गोंडा: गांधी पार्क में राष्ट्रीय छात्र पंचायत के अध्यक्ष शिवम पांडेय के नेतृत्व में ‘शिक्षा बचाओ जन आंदोलन’ किया गया. आंदोलन में छात्रों और युवाओं ने शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर अपनी आवाज उठाई. लोकल 18 से बातचीत में शिवम पांडेय ने कहा कि छात्रों को बेहतर और सस्ती शिक्षा मिलनी चाहिए. उन्होंने निजी स्कूलों की मनमानी फीस और छात्रों से किताब, ड्रेस सहित अन्य चीजों के नाम पर लिए जा रहे शुल्क पर रोक लगाने की मांग की.
तीन मांगें पूरी होने पर आंदोलन खत्म करने की बात
राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवम पांडेय ने कहा कि संगठन की मुख्य रूप से तीन मांगें हैं. यदि इन मांगों को पूरा कर दिया जाता है तो आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि आंदोलन छात्रों के हित और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि आंदोलन एक दिन का था, लेकिन प्रशासन की ओर से बैरिकेडिंग नहीं हटाई गई तो आंदोलन आगे भी जारी रखा जाएगा. उनका कहना है कि मांगों पर निर्णायक कार्रवाई होने राष्ट्रीय छात्र पंचायत पीछे नहीं हटेगा.
बैरिकेडिंग को लेकर प्रशासन पर लगाए आरोप
शिवम पांडेय ने आरोप लगाया कि गांधी पार्क के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर दी गई है और कार्यकर्ताओं को अंदर नहीं आने दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि प्रशासन उन्हें यहां से हटाना चाहता है और कार्यक्रम करने से रोक रहा है. उन्होंने प्रशासन पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि गोंडा में लोकतंत्र की हत्या हो चुकी है. राष्ट्रीय छात्र पंचायत के प्रदेश मंत्री अंकित तिवारी ने बताया कि संगठन पिछले करीब दो-तीन साल से शिक्षा बचाओ कार्यक्रम चला रहा है. उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों की फीस में मनमानी को रोकने के लिए शुल्क विनियमन कानून लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि निजी स्कूलों में किताब, ड्रेस और अन्य व्यवस्थाओं के नाम पर छात्रों से अलग-अलग शुल्क लिया जाता है. संगठन की मांग है कि सभी निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी की किताबें लागू की जाएं.
विधानसभा का घेराव और ईको गार्डन में दिया धरना
अंकित तिवारी ने बताया कि इन मांगों को लेकर संगठन विधानसभा का घेराव कर चुका है. इसके अलावा ईको गार्डन में भी धरना दिया गया था. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से तीन महीने में मांगों को लागू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने बताया कि संगठन की ओर से करीब पांच लाख पत्र लिखकर अपनी समस्याएं बताई गईं. विधायकों और सांसदों को भी पत्र दिए गए और दोबारा पत्र भेजकर मांगों की याद दिलाई गई. इसके बावजूद सुनवाई नहीं हुई. अंकित तिवारी ने बताया कि एलबीएस डिग्री कॉलेज पहले डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध था. उस समय परीक्षा शुल्क करीब 800 रुपये था. अब कॉलेज मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर से संबद्ध है और परीक्षा शुल्क बढ़कर करीब 1700 से 1800 रुपये हो गया है. राष्ट्रीय छात्र पंचायत ने परीक्षा शुल्क कम करने की मांग की है, ताकि छात्रों पर आर्थिक बोझ कम हो सके.
जर्जर छात्रावासों को बंद करने की मांग
छात्र नेताओं ने जर्जर छात्रावासों को बंद करने की भी मांग की है. उनका कहना है कि छात्रों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए और जर्जर छात्रावासों की समस्या का जल्द समाधान किया जाए. शिवम पांडेय ने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा.
हालांकि सिटी मजिस्ट्रेट पंकज वर्मा को छात्रों नें ज्ञापन सौंपकर धरने को खत्म किया. वहीं मजिस्ट्रेट ने आश्वासन दिया कि उनकी बातें आगे पहुंचाई जाएंगी. इस प्रकार शिक्षा बचाओ जन आंदोलन हुआ खत्म.

