बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सीट बंटवारे के बाद एनडीए के भीतर एक बार फिर हलचल मच गई है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने ऐसा दांव चला है, जिससे पूरे सत्ताधारी गठबंधन में बेचैनी बढ़ गई है. सूत्रों के मुताबिक, एनडीए में हुए सीट बंटवारे में महुआ सीट को लेकर उपेंद्र कुशवाहा बेहद नाराज़ हैं. बताया जा रहा है कि यह सीट लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के खाते में जाने की बात से कुशवाहा खफा हैं, क्योंकि वे अपने बेटे को इसी सीट से चुनाव लड़ाना चाहते हैं.
कुशवाहा के एक आदेश ने बढ़ा दिया अंदेशा
उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी का अंदाजा उसी वक्त लग गया था, जब उन्होंने अपनी पार्टी के बड़े नेताओं को एनडीए के किसी भी उम्मीदवार के नामांकन में जाने से साफ तौर से रोक दिया था. उपेंद्र कुशवाहा मंगलवार को ही सासाराम के रास्ते से वापस पटना लौट गए, फिर बीजेपी नेताओं का काफिला भी पटना स्थित उनके आवास में पहुंचने लगा.
बंद कमरे में क्या हुई बात?
बीजेपी के कई बड़े नेता नित्यानंद राय, सम्राट चौधरी, नितिन नवीन और ऋतुराज सिन्हा देर रात उपेंद्र कुशवाहा के आवास पहुंचे. रात करीब 11 बजे से शुरू हुई यह बैठक तड़के सुबह 5 बजे तक चली, लेकिन फिर भी पूरी सहमति नहीं बन पाई. सूत्रों के अनुसार, बंद कमरे में घंटों चली इस बातचीत में भाजपा नेताओं ने कुशवाहा को मनाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि वे किसी भी समझौते पर तब तक राज़ी नहीं होंगे जब तक केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सीधे मुलाकात न हो जाए.
कुशवाहा की एक लाइन ने बढ़ा दी खलबली
बीजेपी नेताओं की उपेंद्र कुशवाहा के साथ पूरी रात चली बैठक के बाद भी बात नहीं बनी. सुबह करीब 5 बजे सभी भाजपा नेता कुशवाहा के आवास से बाहर निकले, लेकिन चेहरों पर थकान के साथ-साथ असमंजस भी साफ दिख रहा था. बाहर पत्रकारों की भीड़ इसी इंतजार में खड़ी कि बंद कमरे के अंदर आखिर क्या बात हुई. 5 बजे भोर में जब कुशवाहा बाहर निकले को पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया. हालांकि उन्होंने बस ही लाइन में जवाब देकर अटकलों को और हवा दे दी. उन्होंने कहा, ‘इस वक्त एनडीए में कुछ भी ठीक नहीं.’
कुशवाहा अब दिल्ली रवाना होने वाले हैं, जहां उनकी अमित शाह से मुलाकात तय मानी जा रही है. कहा जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद ही वे एनडीए में बने रहने या अगला कदम उठाने पर फैसला लेंगे.
राजनीतिक हलकों में अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है क्या उपेंद्र कुशवाहा सचमुच ‘खेल’ करने जा रहे हैं? क्या वे फिर से सियासी पलटी मार सकते हैं या बीजेपी के भीतर दबाव बढ़ाकर बेहतर सौदेबाज़ी करना चाह रहे हैं?

