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गोरखपुर के हुमायूंपुर चौराहे के पास स्थित एक छोटी सी दुकान इसी परंपरा को जीवित रखे हुए है. यहां पिछले कई वर्षों से हाथों से फॉर्मल जूते और चप्पल तैयार किए जा रहे हैं. इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बनने वाले जूतों में कारीगरी की वह बारीकी दिखाई देती है, जो मशीन से बने उत्पादों में अक्सर नहीं मिलती.दुकान का संचालन मुस्तफा करते हैं, जो वर्षों से जूता निर्माण के इस काम से जुड़े हुए हैं. उनके साथ तीन अन्य कारीगर भी काम करते हैं. हर कारीगर की जिम्मेदारी अलग-अलग होती है. कोई जूते की कटिंग करता है, कोई सिलाई का काम संभालता है तो कोई अंतिम फिनिशिंग देता है. टीमवर्क और अनुभव के दम पर यहां प्रतिदिन लगभग चार से पांच जोड़ी जूते तैयार किए जाते हैं.
गोरखपुर: मशीनों और बड़े-बड़े ब्रांडों के दौर में भी कुछ लोग ऐसे हैं, जिनके हाथों का हुनर आज भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. गोरखपुर के हुमायूंपुर चौराहे के पास स्थित एक छोटी सी दुकान इसी परंपरा को जीवित रखे हुए है. यहां पिछले कई वर्षों से हाथों से फॉर्मल जूते और चप्पल तैयार किए जा रहे हैं. इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बनने वाले जूतों में कारीगरी की वह बारीकी दिखाई देती है, जो मशीन से बने उत्पादों में अक्सर नहीं मिलती.
मुस्तफा और उनकी टीम संभाल रही है विरासत
दुकान का संचालन मुस्तफा करते हैं, जो वर्षों से जूता निर्माण के इस काम से जुड़े हुए हैं. उनके साथ तीन अन्य कारीगर भी काम करते हैं. हर कारीगर की जिम्मेदारी अलग-अलग होती है. कोई जूते की कटिंग करता है, कोई सिलाई का काम संभालता है तो कोई अंतिम फिनिशिंग देता है. टीमवर्क और अनुभव के दम पर यहां प्रतिदिन लगभग चार से पांच जोड़ी जूते तैयार किए जाते हैं.
दुकान पर केवल तैयार जूते ही नहीं बेचे जाते, बल्कि ग्राहकों के विशेष ऑर्डर भी लिए जाते हैं. कई ग्राहक अपनी पसंद के डिजाइन, रंग और आकार के अनुसार जूते बनवाने के लिए ऑर्डर देकर जाते हैं. कारीगर ग्राहकों की जरूरत और पसंद को ध्यान में रखते हुए जूते तैयार करते हैं, जिससे हर जोड़ी एक अलग पहचान रखती है.
तैयार करते हैं स्टाइलिश जूते चप्पल
दुकान पर काम करने वाले कारीगर मेवालाल बताते हैं कि, यहां फॉर्मल जूतों के अलावा स्टाइलिश चप्पलें भी बनाई जाती हैं. हालांकि अधिकांश डिजाइन फॉर्मल और क्लासिक लुक वाले होते हैं, जिनकी मांग नौकरीपेशा लोगों और पारंपरिक पहनावे को पसंद करने वालों के बीच अधिक रहती है. कई बार विशेष अवसरों के लिए भी ग्राहक यहां से ऑर्डर देते हैं. करीब एक दशक से अधिक समय से यह दुकान स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा कर रही है. कीमतों की बात करें तो चप्पलों की शुरुआत लगभग 200 रुपये से होती है, जबकि हाथ से तैयार किए गए फॉर्मल जूतों की कीमत 1000 रुपये या उससे अधिक तक पहुंच जाती है. गुणवत्ता और टिकाऊपन के कारण ग्राहक इन्हें पसंद करते हैं.
आज जब अधिकांश उत्पाद फैक्ट्रियों में बन रहे हैं, तब हुमायूंपुर की यह दुकान स्थानीय कारीगरी और पारंपरिक हुनर का एक जीवंत उदाहरण है. यह केवल जूते बनाने की जगह नहीं, बल्कि उन हाथों की कहानी है जो मेहनत, अनुभव और कला के दम पर हर दिन कुछ नया गढ़ रहे हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

