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गोरखपुर विश्वविद्यालय में एग्जॉटिक सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है. इसके तहत ‘चेरी टमाटर, रेड और ऑरेंज शिमला मिर्च, ब्रोकली, जुकिनी और मिर्च जैसी सब्जियों की विभिन्न वैरायटी के बीज तैयार किए जाएंगे. विश्वविद्यालय की ओर से तैयार किए जाने वाले बीज किसानों तक पहुंचाए जाएंगे. इसके साथ ही उन्हें इन फसलों की बुवाई, पौधों की देखभाल, उत्पादन और फसल को सही समय पर बाजार तक पहुंचाने के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी.
गोरखपुर: पूर्वांचल के किसानों के लिए खेती के क्षेत्र में एक नई संभावना सामने आ रही है. गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि विभाग में आने वाले कुछ महीनों के भीतर पॉलीहाउस के जरिए एग्जॉटिक सब्जियों की विभिन्न किस्मों के बीज तैयार किए जाएंगे. इन बीजों को बाद में किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही किसानों को इन सब्जियों की खेती की आधुनिक तकनीक और सही तरीके की जानकारी भी दी जाएगी.
एग्जॉटिक सब्जियों की खेती को दिया जा रहा बढ़ावा
कृषि एवं प्राकृतिक विज्ञान संस्थान के कृषि विभाग के निदेशक प्रोफेसर आर आर सिंह के अनुसार, विश्वविद्यालय में एग्जॉटिक सब्जियों की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है. इसके तहत ‘चेरी टमाटर, रेड और ऑरेंज शिमला मिर्च, ब्रोकली, जुकिनी और मिर्च जैसी सब्जियों की विभिन्न वैरायटी के बीज तैयार किए जाएंगे. विश्वविद्यालय की ओर से तैयार किए जाने वाले बीज किसानों तक पहुंचाए जाएंगे. इसके साथ ही उन्हें इन फसलों की बुवाई, पौधों की देखभाल, उत्पादन और फसल को सही समय पर बाजार तक पहुंचाने के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी.
एग्जॉटिक सब्जियों की मांग शहरी बाजारों और विशेष उपभोक्ता वर्ग में बढ़ रही है. ऐसे में किसानों के लिए पारंपरिक सब्जियों के साथ इन फसलों को उगाना आय के नए अवसर पैदा कर सकता है. हालांकि, इससे होने वाला वास्तविक लाभ बाजार की मांग, उत्पादन लागत, उपज और बिक्री मूल्य जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा.
समय पर फसल तैयार करना सबसे जरूरी
प्रोफेसर आर. आर. सिंह का कहना है कि सब्जियों की खेती में समय का विशेष महत्व होता है. किसान यदि फसल को सही समय पर तैयार कर बाजार तक नहीं पहुंचा पाते हैं तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. उनके मुताबिक, सब्जियों की खेती में ’10 दिन का अंतर भी उत्पादन और बिक्री पर असर डाल सकता है. इसलिए किसानों को मौसम के अनुसार समय पर बुवाई करने, फसल की उचित देखभाल करने और तैयार सब्जियों को समय से बाजार तक पहुंचाने की जानकारी देना बेहद जरूरी है.
गोरखपुर विश्वविद्यालय की इस पहल से गोरखपुर के साथ-साथ पूर्वांचल के किसानों को एग्जॉटिक सब्जियों की खेती से जुड़ी नई तकनीक और बेहतर बाजार अवसरों की जानकारी मिलने की उम्मीद है. आने वाले समय में विश्वविद्यालय और किसानों के बीच यह पहल क्षेत्र में सब्जी उत्पादन के नए विकल्प विकसित करने में मददगार हो सकती है.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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