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केरल सरकार कार को लेकर चर्चा में है. क्योंकि इस कार को कोई भी मंत्री लेना नहीं चाह रहा है. वजह कार नहीं,बल्कि कार का नंबर है. यह नंबर है 13, जिसे अब तक किसी भी मंत्री ने नहीं लिया है. सभी परहेज कर रहे हैं.
13 नंबर वाली कार को लेने से सभी कर रहे हैं परहेज.
तिरुवनंतपुरम. केरल सरकार कार को लेकर चर्चा में है. क्योंकि इस कार को कोई भी मंत्री लेना नहीं चाह रहा है. वजह कार नहीं,बल्कि कार का नंबर है. यह नंबर है 13, जिसे अब तक किसी भी मंत्री ने नहीं लिया है. सभी परहेज कर रहे हैं. मुख्यमंत्री वी डी सतीशन के नेतृत्व वाली नई सरकार में 21 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को कार्यभार संभाला, लेकिन सरकारी वाहनों के आवंटन के दौरान नंबर 13 वाली कार को किसी मंत्री ने नहीं चुना.
केरल में लंबे समय से संख्या 13 को लेकर अंधविश्वास जुड़ा हुआ है. इसे कई लोग अशुभ मानते हैं. यही वजह है कि नई सरकार में भी कोई मंत्री इस नंबर की सरकारी कार लेने के लिए तैयार नहीं हुआ. दिलचस्प बात यह है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले 2011 से 2016 तक सत्ता में रही यूडीएफ सरकार के दौरान भी कार नंबर 13 किसी मंत्री ने नहीं लिया था.
हालांकि वामपंथी सरकारों में इस नंबर को लेकर ऐसा डर देखने को नहीं मिला. थमस इसाक ने स्वेच्छा से कार नंबर 13 को सरकारी वाहन के रूप में इस्तेमाल किया था. इसके बाद दूसरी एलडीएफ सरकार में कृषि मंत् पी प्रसाद ने भी यही नंबर अपनाया. वहीं, 2006 में तत्कालीन शिक्षा मंत्री एमए बेबी ने भी नंबर 13 वाली सरकारी कार का इस्तेमाल किया था. इस वजह से 13 नंबर की कार को लेकर पूरे प्रदेश में चर्चा है.
यह अंधविश्वास सिर्फ मंत्रियों तक सीमित नहीं रहा.केरल हाईकोर्ट में भी लंबे समय तक कोर्ट नंबर 13 नहीं था. पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक 1995 तक अदालत में कोर्ट रूम नंबर 13 मौजूद था, लेकिन बाद में उसका नाम बदलकर 12ए कर दिया गया. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी. कहा था कि अदालत जैसी संस्था को अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देना चाहिए.
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें

