ऑपरेशन सिंदूर के अलग-अलग पहलुओं के बारे में विस्तार से बात करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि इससे रणनीतिक सोच को फिर से तैयार करने में मदद मिली, क्योंकि भारतीय सेना ने आतंकी ढांचे को खत्म करने और इस्लामाबाद की ‘लंबे समय से चली आ रही परमाणु बयानबाजी’ को धता बताने के लिए अंदर तक हमला किया. उन्होंने कहा, ‘जैसा कि आप जानते होंगे, ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है, और भविष्य में किसी भी दुस्साहस का दृढ़ता से जवाब दिया जाएगा.’
ऑपरेशन सिंदूर का वो टेंस्ड मोमेंट
जनरल द्विवेदी ने कहा कि तीनों सेनाओं के तालमेल को दिखाने वाला यह अभियान सीमापार आतंकवाद के लिए भारत का सोचा-समझा और मजबूत जवाब था, जो तैयारी, सटीकता और रणनीतिक स्पष्टता दिखाता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सेना ने अपने सैनिकों को इकट्ठा कर लिया था और वह जमीनी हमलों के लिए तैयार थी. उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के उस पल का जिक्र करते हुए कहा, ‘मई में हुए संघर्ष के दौरान भारतीय सेना ने भारी स्तर पर सेनाओं का मोबिलाइजेशन किया था. सेनाओं को भारत ने इकट्ठा कर लिया था. यह मोबिलाइजेशन भले ही क्लासिफाइड हो, लेकिन इतना जरूर था कि अगर पाकिस्तान ने जरा सी भी बड़ी गलती की होती, तो भारत पूरी तरह जमीनी हमला शुरू करने के लिए तैयार था.’ उन्होंने बताया कि इस दौरान करीब 100 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया गया.
‘ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी’
भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि देश के उत्तरी बॉर्डर पर हालात स्थिर हैं, लेकिन इसके साथ ही निरंतर सतर्कता बरती जा रही है. थल सेनाध्यक्ष ने बताया कि उत्तरी मोर्चे पर स्थिति स्थिर है, किंतु निरंतर सतर्कता आवश्यक बनी हुई है. शीर्ष स्तर की वार्ताओं, संपर्क की पुनर्बहाली और विश्वास-निर्माण उपायों से स्थिति में क्रमिक सामान्यीकरण हो रहा है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और भविष्य में किसी भी दुस्साहस का सख्ती से जवाब दिया जाएगा। भारतीय सीमा से सटे पाकिस्तानी कब्जे वाले इलाकों में अब भी कैंप मौजूद हैं. भारतीय सेना की नजर इन पर है और जरूरत पड़ी तो कार्रवाई होगी,
पाक में कितने कैंप एक्टिव?
जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, ‘हमारी जानकारी में करीब 8 कैंप अभी भी एक्टिव हैं. इनमें से 2 अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के अपोजिट और 6 नियंत्रण रेखा के अपोजिट हैं. इन कैंपस में अभी भी उपस्थिति है. हम उन पर नजर रखे हुए हैं अगर कोई हरकत हुई तो जो हमारा इरादा है हम ज़रूर (कार्रवाई को) अंजाम देंगे. इस अवसर पर थल सेनाध्यक्ष ने सीएपीएफ, खुफिया एजेंसियों, नागरिक निकायों, राज्य प्रशासन और विभिन्न मंत्रालयों जैसे गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय आदि की भूमिका की सराहना की.
बांग्लादेश पर क्या बोले आर्मी चीफ?
वहीं बांग्लादेश को लेकर सेनाध्यक्ष ने कहा कि भारतीय सेना ने बातचीत के लिए अलग-अलग चैनल खोल रखे हैं. उन्होंने बताया कि स्वयं उनकी बात भी होती रहती है. थलसेना प्रमुख के अलावा नेवी चीफ और एयर चीफ भी बात कर चुके हैं. भारतीय सेना का डेलीगेशन भी वहां गया था. यह इसलिए है ताकि कोई मिसकम्युनिकेशन न हो. पहलगाम आतंकी हमले के बाद, उच्चतम स्तर पर निर्णायक प्रतिक्रिया का स्पष्ट निर्णय लिया गया. इसके परिणामस्वरूप ऑपरेशन सिंदूर की परिकल्पना और क्रियान्वयन अत्यंत सटीकता के साथ किया गया.

