया था. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई नेता इसमें शामिल थे. अब इस मामले में देश के सैकड़ों वकीलों ने सीजेआई को एक लेटर भेजा है. उन्होंने मांग की है कि हाई सिक्योरिटी वाले इलाकों में बिना परमिशन होने वाले प्रदर्शनों पर रोक लगाई जाए.
लेटर में कहा गया है कि पीएम आवास एक बेहद संवेदनशील इलाका है. यहां इस तरह का प्रदर्शन सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले की जांच करने और सख्त गाइडलाइंस जारी करने की अपील की है.
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दीपक वर्मा की गिनती डिजिटल मीडिया के सबसे तेज और उभरते हुए चेहरों में होती है. वह न्यूज18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं. दीपक ने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए हैं…
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